Soniya Ranchi: लॉकडाउन के कारण ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय के सामने रोजी-रोटी का संकट और भी ज्यादा बढ़ गया. उनके साथ शुरू से ही भेदभाव होता आया है. लॉकडाउन के बड़े संकट के बीच में भी उनके साथ भेदभाव और सरकारी सुविधाएं से भी पिछड़े हुए हैं. वे टोला बधाई का काम और शादियों समारोह, रोड, बसों में मांग कर अपना जीवन यापण करती हैं. लॉकडाउन के वजह से शादियों समारोह जैसे पर रोक लगने पर उनके जीवन की रोजी- रोटी बर्बादी के कगार पर आ गई हैं. इसे भी पढ़ें-देश">https://lagatar.in/18645-new-cases-of-corona-virus-infection-in-the-country-number-of-infected-people-crosses-1-crore-4-lakh/16777/">देश
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alt="ट्रांसजेंडर्स" width="720" height="383" /> जरूरतमंद ट्रांसजेंडर्स को मदद करती महिला[/caption] जमशेदपुर, अमरजीत एक पढ़े-लिखे ट्रांसजेंडर है. उनका कहना हैं कि “ट्रांसजेंडर के साथ शुरू से ही समस्या रही है, लेकिन लॉकडाउन का समय ट्रांसजेंडर के लिए और भी ज्यादा बुरा था. हमारे लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ़ से कोई खास योजना नहीं बनाई गई हैं. सरकार कहती है कि ट्रांसजेंडर को नौकरी देंगे. लेकिन जो सरकार हमें पास नहीं दे रही है. वो हमारी क्या मदद करेगी. हम लोगों के पास कोई राशन भी नहीं हैं. न ही कोई आर्थिक मदद मिलती है. लॉकडाउन के बीच गैर सरकारी संगठन कुछ राशन की मदद किया. लेकिन वो भी कब तक मदद करेंगे. हमारे समुदाय के पास कोई रोजगार नहीं है.” इसे भी देखें- जहां पूरा देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ी हुई है. लॉकडाउन के बीच और बाद में भी हर व्यक्ति परेशान है. लेकिन उन लोगों के पास कोई न कोई है जिससे वे अपनी समस्या को बांट सकते हैं और मदद मांग सकते हैं. लेकिन हमारे पास तो कोई नहीं है. किन्नर लोग सिंगल लाइफ जीते हैं. वो किससे अपनी समस्या बांटे करें. रांची, नरगिस कहती है कि “राशन, किराया और मेडिकल की असुविधा है. किन्नर समुदाय हमारे समुदाय में जागरूकता की काफी कमी हैं. वो जब तक जागरूक नहीं होंगे तब तक बदलना काफी मुश्किल है. हमारे समुदाय के लोगों के पास बैंक खाते नहीं है न ही किसी तरह का प्रमाण पत्र हैं. अपने समुदाय वालों से कहती रही हूं कि सभी लोग अपना राशन कार्ड बना लें. लेकिन किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लेते. हालात यह है कि राशन कार्ड न होने के बाद लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है.
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परिवार का भी सहारा नही, बता रहे हैं परेशानी
ट्रांसजेंडर के लिए एक स्वंयसेवी संगठन के रूप में रेखा मिस्रा काम करती हैं. उनका का कहना है कि ट्रांसजेंडर्स के साथ एक समस्या है. उनके अपने समुदाय के अलावा बाहर के कोई दोस्त नहीं होते हैं. न ही परिवार का साथ और सपोर्ट होता हैं. परिवार से अलग होने के कारण उनके पास न कोई डाक्यूमेंट्स, आधार कार्ड भी नहीं होता हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास मदद के लिए कई ऐसे कॉल आते हैं जिनके पास घर के लिए किराये देने के लिए पैसे नहीं होते हैं. [caption id="attachment_16792" align="aligncenter" width="720"]alt="ट्रांसजेंडर्स" width="720" height="383" /> जरूरतमंद ट्रांसजेंडर्स को मदद करती महिला[/caption] जमशेदपुर, अमरजीत एक पढ़े-लिखे ट्रांसजेंडर है. उनका कहना हैं कि “ट्रांसजेंडर के साथ शुरू से ही समस्या रही है, लेकिन लॉकडाउन का समय ट्रांसजेंडर के लिए और भी ज्यादा बुरा था. हमारे लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ़ से कोई खास योजना नहीं बनाई गई हैं. सरकार कहती है कि ट्रांसजेंडर को नौकरी देंगे. लेकिन जो सरकार हमें पास नहीं दे रही है. वो हमारी क्या मदद करेगी. हम लोगों के पास कोई राशन भी नहीं हैं. न ही कोई आर्थिक मदद मिलती है. लॉकडाउन के बीच गैर सरकारी संगठन कुछ राशन की मदद किया. लेकिन वो भी कब तक मदद करेंगे. हमारे समुदाय के पास कोई रोजगार नहीं है.” इसे भी देखें- जहां पूरा देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ी हुई है. लॉकडाउन के बीच और बाद में भी हर व्यक्ति परेशान है. लेकिन उन लोगों के पास कोई न कोई है जिससे वे अपनी समस्या को बांट सकते हैं और मदद मांग सकते हैं. लेकिन हमारे पास तो कोई नहीं है. किन्नर लोग सिंगल लाइफ जीते हैं. वो किससे अपनी समस्या बांटे करें. रांची, नरगिस कहती है कि “राशन, किराया और मेडिकल की असुविधा है. किन्नर समुदाय हमारे समुदाय में जागरूकता की काफी कमी हैं. वो जब तक जागरूक नहीं होंगे तब तक बदलना काफी मुश्किल है. हमारे समुदाय के लोगों के पास बैंक खाते नहीं है न ही किसी तरह का प्रमाण पत्र हैं. अपने समुदाय वालों से कहती रही हूं कि सभी लोग अपना राशन कार्ड बना लें. लेकिन किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लेते. हालात यह है कि राशन कार्ड न होने के बाद लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है.
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