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टिकट की उम्मीद: 2024 की तैयारी में जुटे पूर्व सांसद फुरकान अंसारी

  • जामताड़ा विधायक और उनके बेटे इरफान अंसारी भी फुरकान अंसारी की हर एक्टिविटी को सोशल मीडिया पर दे रहे जानकारी
  • 2019 के संसदीय चुनाव में गठबंधन में रहते जेवीएम के खाते में गयी थी यह सीट, प्रत्याशी थे प्रदीप यादव
  • शुभम संदेश दैनिक अखबार से बातचीत में फुरकान ने कहा – अकलियत को एक सीट नहीं देने का परिणाम 2019 में देख चुकी हैं पार्टी
Ranchi: 2024 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर कमोबेश हर पार्टी के साथ-साथ संभावित प्रत्याशी भी तैयारी शुरू कर दिए हैं. सीटिंग सांसद सहित पूर्व में चुनाव लड़ चुके सभी नेता अपने-अपने संसदीय सीट पर सक्रिय हो गए हैं. वे लगातार क्षेत्र की गतिविधियों में भाग ले रहे हैं. ऐसे ही एक नेता झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी हैं. गोड्डा सीट से पूर्व में सांसद रह चुके फुरकान साहब को विश्वास हैं कि 2019 की परिस्थिति से अलग इस बार पार्टी उन्हें टिकट जरूर देगी. इसी उम्मीद से वे लगातार क्षेत्र के लोगों से मिल रहे हैं. वहीं, उनके बेटे इरफान अंसारी जो कांग्रेस के टिकट पर जामताड़ा सीट से विधायक भी हैं, अपने पिताजी की हर सक्रियता की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दे रहे हैं.

2019 में अकलियत को एक सीट नहीं देने का परिणाम देख चुकी है पार्टी

‘शुभम संदेश’ दैनिक अखबार से बातचीत में फुरकान अंसारी ने कहा है कि 2024 को लेकर उनकी तैयारी जोरों पर हैं. राज्य की 14 लोकसभा सीटों में एक सीट अकलियत यानी मुस्लिम वर्ग को मिलता रहा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में जब अकलियत को एक सीट भी नहीं मिली, तो इसका नुकसान पार्टी को झेलना पड़ा. पार्टी को चाहिए कि 2024 में अकलियत वर्ग को एक सीट जरूर दें. फुरकान अंसारी का कहना है कि गोड्डा सीट पर अकलियतों की संख्या ठीक-ठाक है. उम्मीद है कि पार्टी इस बार उनपर जरूर विश्वास जताएगी.

जेवीएम समाप्त, प्रदीप यादव अभी कांग्रेस विधायक दल के उपनेता हैं

2019 के लोकसभा चुनाव की स्थिति को देखे, तो कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और तत्कालीन झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था. तब यह संसदीय सीट जेवीएम के खाते में गयी थी. जेवीएम की ओर से प्रदीप यादव प्रत्याशी बने थे. हांलाकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वर्तमान में जेवीएम समाप्त हो चुकी है. प्रदीप यादव कांग्रेस पार्टी में विधायक दल के उपनेता हैं. ऐसे में तय माना जा रहा है कि गोड्डा संसदीय सीट पर कांग्रेस ही प्रत्याशी देगी. हालांकि प्रत्याशी कौन होगा, यह भविष्य के गर्त में छिपा है.

विधानसभा सीटों के लिहाज से कांग्रेस और झामुमो मजबूत स्थिति में

स्वतंत्रता के बाद से गोड्डा सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट हुआ करती थी. अंतिम बार 2004 में फुरकान अंसारी इस सीट से सांसद बने थे. उसके बाद 2009, 2014 और 2019 में भाजपा के निशिकांत दुबे सांसद जीत रहे हैं. इस संसदीय सीट अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों में कांग्रेस और झामुमो मजबूत स्थिति में है. बता दें कि गोड्डा संसदीय सीट में संथाल परगना के तीन जिलों के कुल छह विधानसभा सीटें आती है. गोड्डा जिले में (गोड्डा, महागामा और पौडेयाहाट विस सीटें), देवघर जिले में (देवघर और मधुपूर विस सीटें) और दुमका जिले (जरमुंडी विस सीट) शामिल हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में छह विधानसभा सीटों में तीन कांग्रेस, दो भाजपा और एक सीट झामुमो ने जीती थी. भाजपा - देवघर से नारायण दास और गोड्डा से अमिल मंडल विधायक हैं. कांग्रेस - जरमुंडी से बादल पत्रलेख, महगामा से दीपिका पांडेय सिंह और पोड़ैयाहाट से प्रदीप यादव विधायक हैं. झामुमो - मधुपुर से हफीजुल अंसारी विधायक हैं. [wpse_comments_template]  

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