Lagatar desk : हिंदू पंचांग के अनुसार आज, 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है. नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. यह पावन पर्व 19 से 27 मार्च तक चलेगा, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है.
कलश स्थापना से होती है शुरुआत
नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा कर घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में उन्हें सफेद फूल, सिंदूर और अक्षत अर्पित किए जाते हैं.
साथ ही, मां को गाय के घी या दूध से बनी मिठाई, जैसे खीर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का वास होता है.
कौन हैं मां शैलपुत्री
मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं. उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री ही देवी पार्वती का पहला रूप हैं, जिन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया.
पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर की साफ-सफाई करें. इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
गणेश जी का आह्वान करें
मां को लाल फूल, अक्षत, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित करें
घी का दीपक जलाकर आरती करें
शंखनाद और घंटी बजाकर पूजा पूर्ण करें
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं
पहले दिन मां को दूध और घी से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है. खीर या बर्फी चढ़ाना शुभ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बनी रहती है.
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