Ranchi: यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता पर विवाद होने के बाद विश्वविद्यालय ने उनका वेतन भत्ता बंद कर दिया है. शैक्षणिक योग्यता पर उभरे विवाद के बाद जांच के लिए विश्वविद्यालय ने एक समिति बनायी थी. इस समिति द्वारा रिपोर्ट नहीं देने के बाद विश्वविद्यालय ने जांच के लिए एक दूसरी कमेटी का गठन किया है.
लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता पर कई तरह के सवाल उठाये गये हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल उनके द्वारा लिखे गये एलएलबी की पढ़ाई के लिए बताया गया शैक्षणिक सत्र और कॉलेज से संबंधित है. इसके अलावा मार्कशीट सहित अन्य बिंदुओं पर भी विवाद कायम है.
लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता के सिलसिले में Bar Council of India और राज्यपाल को शिकायत की जा चुकी है. फरवरी 2025 में Bar Council of India से की गयी शिकायत की प्रति काउंसिल ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय को भेजी थी.

यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में दिये गये आवेदन में लक्ष्मी सिंह ने एलएलबी का सत्र 1995-98 लिखा है
Bar Council of India को भेजे गये शिकायती पत्र में यह कहा गया है कि लक्ष्मी सिंह ने बिहार के औरंगाबाद कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल करने का उल्लेख किया है. औरंगाबाद कॉलेज से लक्ष्मी सिंह के लिए जारी किये गये College Leaving Certificate(CLC) एलएलबी का सत्र 1992-98 लिखा है. यह व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं है. क्योंकि यह कॉलेज 1992 में बना था. मगध विश्वविद्यालय ने इस कॉलेज को 1993 में संबद्धता मिली थी. ऐसे में एलएलबी का सत्र 1992 से शुरु होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.

कॉलेज लिविंग सर्टिफिकेट में एलएलबी का सत्र 1992-98 लिखा है
शिकायती पत्र में लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए यह कहा गया है कि उनके द्वारा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में दिये गये आवेदन में एलएलबी का शैक्षणिक सत्र 1995-98 बताया गया है. साथ ही इसमें कॉलेज का नाम औरंगाबाद के अलावा कुछ और लिखा है. एक ही छात्र का एलएलबी का दो शैक्षणिक सत्र होना संभव नहीं है. Bar Council of India के भेजे गये शिकायती पत्रों में वर्णित इन तथ्यों के मद्देनजर विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था.
विश्वविद्यालय द्वारा गठित इस जांच समिति में इंद्रजीत कुमार के कमेटी का Convener बना गया था. समिति में सदस्य के रूप में गायत्री साहू और डॉक्टर एसके पांडेय को शामिल किया गया था. 25 अप्रैल 2025 को गठित इस समिति को लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवालों की जांच कर रिपोर्ट देने का कहा गया था. लेकिन इस समिति में एक साल बाद भी अपरिहार्य कारणों से अपनी रिपोर्ट नहीं दी.
पिछले दिनों लक्ष्मी सिंह वेतन भत्ता और हाजिरी बंद करने के विरोध में धरने पर बैठी थी. इसके बाद विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए एक दूसरी कमेटी का गठन किया है. इस समिति में विश्वविद्यालय के CCDC मिथिलेश कुमार सिंह, प्रॉक्टर सादिक रज्जाक और मार्खम कॉलेज के प्राचार्य गजेंद्र सिंह को शामिल किया गया है. अभी इस जांच समिति ने भी अपनी कोई रिपोर्ट विश्वविद्यालय को नहीं सौंपी है.
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