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बारिश से परेशानी, पानी-पानी शहर, पावर कट, जानिये झारखंड का हाल…

रांची के कई इलाकों में 36 घंटे से बिजली नहीं, जमशेदपुर के निचले इलाके में अबतक बहाल नहीं हुई बिजली शुभम संदेश टीम : रांची सहित पूरे झारखंड में 36 घंटे तक हुई नॉन स्टॉप बारिश और तेज हवा का सबसे अधिक असर बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है. राजधानी रांची की बात करें तो कई इलाके ऐसे रहे, जहां 36 घंटे तक बिजली नहीं रही. वहीं जमशेदपुर की खरखई नदी में आयी बाढ़ के बाद निचले इलाके के कई क्षेत्र पानी में डूब गए. इन इलाकों में अब तक बिजली बहाल नहीं हो पायी है. जेबीवीएनएल अफसरों की मानें तो बारिश से कम तेज हवा से बिजली आपूर्ति उपकरणों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, जिसे दुरुस्त करने में लगे समय के कारण बिजली रि-स्टोर में समय लग रहा है. [caption id="attachment_395494" align="alignnone" width="750"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/barish-750x573.jpg"

alt="बारिश से परेशानी" width="750" height="573" /> बारिश से परेशानी[/caption]

रांची पिछले 36 घंटे में क्या रही स्थिति

  • -रांची के नॉर्थ आफिस पाड़ा में करीब 36 घंटे बिजली नहीं रही.
  • -बरियातू रोड के कई इलाकों में बीते दिवस दिन भर, फिर आज सुबह से दोपहर तक बिजली नहीं रही.
  • -रानी बगान, चेशायर होम रोड में भी 20-20 घंटे तक बिजली नहीं रही.
  • -अशोक नगर रोड नंबर एक के क्षेत्र में 18 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रही.
  • -एचईसी के सेक्टर 2 में 18 घंटे तक बिजली नहीं रही.
  • -टुंगरी टोली, नेवरी, विकास एरिया में 20 घंटे तक बिजली नहीं रही.
  • -कोकर बिजली ऑफिस एरिया में 12 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रही.
  • -डोरंडा परस टोली, अंसारी लेन, दर्जी मुहल्ला इलाके में 30 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रही.
  • -कटहल मोड़ इलाके में 29 घंटे तक बिजली नहीं रही.
  • -एचईसी सेक्टर में आज सुबह से शाम चार बजे तक बिजली नहीं रही.
  • -ओरमांझी में गत 24 घंटे से बिजली नहीं रही.
  • -बहु बाजार इलाके में बिजली तो आज आयी मगर हाई वोल्टेज के कारण समस्या बढ़ गयी.
  • -पारस टोली डोरंडा इलाके में 27 घंटे से बिजली नहीं रही.
  • -पुरुलिया रोड, कुम्हार टोली व आसपास के क्षेत्रों में 12 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रही.
  • -नामकुम इलाके में 36 घंटे से बिजली नहीं रही.
  • -धुर्वा नया सराय इलाके में 18 घंटे तक बिजली नहीं रही.
  • -शहर के अन्य क्षेत्रों में बीती रात को बिजली बहाल हुई मगर आने-जाने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा. आज भी बिजली आने-जाने का सिलसिला जारी रही.
राज्य के अन्य जिलों की स्थिति
  • -जमशेदुपर के डूब क्षेत्र में 36 घंटे से बिजली नहीं
  • -शहरी क्षेत्र में बीती रात तक बिजली री-स्टोर हो गयी, मगर ग्रामीण क्षेत्र जैसे सरायकेला, चाईबासा, चक्रधपुर के ग्रामीण इलाकों में बिजली की हालत अब भी खराब चल रही है.
  • -धनबाद, बोकारो इलाके में डीवीसी कमांड एरिया द्वारा पहले तो 3 से 7 घंटे बिजली कटौती की गयी, वहीं बारिश के कारण शहरी क्षेत्र में बिजली री-स्टोर आज दिन तक हो गयी, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अब भी खराब है. कई क्षेत्रों में बिजली बहाल होने के बाद भी बिजली आने-जाने का सिलसिला जारी है.
  • -पलामू एरिया की बात करें तो शहरी क्षेत्र में बीते 36 घंटे में मुश्किल से 10 घंटे वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 घंटे ही बिजली रही.
  • -संथाल परगना इलाके में भी बिजली का हाल बहुत बुरा है. ग्रामीण क्षेत्रों में गत 36 घंटे में मुश्किल से 10 घंटे और शहरी क्षेत्र में 12 से 14 घंटे बिजली रही.

