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झारखंड आंदोलन से उभरे टाइगर 3 बार रहे मंत्री और अब बने मुख्यमंत्री

चंपई सोरेन को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन का हनुमान भी कहा जाता है

Ranchi : झारखंड के 12 वें मुख्यमंत्री चंपई सोरेन झारखंड आंदोलन से उभरकर निकले नेता हैं. टाइगर नाम से मशहूर चंपई सोरेन साधारण आदिवासी परिवार से आते हैं. उनके पिता सिमल सोरेन खेतीबाड़ी करते थे. चंपई की कम उम्र में शादी हो गई, लेकिन उनकी किस्मत में राजयोग लिखा था. राजनीति में आये और एक बार जो उनके कदम बढ़े फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. चंपई सोरेन को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन का हनुमान भी कहा जाता है. ये शिबू सोरेन परिवार के काफी करीबी रहे हैं. चंपई सोरेन ने पहली बार 1991 में सरायकेला सीट पर हुए उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी. फिर झामुमो में शामिल हो गये. 1991 से 2019 के बीच हुए विधानसभा चुनाव में अबतक उन्होंने 6 बार जीत दर्ज की है. सिर्फ एक बार 2000 में चुनाव हारे थे. चंपई सोरेन एक दशक पहले ही मुख्यमंत्री बन गये थे. उस वक्त राज्य में पैदा हुई राजनीतिक हालात के दौरान चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन वे सीएम नहीं बन पाये थे.

सरायकेला से 6 बार चुनाव जीते

चंपई सोरेन 2005 से 2019 तक लगातार सरायकेला विधानसभा सीट से चुनाव जीतते रहे. चंपई पहली बार भाजपा और झामुमो की संयुक्त सरकार में 11 सितंबर 2010 को मंत्री बने थे. 18 जनवरी 2013 तक वे मंत्री पद पर रहे थे. इसके बाद दोबारा 13 जुलाई 2013 को वो फिर से कैबिनेट मंत्री बने. उन्हें हेमंत कैबिनेट में खाद्य आपूर्ति और परिवहन मंत्रालय मिला. 28 दिसंबर 2014 तक वे मंत्री पद पर रहें. 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद फिर से हेमंत सरकार बनी और उन्हें हेमंत कैबिनेट में मंत्री बनाया गया. उन्हें परिवहन और अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्रालय मिला. 2 फरवरी 2024 से उन्होंने मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया है. इसे भी पढ़ें : हेमंत">https://lagatar.in/hemant-sorens-tenure-was-excellent-champai-soren/">हेमंत

सोरेन का कार्यकाल शानदार रहा : चंपई सोरेन
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