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चतरा: शहीद जयमंगल पांडे व नादिर को दी गई श्रद्धांजलि

Chatra: 1857 स्वतंत्रता संग्राम के शहीद जयमंगल पांडे और नादिर अली खां को फांसी दिए जाने वाले ऐतिहासिक स्थल फांसीहारी तालाब पर शहीद जयमंगल पांडेय की सातवीं पीढ़ी के वंशज जमा हुए. वंशज सचिदानंद पांडेय अपने परिवार और माता प्रतिमा पांडेय, सौरव सुमन के साथ पहुंचकर जयमंगल पांडेय को श्रद्धांजलि. सचिदानंद पांडेय ने कहा कि चतरा ऐतिहासिक दृष्टि से राष्ट्रीय पहचान की धरती है. जिस स्वतंत्रता संग्राम की देश में चर्चा की जाती है उसमें शहीद जयमंगल पांडेय और नादिर अली खां जैसे वीर क्रांतिकारी शामिल हैं. आज तक राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन, स्थानीय सांसद, विधायक की अनदेखी ने चतरा को गुमनामी में रखा है. आज चतरा के इतिहास को जानने और समझने की जरूरत है. इसे संसदीय पटल पर रखने की आवश्यकता है.

क्रांतिकारियों ने 56 अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया था

सचिदानंद ने कहा कि जहां एक ओर 1857 क्रांति की बात पूरे देश में तो होती है, पर झारखंड के इतिहास में चतरा है, जहां 1857 की क्रांति का भीषण युद्ध हुआ था. यहां के क्रांतिकारियों की अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन पर अंग्रेजी शासन का हर मुख्यालय चतरा कूच कर गया था, लेकिन यहां के वीर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला कर रख दी थी. इस युद्ध में शहीद जयमंगल पांडेय और नादिर अली खां के साथ भारतीय सेना ने साहस का परिचय दिया और 56 अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया. सैकड़ों लोग हताहत हुए. अंत में 2 अक्टूबर 1857 को दोनों को पकड़ लिया गया. ट्रायल कर 4 अक्टूबर 1857 को शहीद जय मंगल पांडेय और नादिर अली खां के साथ 150 भारतीय सैनिकों को इसी तालाब के किनारे आम के पेड़ पर फांसी दे दी गई.

जरूरत है चतरा के इतिहास को पहचानने कीः सचिदानंद

सचिदानंद ने कहा कि जरूरत है चतरा के इतिहास को पहचानने की ताकि आनेवाले पीढ़ी को इस गुमनाम इतिहास को बताया जा सके. ओमप्रकाश वर्मा ने कहा कि इन विभूतियों और चतरा की पहचान के लिए मैं अब आमरण अनशन करूंगा. मौके पर शहीदों की नाम से हो चतरा की पहचान, बलिदानियों के जयकार से वातावरण गुंजायमान हुआ. मौके पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सौरव सुमन, बजरंग दल जिला सांयोयक अंकित पांडेय, ओमप्रकाश वर्मा, गोविंद पासवान, प्रदीप रावत, सूरज कुमार, राजकुमार वर्मा, चम्पा देवी, कुमार काली यादव, शशि कुमार, जितेंद्र पांडेय आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें - अमेठी">https://lagatar.in/amethi-four-members-of-a-dalit-family-murdered-mp-raises-questions-on-police-administration/">अमेठी

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