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दुखद : जान का खतरा बताकर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के उत्तराधिकारी प्रवीर नाथ शाहदेव ने की बड़ी घोषणा

  • अपनी सारी अचल संपत्ति को स्वतंत्रता सेनानियों व शहीद सैनिकों के परिजनों लिए किया दान, सरकार खर्च कर सकती है इसे.
  • राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र के साथ घोषणा सह शपथ पत्र भेजा
  • प्रशासनिक एवं पुलिस अफसरों से बार-बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उठाया यह कदम
Ranchi : अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव और जगन्नाथपुर मंदिर के संस्थापक ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव के प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी और झारखंड सेनानी कोष संचालन समिति गृह मंत्रालय के झारखंड सदस्य लाल प्रवीर नाथ शाहदेव ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने यह घोषणा खुशीपूर्वक नहीं, बल्कि आए दिन धमकी से परेशान होकर की है. उन्होंने अपनी जान को खतरे का हवाला देते हुए अपनी सारी अचल संपत्ति दान में देने की घोषणा कर दी है. साथ ही यह भी घोषित किया है कि उनकी सारी अचल संपत्ति उनके, उनकी पत्नी सुनीता शाहदेव एवं बेटी महिमा शाहदेव के नावल्द मृत्यु हो जाने पर इस संपत्ति से प्राप्त राशि का खर्च शहीद व स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों, शहीद सिपाहियों एवं शहीद सैनिक के वंशजों पर सरकार खर्च कर सकेगी. उन्होंने एक घोषणा और शपथ पत्र राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजा है और इसको लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/09/shadew-1.jpg"

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बार-बार अफसरों को अवगत कराया, नहीं हुई कोई कार्रवाई

लाल प्रवीर नाथ शाहदेव ने शुभम संदेश से बातचीत में अपने इस बड़े निर्णय के बारे में विस्तार से बताया. कहा कि उन्होंने एक कदम खुशीपूवर्क नहीं बल्कि मानसिक रूप से परेशान होकर उठाया है. आए दिन धमकी से वे आजिज आ चुके हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब वे जगन्नाथपुर मंदिर भी पूजा-अर्चना के लिए ठीक से नहीं जा पाते हैं. वे अपने घर और यहां तक कि अपने बाथरूम में भी सीसीटीवी कैमरा लगा चुके हैं. शाहदेव ने बताया कि आये दिन असामाजिक तत्वों द्वारा एवं कुछ शाहदेव परिवार के सदस्यों द्वारा जगन्नाथपुर मंदिर, बड़का गढ़ स्टेट की जमींदारी और शहीद परिजनों की वंशावली के संदर्भ में जान का खतरा बना रहता है. इसको लेकर बराबर प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को आवेदन देकर अवगत कराया जाता रहा है. इसके बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी. ऐसा न हो कि उनकी यह अचल संपत्ति ही उनके एवं उनके परिवार के लिए खतरा बन जाए. इसलिए उन्होंने अंतत: काफी सोच-विचार कर अपने परिवार से सलाह-मशविरे के बाद यह कदम उठाया है. इसे भी पढ़ें – बिरसा">https://lagatar.in/prisoner-cuts-his-own-throat-in-birsa-munda-jail-family-members-say-murder-was-committed/">बिरसा

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