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एक ही केस में झारखंड हाईकोर्ट के दो अलग-अलग आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

Vinit Upadhyay Ranchi/ New Delhi : एक ही मामले के अभियुक्तों को जमानत देने में झारखंड हाईकोर्ट के अलग -अलग आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जतायी है. देश की शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि झारखंड हाईकोर्ट से इस तरह का दूसरा मामला, उसके समक्ष पेश किया गया है, जिसमें एक अभियुक्त को जमानत दी गयी है, जबकि इसी प्राथमिकी के दूसरे आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है. अदालत ने कहा कि एक ही मामले में परस्पर विरोधी आदेश दिया जाना उचित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अदालत ने इस मामले में प्रार्थी को झारखंड के स्टैंडिंग कौंसिल को नोटिस जारी कर प्रतिवादी बनाने और चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि एक ही मामले की सुनवाई एक ही बेंच में किया जाना उचित है. कई हाईकोर्ट में यह व्यवस्था लागू की गयी है. इससे परस्पर विरोधी आदेश से बचा जा सकता है.

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की कॉपी भेजने को कहा

अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को इस आदेश की कॉपी भेजने को कहा है. रजिस्ट्रार जेनरल को इसे झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास पेश करने को कहा गया है, ताकि वह इस पर उचित निर्देश जारी कर सकें. इस संबंध में सुजीत कुमार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी. इसमें कहा गया था कि एक ही एफआईआर में झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सह अभियुक्त को जमानत दी है, जबकि उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है.
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