Ranchi : प्रकृति पूजक आदिवासियों ने खेती-बाड़ी में सहयोग करने वाले पशुओं की पूजा-अर्चना करके सोहराय पर्व मनाया. आदिवासी बहुल क्षेत्रों में घर में रखे गए पशु गाय-बैल की पूजा की गयी. इन पशुओं के रहने वाली जगह गौशाल को सजाया-संवारा गया. गोबर से निपकर उस जगह को शुद्ध किया गया. पशुओं को नाचते-गाते हुए गौशाल में प्रवेश कराया गया. इस दौरान पशुओं को नहा-धुलाकर सजाया-संवारा गया. पशुओं की रोड़ी-सिंदूर, धूप और चिरचिटी दिखाकर पूजा-अर्चना की गयी. इसके बाद लाल मुर्गे की बलि दी गयी. जिसे बाद में प्रसाद के रूप में सुड़ी भात बनाया गया, इसमें बलि दी गयी मुर्गे को भी डाला गया. इस संबंध में केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने बताया कि यह त्योहार दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है. अच्छी खेती-बाड़ी होने, अगले वर्ष फिर खेती बाड़ी में इन पशुओं का साथ मिलने और उनके स्वस्थ्य रहने की कामना के साथ इसे मनाया जाता है. इन्होंने बताया कि सोहराय पर्व जीवन को एक रौशनी देता है. जीने की नयी राह दिखाता है. खेती-बाड़ी में पशुओं का बड़ा योगदान होता है. इसलिए उनके पुश स्वस्थ्य रहें, इसकी कामना के लिए भी इस पर्व को मनाया जाता है. इसे भी पढ़ें – रांची">https://lagatar.in/solar-eclipse-also-visible-in-ranchi-see-the-view-of-the-eclipse-in-the-eyes-of-the-camera/">रांची
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आदिवासियों ने पशुओं की पूजा-अर्चना कर मनाया सोहराय पर्व

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