जामताड़ा : मूसलाधार बारिश से किसानों को राहत

36 घंटे तक कभी तेज कभी मध्यम गति से हुई मूसलाधार बारिश से किसानों को राहत मिली है. सावन महीने में मानसून की खेती लायक बारिश नहीं होने से किसान धनरोपनी नहीं कर पाए थे. इस बारिश के बाद किसान धनरोपनी में जुट गए हैं. धान खेतों में पर्याप्त पानी जमा है. 36 घंटों में 60.7 एमएम बारिश हुई. जिले में 52 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य है. अब तक 2.67 फीसदी खेतों में ही धनरोपणी हुई. 80 फीसदी किसानों के खेतों में लगे धान के बिचड़े सूख गए हैं. मूसलाधार बारिश का असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा है. कई जगह बिजली सप्लाई बाधित है. शहरी क्षेत्र की नालियों और गड्ढों में पानी जमा हो गया. कई जगह नालियों का पानी सड़क पर भी बहने लगा.

गिरिडीह : दो दिनों की मूसलाधार बारिश से लबालब भरे डैम

दो दिनों की मूसलाधार बारिश से खंडोली और चैताडीह डैम पानी से लबालब भर गए हैं. इन दो डैम से गिरिडीह शहर में जलापूर्ति की जाती है. मानसून की दगाबाजी के कारण डैम का जलस्तर कम पड़ गया था. खंडोली डेम 8.75 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. नगर निगम के डिप्टी मेयर प्रकाश सेठ ने बताया कि सावन महीने में मानसून की बारिश कम होने से खंडोली डेम का जलस्तर कम पड़ गया था. दो दिनों की बारिश से जलस्तर बढ़ा है. इससे वाटर सप्लाई में परेशानी नहीं होगी. मूसलाधार बारिश का बिजली सप्लाई पर प्रतिकुल असर पड़ा है. शहरी क्षेत्र समेत प्रखंडों में विद्युत आपूर्ति नहीं हो पा रही है. बिजली विभाग बिजली लाइन दुरुस्त करने में जुटा है. बिजली विभाग के एसडीओ देशराज ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा बहने से बिजली लाइन को नुकसान पहुंचा है. बिजली लाइन को दुरुस्त किया जा रहा है.

लातेहार : 40 घंटे बाद जनजीवन सामान्य, औरंगा नदी उफान पर

जिला मुख्यालय में तकरीबन 40 घंटे बाद जनजीवन सामान्य हुआ. शनिवार की सुबह धूप खिली थी. हालांकि कुछ देर बार आकाश में फिर बादल छा गये और लगा कि फिर बारिस होगी, लेकिन 11 बजे के बाद फिर धूप खिल गयी. ज्ञात हो कि गत शुक्रवार की अपराह्न चार बजे से जिला मुख्यालय समेत आसपास के प्रखंडों में बारिश हो रही थी.  लगातार बारिश होने से जिले के नदियों व जलाशयों में जल स्तर काफी ऊपर आ गया है. जिला मुख्यालय  की लाइफ लाइन मानी जाने वाली औरंगा नदी में पिछले सप्ताह घुटना भर भी पानी नहीं था, लेकिन इस बारिस के बाद औरंगा नदी उफान पर है. इसी प्रकार शहर के बीचोबीच स्थित केश्वर आहर का भी जलस्तर काफी उपर आ गया है.

सिमडेगा : 36 घंटे की लगातार बारिश से हर तरफ जलजमाव, पावर भी कट

36 घंटे से लगातार हो रही बारिश के बाद सिमडेगा जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है. तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश से जिले की कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ गिर गए और बिजली के तार को चपेट में ले लिया. इससे कई बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए और बिजली व्यवस्था चरमरा गई. कई स्थानों पर 36 घंटे से ज्यादा बिजली गुल रही. कोलेबिरा का बानो रोड रोड स्थित कॉपरेटिव बैंक में जलजमाव हो गया. साथ ही कई घरों में पानी घुस गया.

