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रोम में आभास के आदिवासियों ने किया संत पेत्रुस बासिलिका के पवित्र द्वार में प्रवेश

Lagatar Desk : रविवार को रोम में रह रहे आभास के आदिवासी भाई-बहनों ने संत पेत्रुस बासिलिका के पवित्र द्वार में प्रवेश किया. कार्यक्रम की शुरुआत रोम स्थित येसु समाजी के जनरल कुरिया से हुई, जहां आभास के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो ने उपस्थित भाई-बहनों का स्वागत किया. इसके बाद येसु समाजी के फादर ख्रिस्ती ने अपने प्रवचन में आध्यात्मिक जीवन की सुंदरता और दण्डमोचन पर प्रकाश डाला. पापस्वीकार संस्कार के बाद सभी ने जुबिली कूर्स और राट्रीय ध्वज के साथ पिया पियात्सा पैदल यात्रा करते हुए भजन और रोजरी प्रार्थना की और संत पेत्रुस के पवित्र द्वार में प्रवेश कर संत पेत्रुस की कब्र के पास विश्व में शांति, विशेष रूप से भारत में शांति, एकता और अखंडता के लिए प्रार्थना की. अंत में फादर संजय तिर्की की अगुवाई में मिस्सा संपन्न हुआ. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/04/roam1.jpg"

alt="fjfj" width="600" height="400" /> जुबिली वर्ष में पवित्र द्वार का विशेष महत्व है. यह द्वार पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह येसु का प्रतीक है. येसु स्वयं कहते हैं कि, मैं भेड़शाला का द्वार हूं…यदि कोई मुझ से होकर प्रवेश करेगा, तो उसे मुक्ति प्राप्त होगी. वह भीतर-बाहर आया-जाया करेगा और उसे चरागाह मिलेगा...मैं इसलिए आया हूं कि वे जीवन प्राप्त करें-बल्कि परिपूर्ण जीवन प्राप्त करें" (योहन 10:7-10). यह द्वार केवल जुबिली वर्ष में श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है. "आभास" का अर्थ है अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों से रोम आए आदिवासी भाई-बहनों का समूह है. ये लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करने या धार्मिक संस्थाओं में सेवा देने के लिए इटली में आए हैं. इस तीर्थयात्रा में 50 से अधिक भाई-बहनों ने भाग लिया.  

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