Vinit Upadhyay Ranchi : इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) रांची में जमीन घोटालों की जांच कर रही है. इन्हीं में एक 4.46 एकड़ का भूखंड है. जिस पर सेना का कब्जा है. इसी मामले में ईडी ने रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. दर्जन भर लोगों से पूछताछ जारी है. कई ऐसे लोगों के नाम भी मामले से जुड़े, जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे में अब तक सामने आये तथ्यों के आधार पर इसकी कहानी को समझना जरूरी है. इस भूखंड की खरीद-बिक्री को लेकर दो कहानी सामने आयी है.
पहली कहानी : बरियातू रोड की इस भूखंड पर सेना के अधिकारी-जवान वर्षों से फायरिंग की प्रैक्टिस करते रांची शहर ने सालों से देखा है. भूखंड का कोई दूसरा मालिक है, यह बात शायद ही किसी को पता था. यह जानकारी तब सार्वजनिक हुई, जब वर्ष 2021 में प्रदीप बागची नामक व्यक्ति ने इस भूखंड को जगत बंधू टी स्टेट को बेचा. जमीन की कीमत के रूप में प्रदीप बागची को 7 करोड़ रुपये मिले. इसके बाद ही पता चला कि यह भूखंड सेना की नहीं है और सेना ने करीब 100 साल पहले इसे किराये पर लिया था. यह खबर भी सार्वजनिक हुई कि हाई कोर्ट ने सेना को जमीन खाली करने का आदेश दिया. हालांकि अब यह सूचना है कि सेना के अधिकारियों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
बागची का दावा कैसे : इस भूखंड की बिक्री के सिलसिले में बड़गाईं सीओ की एक रिपोर्ट है. 25 सितंबर 2021 को सीओ ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन डीसी छवि रंजन को भेजी थी. जिसमें सीओ ने लिखा है कि प्रदीप बागची के पूर्वजों ने वर्ष 1932 में डीड संख्या 4369 के माध्यम से यह जमीन खरीदी. जिस डीड (संख्या 4369) से खरीद की गयी, वह कोलकाता रजिस्ट्री ऑफिस की है. सीओ ने स्पष्ट लिखा है कि इस भूखंड पर पहला दावा प्रदीप बागची की बनती है.
दूसरी कहानी : जगत बंधु टी स्टेट : सीओ की रिपोर्ट के बाद प्रदीप बागची के लिए इस जमीन को बेचने का रास्ता साफ हो गया. एक अक्टूबर 2021 को बागची ने इस भूखंड को बेच दी. जमीन के खरीददार जगत बंधु टी स्टेट है . उन्होंने जमीन की खरीद 7 करोड़ रुपये में की. उन्होंने स्टांप ड्यूटी के रूप में 83.3 लाख रूपये खर्च किये. 62.34 लाख रुपये रजिस्ट्री फी के रूप में दी. यानी इस जमीन को खरीदने के लिए करीब 8.46 करोड़ रुपये खर्च किये.
जयंत कर्नाड का नाम ऐसे आया : जांच में यह पता चला कि इस जमीन की बिक्री पहले भी हो चुकी है. पहली बार वर्ष 2019 में जयंत कर्नाड नामक व्यक्ति ने इस जमीन की बिक्री की. जयंत कर्नाड ने खुद को मुनजेश्वर मुकुद राव को वारिश बताया है. पंजी-टू में यह भूखंड मुजेश्वर लक्ष्मण राव के पुत्र मुनजेश्वर मुकुद राव के नाम दर्ज है. बड़गाईं सीओ मनोज कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, जमीन का इस्तेमाल करने के बदले सेना की तरफ से जयंत कर्नार्ड को किराया मिलता है.
हाई कोर्ट का वह आदेश : झारखंड हाईकोर्ट में वर्ष 2007 में रिट (संख्या-1903/2007) दाखिल किया गया था. 30 मार्च 2009 को हाई कोर्ट ने सेना को आदेश दिया कि भूमि खाली कर दें. इस आदेश के खिलाफ सेना ने वर्ष 2009 में एलपीए (लेटेस्ट पेटेंट अपील- 205/2009) दायर की. जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. वर्ष 2017 में दाखिल सीएमपी (सिविल मिस्लीनियस पिटीशन- 208/2017) को भी हाईकोर्ट ने 6 मार्च 2021 को खारिज कर दिया. सेना के कब्जे में यह जमीन वर्ष 1950 के पहले से है.
तीन बार किराया बढ़ा : - वर्ष 1957 में किराया तय हुआ- सलाना 446 रुपए.
- वर्ष 1963 में दूसरी बार 3600 रुपए सालाना किराया तय हुआ.
- वर्ष 1978 में यह किराया बढ़ कर 12 हजार रुपए सालाना किया गया.
जो बातें सामने आ चुकी हैं :
- वर्ष 2019 मे 16 डीड के जरिये 14 लोगों को बेचा गया था.
- पहली बार जमशेदपुर के जयंत कर्नाड ने बिक्री की थी.
- जमीन पर तब भी सेना का ही कब्जा था और आज भी है.
कहां है भूखंड :
- बरियातू रोड पर व बड़गाई अंचल के मोरहाबादी मौजा में है.
- मूल दस्तावेज में इस भूखंड एमएस प्लॉट नंबर 557 है.
कर्नाड ने 14 लोगों को बेची जमीन
| नाम | जमीन का रकबा |
| ज्ञानेंद्र कुमार सिंह | 11.5 डिसमिल |
| हरि शंकर परश्रामपुरी | 33.6 डिसमिल |
| प्रमोद कुमार पराशरामपुरिया | 47.84 डिसमिल |
| हरि शंकर पराशरामपुरिया | 47.84 डिसमिल |
| जानकी देवी | 15 डिसमिल |
| माया केजरीवाल | 53.71 डिसमिल |
| रजनी देवी | 15 डिसमिल |
| सपना भारती | 15 डिसमिल |
| सुधांशु कुमार सिंह | 15 डिसमिल |
| दीपशिखा धानुका | 53.71 डिसमिल |
| राजकिशोर साहू | 15 डिसमिल |
| राजकिशोर साहू एक अन्य डीड | 43 डिसमिल |
| शांति साव | 15 डिसमिल |
| प्रेरणा सोनी | 15 डिसमिल |
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