Ranchi : झारखंड में कौशल विकास के तीसरे चरण तक के लिए निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की पहल नहीं हुई. महाराष्ट्र और केरल में भी यही स्थिति रही. ऑडिट के दौरान ट्रेनर और ट्रेनिंग के मूल्यांकन करने का ब्योरा ही ऑडिट टीम को नहीं मिला. इसके अलावा भुगतान से संबंधित गड़बड़ी भी पायी गयी. भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तीसरे चरण के ऑडिट के बाद अपनी रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है.
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में की गयी थी. यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है. इस योजना का उद्देश्य औद्योगिक जरूरतों और बाजार की मांग के अनुरूप युवाओं के कौशल का विकास करना है.
CAG ने केंद्र प्रायोजित इस योजना के तीन चरण का ऑडिट किया. तीनों चरण में कुल 1.10 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया गया. योजना के पहले चरण की अवधि वित्तीय वर्ष 2015-16 थी. पहले चरण मे 24 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया. दसरे चरण (2016-20) के दौरान एक करोड़ और तीसरे चरण (2021-22) के दौरान 7.37 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया.
ऑडिट के लिए झारखंड सहित आठ राज्यों को चुना गया. इन राज्यों में असम, बिहार, केरल, महाराष्ट्र, ओड़िशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का नाम शामिल है. ऑडिट के दौरान राज्यों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की स्थिति का आकलन करने के लिए नमूना के तौर पर ट्रेनिंग सेंटर को चुना गया. साथ ही प्रशिक्षित लोगों का सर्वे किया गया. इस क्रम में झारखंड की स्थिति का आकलन करने के लिए 24 ट्रेनिंग सेंटर को नमूना के तौर पर लिया गया. साथ ही 209 लाभुकों का सर्वेक्षण किया गया.
ऑडिट में पाया गया कि NSDPE (National Policy for Skill Development and Entrepreneurship) कौशल प्रशिक्षित लोगों की जरूरतों का आकलन किया. इसके लिेए सबसे ज्यादा मांग वाले पांच क्षेत्रों को चुना गया. इन क्षेत्रों में Construction, Logistic, Beauty and wellness , Furniture And Fitting शामिल है.
NSDPE ने जरूरतों का आकलन करने के बाद इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर राज्य को जिम्मेवारी दी. झारखंड के लिए 4452.80 हजार लोगों को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया. यह NSDPE द्वारा जरूरतों का किये गये आकलन के 3.78 % था. लेकिन झारखंड ने इसमें से सिर्फ 88.45 हजार को ही प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र देने का काम पूरा किया. इसमें से 1.66 हजार लोगों को Short Term Training और 86.79 हजार लोगों को Special Project के तहत प्रशिक्षण देकर प्रमाण पत्र दिया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है झारखंड में प्रशिक्षण के इस लक्ष्य को पूरा करने की ठोस पहल नहीं की गयी. यह स्थिति महाराष्ट्र और केरल की भी रही. महाराष्ट्र के लिए 15522.19 हजार को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य निर्धारित था. लेकिन इसमें से 264.59 हजार लोगों को ही प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र देने में सफलता मिली. केरल को 3153.00 हजार लोगों को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य निर्धारत था. लेकिन 76.48 हजार को ही प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया जा सका.
रिपोर्ट में ऑडिट के दौरान चुने गये सभी राज्यों में पायी गयी गड़बड़ी का उल्लेख भी किया गया है. इसमें कहा गया कि ऑडिट के दौरान बड़े पैमाने पर ट्रेनर और मूल्यांकन करने वालों को ब्योरा नहीं मिला. नियमानुसार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण देने वाले और मूल्यांकन करने का विस्तृत ब्योरा रखने की बाध्यता है.


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