Washington : अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में हुई लगभग 90 मिनट की क्लोज डोर मीटिंग सुर्खियों में है. सूत्रों के अनुसार मीटिंग में ईरान का मुद्दा छाया रहा. इस मीटिंग के खत्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर खबर आयी कि ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है. इस हमले से भड़के ट्रंप ने ईरान को जवाबी हमला करने की बात कही.
मीटिंग से छन कर जो खबर बाहर आयी है, उसके अनुसार पहले ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान पर चर्चा की गयी है, ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत में लगातार जुटे हुए हैं. लेकिन अभी भी मुद्दे सुलझे नहीं हैं.
इजरायली अधिकारियों के अनुसार मीटिंग में नेतन्याहू ने ट्रंप के समक्ष आशंका व्यक्त की कि ईरान ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी रोक लग सके.
बैठक में ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर मंथन किया गया. होर्मुज स्ट्रेट के आसपास समुद्री नाकेबंदी जारी रखने सहित नये प्रतिबंध लगाने पर चर्चा की गयी. नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका के खिलाफ ईरान के पास होर्मुज स्ट्रेट ही सबसे बड़ा हथियार बचा है.
बैठक में दोनों नेताओं ने माना किअगर बातचीत और आर्थिक प्रतिबंध सफल नहीं होते हैं कि अमेरिका-इजरायल को ईरान के खिलाफ फिर से बड़ा सैन्य अभियान शुरू करना होगा. सूत्रों की मानें तो नेतन्याहू ने ट्रंप पर तत्काल हमला शुरू करने का प्रेसर नहीं डाला. यह बात मान ली कि अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ही करेंगे,
रिपोर्ट के अनुसार ईरान के अलावा बैठक में सीरिया की स्थिति पर चर्चा हुई. नेतन्याहू ने ट्रंप को एक नक्शा दिखाकर विश्वास दिलाया कि तुर्की की तुलना में इजरायल की सैन्य मौजूदगी नगण्य है. हालांक् उन्होंने कहा कि जब तक दक्षिणी सीरिया में जिहादी संगठनों का खतरा बरकरार है, तब तक इजरायल वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहेगा.
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