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आज कयामत की रात है, कल भांडा फूटने का दिन

Ranchi : राज्य सभा चुनाव सर पर है. आज कयामत की रात है. कल भांडा फूटने का दिन. खास वोटरों के लिए मौज मस्ती का मौसम. मौज मस्ती का यह दिन आम माननीय वोटरों को मयस्सर नहीं. क्योंकि बाकी चुनाव में खर्च का हिसाब है. राज्यसभा चुनाव के खर्च बेहिसाब है.

 

चुनाव सर पर सवार है. उम्मीदवार पांच सितारा होटलों में हैं. Luxury के साजो सामान भी हैं. ना आंखों में नींद ना ही दिल को चैन. सब कुछ है, पर चैन नहीं. वोट से पहले सभी वोटरों को पांच सितारा होटल में कैद कर लिया गया है. शायद एक दूसरे पर यकीन की कमी है. यकीन हो भी कैसे ? यह तो राजनीति के वसूल के खिलाफ है. राजनीति में कहा कुछ जाता है, किया कुछ जाता है. हर बात के लिए दलील तलाश ली जाती है. 

 

बहरहाल मौज तो वोटरों की है. होटल के कैदखाने में भी उनके लिए Luxury है. इस मौज के लिए तरसता को आम वोटर है. उसके साथ तो झूठा वायदा करने पर भी कानून की तलवार लटक जाती है. क्योंकि कानून में आम चुनाव के लिए खर्च का हिसाब तय है. वोटरों को अपने पाले में करने के लिए उन्हें खिलाना-पिलाना और मौज मस्ती का मौका देना जुर्म है. उम्मीदवार को पाई-पाई का हिसाब रखना देना पड़ता है. यह अलग बात है कि सारी पाबंदियों के बावजूद गड़बड़ी हो जाती है.

 

राज्यसभा चुनाव में खर्च का हिसाब नहीं रखना है. यानी खर्च बेहिसाब है. कानून बनाने के दौरान यह माना गया कि राज्यसभा चुनाव में ना तो रैलियां निकालनी है ना ही भोंपू बजाकर प्रचार करना है. इसलिए हिसाब रखने की मजबूरी नहीं है. फिर वोटर की तादाद भी तो करोड़ों में नहीं. उन्हें तो उंगलियों पर गिना जा सकता है. इसलिए हिसाब रखने की पाबंदी नहीं तय की गयी. यानी चुनावी खर्च बेहिसाब है. 

 

वोटर जो भी खायें पियें. इससे किसी को क्या लेना-देना. आम वोटर, खास की मौज मस्ती की खबरें पढ़ कर जलें या भुने. उनकी मर्जी. इसके किसी को क्या. कल सुबह होते ही खास वोटरों को Luxury सवारी से बूथ तक लाया जायेगा. वहां उन्हें अपनी मर्जी से वोट देना है. रात के मॉक ड्रिल का हश्र क्या होगा? कोई नहीं जानता. वोटरों पर पांच सितारा होटलों की मौज मस्ती की खुमारी कल तक रहेगी या नहीं. इसका भांडा तो कल फूटेगा.

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