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धातु और खनन उद्योग में क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल एचआर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

Ranchi: प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान (सेल) रांची में धातु और खनन उद्योग में क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल एचआर पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का संगोष्ठी का समापन गुरुवार को हुआ. एमटीआई सभागार में समापन समारोह में दो तकनीकी सत्र आयोजित किये गए. जिनमें बड़े संगठनों में स्मेक टेक्नोलॉजी अपनाने और इमेर्सिवे इम्प्लॉयी एक्सपीरियंस जैसे विषयों पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई. [caption id="attachment_607848" align="aligncenter" width="1548"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/45-2.jpg"

alt="" width="1548" height="1032" /> तस्वीर- मुख्य अतिथि सेल अध्यक्ष सोमा मंडल का स्वागत करते संजीव कुमार[/caption] मुख्य अतिथि सेल अध्यक्ष सोमा मंडल का स्वागत संजीव कुमार ने अंगवस्त्र और प्रतिक चिन्ह देकर किया. अपने स्वागत संबोधन में संजीव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और संगोष्ठी में चर्चा किये गए. सर्वोत्तम तकनीकी को भविष्य में अपनाने पर बल दिया. उन्होंने यह भी कहा कि सीखने से ही व्यक्ति युवा बना रह सकता है. संजय सावर्नी ने संगोष्ठी में प्राप्त तकनीकी पत्रों के बारे में जानकारी दी और पुरस्कार प्राप्त विजेताओं और उप विजेताओं के नामों की घोषणा की. आरिफ खान और सचिन नारंग की सेल सीएम्ओ की टीम ने फुल पेपर प्रतियोगिता में विजेता का खिताब जीता, जबकि इसी वर्ग में बोकारो इस्पात संयंत्र तथा एक्सआईएसएस एवं भिलाई इस्पात संयंत्र की टीमें उपविजेता रहीं. आई एस.पी, बर्नपुर के एस.आर.दास, दीपक कुमार एवं आर एस पाण्डेय की टीम ने ई-गैलरी में विजेता का पुरस्कार जीता. इस वर्ग में आर डी सी आई एस और भिलाई इस्पात संयंत्र एवं हिंडाल्को की टीमे उपविजेता रहीं. विजेताओं और उपविजेताओं को निदेशक (कार्मिक) सेल ने पुरस्कृत किया. इस अवसर पर सेल निदेशक (कार्मिक) के के सिंह ने अपने संबोधन में संगठनों को उत्कृष्ट बनाने में आवश्यक तत्वों की चर्चा की और कार्मिकों की बदलती आशाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने इंडस्ट्री 4.0 में भारत के नेतृत्व संभालने पर जोर दिया. सेल अध्यक्ष सोमा मंडल ने अपने अभिभाषण में मानव संसाधन की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि संगठन मानव संसाधन से ही चलता है. उन्होंने मानव संसाधन में डिजिटल के प्रति विश्वास जगाने का आह्वान किया. उन्होंने यह भी कहा की सीखने की प्रवृति यहीं समाप्त नहीं होनी चाहिए. [wpse_comments_template]

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