हजारीबाग : जलाशयों का बढ़ा जलस्तर, मौसम साफ होते ही बिजली बहाल

सूखे की मार झेल रहे हजारीबाग में बीते 48 घंटों से रुक रुक कर लगातार बारिश हो रही है. बारिश के कारण शहर और आसपास की नदी, नाले, तालाब, झील आदि जलाशय लबालब भर चुके हैं. वहीं कई इलाकों में झमाझम बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है. हजारीबाग का छड़वा डैम का जलस्तर में दो फीट की वृद्धि हुई है और जल स्तर 23 फीट पहुंच गया है. पदाधिकारी बताते हैं कि छड़वा डैम की कैपेसिटी 29 फीट है. भारी बरसात होने के कारण जल स्तर बढ़ा है और इसका लाभ भविष्य में मिलेगा. हजारीबाग के विष्णुगढ़ के जमुनिया डैम में भी जल स्तर बढ़ा है. जमुनिया डैम का जलस्तर फाउंडेशन लेवल तक पहुंच गया है. ग्रामीण कहते हैं कि जलस्तर बढ़ने से उनलोगों को लाभ होगा. किसानों की सिंचाई की समस्या का भी समाधान होगा और आने वाले दिनों में पेयजल की समस्या क्षेत्र में नहीं होगी. मूसलाधार बारिश के कारण बिजली व्यवस्था भी बाधित हुई थी. लेकिन जैसे ही मौसम साफ हुआ, वैसे ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई. बीती रात लगभग 10:00 बजे विभाग ने हजारीबाग के लगभग सभी इलाकों में बिजली की सुविधा बहाल कर दी. जहां बड़े पेड़ गिरे थे, वहां सुबह तक बिजली सुचारू रूप से मुहैया कराई जा सकी. जानकारों की राय में बरसात का लाभ आने वाले दिनों में हजारीबाग वासियों को मिलेगा. पिछले दिनों यह चिंता सताए जा रही थी कि हजारीबाग में जिस तरह से सूखे की स्थिति बन रही है तो पेयजल की भी किल्लत हो सकती है. ऐसे में हजारीबाग में 50 एमएम बारिश शनिवार तक हो चुकी है. अगर प्रखंडों की बात की जाए, सबसे अधिक बारिश चौपारण में रिकॉर्ड किया गया है. चौपारण में 76 एमएम, विष्णुगढ़ में 62 एमएम, इचाक में 57 एमएम, चुरचू में 56 एमएम, हजारीबाग शहर में 42.6 एमएम, बड़कागांव में 43 एमएम, बरही में 45 एमएम और केरेडारी में 28 एमएम बारिश हुई है.

बोकारो : 102 मिमी बारिश हुई, 36 घंटे बाद आयी बिजली, डैमों का जलस्तर खिसका

बोकर जिले में लगभग 36 घंटों से जारी बारिश के बाद बिजला विभाग के अधिकारियों ने पावर बहाल कर दिया. बता दें कि बारिश के बाद एक दर्जन गांवों में बिजली आपूर्ति तब ठप हो गयी थी. कई मुहल्लों में जलजमाव के कारण कई घरों में पानी घुस गया था. पेड़ों की टहनियां टूटकर बिजली के तारों पर गिर गयी थी. इसके साथ ही नदी का जलस्तर भी खिसकने लगा है. इसके बाद अब खतरा बोकारो में फिलहाल टल गया है. हालांकि आज भी तेज बारिश शुरू हो गयी है. गरगा नदी का जलस्तर खिसकने लगा है. बोकारो में 102 एमएम बारिश हुई है.

बेरमो : तेनुघाट बांध में क्षमता से है अधिक पानी, खुले हैं तीन गेट

तेनुघाट बांध का जलस्तर अभी भी क्षमता से अधिक पानी है. हालांकि तेनुघाट बांध प्रमंडल द्वारा शनिवार को तीन रेडियल गेट को खोल दिया गया है. इसके बावजूद भी डैम में पानी क्षमता से अधिक है. बता दें कि तेनुघाट बांध में जलाशय की क्षमता 852 फीट है, लेकिन मौजूदा समय में पानी 856. 40 फीट हो गया है. शनिवार को तेनुघाट बांध का गेट खुलने के बाद दामोदर नदी का जलस्राव बढ़कर करीब 18000 / 510. 09 क्यूसेक/ क्यूबिक मी. पर सेकेंड था, जो दूसरे दिन 20785/ 589.01 पर सेकेंड हो गया है. इस संबंध में बाढ नियंत्रण कोषांग, तेनुघाट बांध प्रमंडल के नोडल पदाधिकारी पंकज कुमार कहा है कि लगातार बारिश होने के कारण डैम में जलस्तर की बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल तीन रेडियल गेट खोल दिया गया है, जिससे डैम में जलाशय की स्थिति नियंत्रण में है. उन्होंने कहा कि एहतियातन गेट खोलने के पहले ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ साथ विभागीय अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है, ताकि दामोदर नदी के किनारे रहने वाले लोग सतर्क हो जाएं. उन्होंने बताया कि कल शाम से ही बारिश की स्थिति में कमी आई है.

