गांवों में 4-6 घंटे तक ही बिजली मिल रही
सुदेश ने कहा कि पूरे राज्य में पखवाड़ा भर से बिजली की भारी कटौती हो रही है. जगह-जगह से मिल रही खबरों के मुताबिक शहर में जहां 10-12 घंटे बिजली मिल रही है, वहीं गांवों में 4-6 घंटे तक ही बिजली मिल रही है. इस वजह से पढ़ाई-लिखाई, खेती सिंचाई, व्यापार और इलाज के क्षेत्र में प्रतिकूल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. विकास और आर्थिक प्रगति भी प्रभावित हुआ है. [pdfjs-viewer url="https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/Letter-to-CM-Electricity-Problem-28-April-2022-1-1.pdf"attachment_id="299296" viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=true print=true]
कदम पहले उठाये जाते, तो ऐसी नौबत नहीं आती
इस बीच झारखंड चेंबर ने मंगलवार को राजधानी रांची में प्रेस कांफ्रेंस कर बिजली की चरमराई व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए जेबीवीएनएल के डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर सवाल खड़ा किए हैं. पत्र में सुदेश महतो ने लिखा है कि मुख्यमंत्री जी, मंगलवार को ही आपने बिजली संकट पर सरकार का पक्ष रखते हुए बताया है कि मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिल रही है. अतिरिक्त बिजली खरीदने के लिए सरकार ने 1690 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. ये कदम पहले उठाए जाते तो राज्य के लोगों को इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता. इसे भी पढ़ें - रांची">https://lagatar.in/union-coal-ministers-meeting-in-ranchi-said-there-will-be-no-shortage-of-coal-for-power-plants-production-continues/">रांचीमें केंद्रीय कोयला मंत्री की बैठक, कहा- पावर प्लांटों को नहीं होगी कोयले की कोई कमी, उत्पादन लगातार जारी है
लोडशेडिंग की रिशिड्यूलिंग अप्रासंगिक
खबरों के मुताबिक जेबीवीएनएल ने लोडशेडिंग को रिशिड्यूल किया है. इसमें प्रयास होगा कि रात 12 बजे से सुबह के छह बजे के बीच लोडशेडिंग ना हो. इससे संबंधित निर्देश भी जारी किए गए गए हैं. यह रिशिड्यूल भी अप्रासंगिक प्रतीत होता है. इन दिनों कई परीक्षाएं निर्धारित हैं. पढ़ने के लिए बिजली समय पर उपलब्ध हो, इसका ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए. तात्कालिक तौर पर इस भयावह समस्या के समाधान के अलावा बिजली उत्पादन, वितरण और संचरण की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जो योजनाएं हैं, उन्हें टाइमबॉन्ड पूरा किया जाना चाहिए.ढाई साल में सरकार ने बिजली क्षेत्र में काम नहीं किया
अगर हम कार्य योजना और सिस्टम के तौर-तरीके पर गौर करें, तो साफ तौर पर मालूम पड़ता है कि ढाई साल में सरकार ने बिजली के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज नहीं की है. विनम्र आग्रह होगा कि खनिज संपदा से परिपूर्ण झारखंड को इस विषम परिस्थिति से बाहर निकालें, ताकि राज्य विकास की राह पर आगे बढ़े. इसे भी पढ़ें - इधर-उधर">https://lagatar.in/raghuvar-das-demands-from-hemant-government-reduce-vat-from-petrol-and-diesel-soon/">इधर-उधरकी बातें छोड़कर राज्य में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करें मुख्यमंत्री- रघुवर दास [wpse_comments_template]

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