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आंदोलन तेज करने का फैसला
बैठक में अब इस मांग के विरोध में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया. इसकी शुरूआत 27 सितंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में एक दिवसीय उपवास से शुरू होगा. बैठक में कहा गया कि अगर यह आंदोलन नहीं रुका तो वे लोग भी सड़क पर उतर सकते हैं. आंदोलन तेज करने के लिए आदिवासी अधिकार रक्षा मंच का भी गठन किया गया. आदिवासी विकास परिषद की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि केवल मांग करने से कुछ नहीं होगा. यह शोध का विषय है. आदिवासियों की नस्ल और कुरमियों की नस्ल में काफी अतंर है. हम जहां रूढ़ीवादी परंपरा को मानते हैं जबकि कुरमी सनातनी को मानता है. पर्व-त्योहार, शादी-विवाह में हम आदिवासी की अपनी रूढ़ीवादी परंपरा से संचालित होती है. यहां तो कोल तेली भी एसटी सूची में शामिल होने की मांग करते हैं. केवल साथ रह लेने से कोई आदिवासी नहीं हो सकता है.कुरमी समाज की मांग गलत-अजय टोप्पो
आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि इस लोकतांत्रिक देश में किसी को भी कोई भी मांग करने का अधिकार है. मगर कौन क्या मांग रहा है. यह समझने की जरूरत है. ये यही लोग हैं जो पेसा के तहत पंचायत राज में आदिवासियों के आरक्षण का विरोध करते हैं. कभी ये लोग पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर आंदोलन करते हैं. कभी ये लोग शिवा जी के वंशज कहलाने पर गर्व महसूस करते हैं. ये लोग एसटी की पात्रता कैसे रखेंगे. आदिवासी नेता अजय टोप्पो ने कहा कि कुरमी समाज की मांग पूरी तरह से गलत है. पहले ही टीआरई ने इनकी मांग खारिज कर दिया है. ये लोग पात्रता रखते ही नहीं हैं. केवल राजनीतिक लाभ लेने और आदिवासियों की हकमारी के लिए यह मांग कर रहे हैं. अगर इन्हें एसटी का दर्जा दे दिया गया तो आदिवासी विलुप्त ही हो जाएंगे. इसे भी पढ़ें –जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-jnac-removed-illegal-banner-poster-from-main-road-in-sakchi/">जमशेदपुर: जेएनएसी ने साकची में मेन रोड से हटाया अवैध बैनर पोस्टर

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