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आदिवासियों की पहचान रुढ़िवादी प्रथा से होती हैः संदीप उरांव

Ranchi: पांचवी अनसूची क्षेत्र में क्रिश्चियन समाज का कोई स्थान नही है. क्योंकि धर्मांतरित ईसाई लोग पेसा कानून से बाहर हो चुके हैं. ये बात जनजाति सुरक्षा मंच समेत अन्य़ आदिवासी संगठनों ने रविवार को धुर्वा स्थित सरहुल पूजा स्थल धुमकुड़िया भवन में प्रेस वार्ता में कहा. लोगों ने कहा कि पेसा कानून को पी पेसा कानून बताया जा रहा है. कहा कि आदिवासी समाज को उलझाया जा रहा है. भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है. पेसा नियमावली/कानून में बदलाव लाने का प्रयास है. पेसा कानून में पी पेसा कहीं भी जिक्र नहीं है. 24 दिसम्बर को आदिवासी बुद्धिजीवी मंच नहीं बल्कि ईसाई बुद्धिजीवी मंच ने पेसा कानून को लेकर प्रेस वार्ता किया था. जिसमे ईसाई आदिवासी विधायक औऱ मंत्री भी शामिल हुए थे. पेसा कानन को पी पेसा बनाया जा रहा है. जोकि आदिवासी समाज को उलझाने का प्रयास कर रहा है.

धर्मांतरित ईसाई पेसा कानून से बाहर हो चुके हैं

जवजाति सुरक्ष मंच के लोगों ने कहा कि धर्मांतरित ईसाई पेसा कानून से बाहर हो चुके हैं. क्योंकि ये लोग आदिवासी समाज का पंरपरा और संस्कृति को नही मानते हैं. ईसाई मिशनरी चाहता है राज्य में छठी अनुसूची क्षेत्र लागु हो. जो स्वशासी जिला परिषद (Autonomous District Councils) तथा ( Regional Councils) का प्रावधान है. इसमें निर्वाचन (वोटिंग) तथा नामांकन के प्रक्रिया से ही चुने जाते हैं. निर्वाचित सदस्यों को आदिवासियों के सामाजिक रीति रिवाज और परंपराओं आदि से संबंधित कानून बनाने का अधिकार है. जबकि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में पारंपरिक और रूढ़िवादी व्यवस्था है. जहा पर क्रिश्चियन समाज के लिए स्थान नहीं है. इसलिए ईसाई बुद्धिजीवी मंच छठी अनुसूची को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी गया था. जिसे खारिज किया जा चुका है.

आदिवासियों की अपनी सांस्कृतिक पहचान है

जनजाति सुरक्षा मंच का संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि पंचायत के उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 धारा 4 (क) और (घ) में कहा गया है. पंचायत पर जो भी कानून बनाया गया है वह रुढ़िवादी, सामाजिक, धार्मिक प्रथाओं और समुदाय के संसाधनों की परंपरागत प्रबंध पद्धतियों के अनुकूल होगा. प्रत्येक ग्राम सभा जनता की समस्या से अवगत होंगे. आदिवासियों की पहचान परंपराओं और रुढ़िवादी प्रथा से होती है. उनकी अपनी सांस्कृतिक पहचान है. झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 एवं पेसा 1996 को संवैधानिक वैध मानी गई है. समिति ने कहा है कि चर्च मिशनरी आदिवासी/जनजातियों का हितैषी बनकर आदिवासियो का मूल जड़ और पहचान को समाप्त कर रहा है. मौके पर क्षेत्रीय संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच का अध्यक्ष मेघा उरांव, संयोजक संदीप उरांव ,रवि प्रकाश उरांव, प्रांत संयोजक हिंदुवा उरांव, जिला संयोजक जगन्नाथ भगत, सनी उरांव, जय मंत्री उरांव, प्रदीप टोप्पो, मनोज भगत, लोरया उरांव, राजू उरांव, विशु उरांव, फागु मुंडा, कैलाश मंडा, नीतू उरांव, जय मंगल उरांव, विश्वकर्मा पहान, बालेश्वर पहान, गुरुचरण मुंडा, साजन मुंडा, बंधना मुंडा, झेले पाहन, विजय मुंडा, सुशीला उरांव, लालमुनी देवी, बहादुर पाहन एवं अन्य मौजूद थे. इसे भी पढ़ें – साउथ">https://lagatar.in/major-accident-in-south-korea-179-passengers-died-due-to-plane-crash/">साउथ

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