रामगढ़ : लगातार बारिश से पतरातू डैम का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट, चरमराई बिजली

भारी बारिश से पतरातू डैम का जलस्तर काफी बढ़ गया है और खतरे के निशान तक पहुंचने को है. डैम की पानी को कम करने को लेकर डैम का फाटक कभी भी खोलने को लेकर शानिवार को ही संपदा पदाधिकारी शेष परिसंपत्ति, पतरातू ने उपायुक्त रामगढ़ सहित पतरातू के वरीय अधिकारियों को पत्र देकर इसकी जानकारी दे दी है .वहीं जिला प्रशासन भी डैम का जल स्तर बढ़ने को लेकर अलर्ट मोड पर है. डैम और आसपास के इलाके में लाउडस्पीकर से चेतावनी देते हुए लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है .लोगों को पतरातू डैम और नदियों से पर्याप्त दूरी रखने की चेतावनी दी जा रही है. वहीं दो दिन से हो रही बारिश के मद्देनजर उपायुक्त माधवी मिश्रा ने जिला दामोदर नदी सहित नदियों और तालाबों को लेकर सतर्कता बरतने और अधिकारियों को सजग रहने का निर्देश दिया है. मौजूदा समय में पतरातू डैम का जलस्तर 1326.5 आर एल तक पहुंच चुका है. पतरातू डैम का अधिकतम लिमिट 1332.5 आरएल है. चूंकि डैम का बांध काफी पुराना है, इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से जलस्तर 1327 आर एल पार करने पर डैम का फाटक खोल कर पानी को छोड़ा जाता है. संभावना जताई जा रही है कि रविवार को रांची या रामगढ़ में भारी बारिश होती है तो रविवार देर शाम तक डैम का फाटक खोल कर पानी को कम किया जा सकता है. जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश से जिले की कई जगहों पर बड़े बड़े पेड़ बिजली के तार को चपेट में लेते हुए सड़कों पर गिर गए. इससे कई जगहों पर बिजली का तार टूट गया. कई बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई और लगभग 25 घंटे बिजली गुल रही. बारिश रुकने के बाद रविवार की सुबह बिजली दी गई, लेकिन हर आधे एक घंटे बाद बिजली कट ऑफ हो रही है जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है

किरीबुरू : बाढ़ के पानी से लेक गार्डन तालाब में तब्दील, बिजली भी ठप

शैलेश सिंह पिछले दो दिनों तक जारी भारी वर्षा के बाद 21 अगस्त का दिन किरीबुरु-मेघाहातुबुरु समेत सारंडा क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरा रहा. हालांकि आसमान में बादल के साथ-साथ धूप-छांव का खेल निरंतर जारी है. लेकिन सुबह से वर्षा नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस ली है. दूसरी तरफ किरीबुरू का ऐतिहासिक लेक गार्डन तालाब पिछले कुछ दिनों तक हुई मूसलाधार वर्षा की वजह से झील में तब्दील हो गया है. यह तालाब पूरी तरह से भरा हुआ है. शहर के जाकिर हुसैन पार्क की सीढि़या पूरी तरह से डूब गई है. इस तालाब के बगल से गुजरा सेल किरीबुरू का सिवरेज लाइन का टंकी व पाइप लाइन भी डूब चुका है. इलाके में बिजली आपूर्ति भी ठप है.

बहरागोड़ा : चित्रेश्वर में स्वर्णरेखा नदी के बाढ़ का पानी घुसा, 400 बीघा धान के खेत जलमग्न

बहरागोड़ा प्रखंड की बहुलिया पंचायत के पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे चित्रेश्वर धाम और उसके आसपास के इलाके में स्वर्णरेखा नदी के बाढ़ का पानी घुस गया है. पूरा इलाका जलमग्न हो गया है. लगभग 400 बीघा में लगी धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं. यदि यह पानी दो दिन भी खेतों में रह गया तो लगभग चार हजार क्विंटल धान की उपज नहीं होगी. इससे किसानों को भारी क्षति होगी. इधर चित्रेश्वर धाम जाने वाली सड़क बाढ़ के पानी से डूब गई है. पुलिया पर पानी बह रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक स्वर्णरेखा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है और पानी तेजी से बढ़ रहा है. इससे चित्रेश्वर, रंगुनिया, पचांडो समेत अन्य कई गांव के लोग दहशत में हैं. जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. इस स्थित में चित्रेश्वर गांव और मंदिर डूब जाएंगे.

धनबाद : बारिश से चरमराई बिजली आपूर्ति, शहर की बड़ी आबादी अंधेरे में

शुक्रवार की सुबह से शनिवार की शाम तक हुई रिमझिम बारिश से धनबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था चरमरा गई. शहर के भूली, कोलाकुसमा, पांडरपाला, दामोदरपुर समेत करीब आधा दर्जन स्थानों पर बिजली के पोल उखड़ गए. वहीं, दर्जनभर जगहों पर पेड़ की डाली गिरने से तार टूट गए, जबकि 100 से अधिक जगह फ्यूज क्वाइल जलने से बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही. कई इलाकों के लोग रातभर अंधेर में रहे. जेबीवीएनएल धनबाद डिवीजन के कार्यपालक अभियंता एसबी तिवारी ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में बिजली के खंभे गिरने और ब्रेकडाउन से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई. रविवार की सुबह तक हर जगह गड़बड़ी दूर कर बिजली बहाल कर दी गई.

धनबाद : लागतार बारिश से मैथन डैम का जलस्तर 12 और पंचेत डैम का 5 फीट बढ़ा

पिछले तीन दिनों तक लगातार हुई बारिश से धनबाद जिले के मैथन व पंचेत डैम के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है. शनिवार की शाम तक मैथन डैम का जलस्तर 12 एकड़ फीट (क्यूसेक) बढ़कर 459.71 एकड़ फीट (क्यूसेक) पहुंच गया. जबकि पंचेत डैम का जलस्तर 5 एकड़ फीट (क्यूसेक) पहुंचकर 406.29 एकड फीट (क्यूसेक) पहुंच गया. डीवीसी मैथन के जनसंपर्क पदाधिकारी अपूर्व साहा ने बताया कि  फिलहाल पंचेत डैम में 668 एकड़ फीट (क्यूसेक) व मैथन डैम में 247 एकड़ फीट (क्यूसेक) पानी का इनफ्लो प्रतिघंटा दर्ज किया जा रहा है. लेकिन डैम के ऊपरी भाग में जिस तरह पानी आ रहा है] उससे पानी का इनफ्लो बढने की संभावना है. पंचेत डैम में पांच फीट और पानी बढ़ने से अंडर स्विच गेट खोला जा सकता है.

तोपचांची झील का जलस्तर 1 फीट बढ़ा

इधर, झामाडा के तकनीकी सदस्य इंद्रेश शुक्ला ने बताया कि लगातार हुई बारिश से तोपचांची झील का जलस्तर करीब एक फीट बढ़ा है. झील का जलस्तर 59.5 फीट से बढ़कर रविवार को 60.3 फीट पहुंच गया.

सरायकेला : बारिश थमने से शांत हुई खरकई नदी

भाग्य सागर सिंह कृषि विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार सरायकेला खरसावां जिले में 19 अगस्त को 83.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि 20 अगस्त को 1053.5 मिलीमीटर बारिश हुई है. सरायकेला 93.6, खरसावां 123.6, कुचाई 133.4, गम्हरिया 113.2, राजनगर 127.3, चांडिल 107.4 नीमडीह 106.4, ईचागढ़ 129.4 एवं कुकडु प्रखण्ड में 119.2 मिलीमीटर बारिश हुई है. बारिश के कारण ही नदी एवं नाले भर गए थे. ऊपर से डैमों का पानी छोड़ दिये जाने से खरकई नदी पूरे उफान पर आ गयी थी. शनिवार को अपराह्न चार बजे से बारिश की गति धीमी होने लगी तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली. लोगों का कहना था कि उसी रफ्तार में अगर और एक दिन और बारिश हो जाती तो सरायकेला शहरी क्षेत्र सहित खरकाई नदी के तटीय क्षेत्र में बसे गांव वालों को अनेक नुकसान उठाना पड़ता. जिला प्रशासन के निर्देशानुसार नगरपंचायत कार्यालय द्वारा सम्भावित आपदा से निपटने एवं प्रभावितों को सहायता देने की हर सम्भव तैयारी जारी रही. प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा नदी तट पर बसे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर बाढ़ या अतिवृष्टि के कारण उत्पन्न सम्भावित संकट से सुरक्षा एवं सहायता की विभिन्न माध्यमों से निगरानी रखी जा रही है. बिजली गुल रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के अनेक मोबाइल भी इस संकट की घड़ी में बेकार साबित हुए हैं. इसे भी पढ़ें- जमानत">https://lagatar.in/even-after-4-days-of-getting-bail-two-congress-mlas-are-still-in-jail-not-getting-bailer/">जमानत

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