- रामगढ़ कॉलेज में प्राचार्य के पद पर कार्यरत डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा का मामला.
Ranchi : कोई व्यक्ति एक ही साथ दो-दो विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ सकता है. लेकिन अगर पिता किसी विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष हों तो ऐसा संभव है. रामगढ़ कॉलेज में प्राचार्य के पद पर कार्यरत डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा इसके उदाहरण हैं. पिता के विभागाध्यक्ष रहते विमल मिश्रा ने एक ही साथ दो-दो विश्वविद्यालय में पढ़ाई की. Ph.D की डिग्री भी हासिल की. लेकिन पिता ने अपने ही विभाग में बेटे के Ph.D करने की जानकारी नहीं दी.
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने डॉक्टर विमल मिश्रा को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की थी. वह पहले से विनोबा भावे विश्वविद्यालय में कार्यरत थे. लेकिन उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच के बाद उन्हें विनोबा भावे विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के पद पर योगदान नहीं करने दिया गया. क्योंकि उन्होंने एक ही समय में विनोबा भावे और दिल्ली विश्विद्यालय से M.Sc की पढ़ाई पूरी की थी.
सिर्फ इतना ही नहीं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मिली M.Sc की डिग्री के आधार पर विनोबा भावे विश्वविद्यालय में Ph.D के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया. लेकिन अब तक दिल्ली विश्वविद्यालय से मिले माइग्रेशन सर्टिफिकेट को विनोबा भावे विश्वविद्यालय में जमा नहीं कराया. नियमानुसार दूसरे विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहले विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी है. उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से जब Ph.D किया उस वक्त उनके पिता डॉक्टर बीएन मिश्रा वहां गणित के विभागाध्यक्ष थे. लेकिन पिता ने विश्वविद्यालय को यह जानकारी नहीं दी कि उनका बेटा गणित में Ph.D कर रहा है.
विनोबा भावे में गठित जांच समिति ने यह पाया कि वर्ष 1991-92 में विमल मिश्रा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में M.Sc (OR, BLT) की पढ़ाई कर रहे थे. परीक्षा 1994 में हुई. उन्हें 800 में से 644 नंबर मिला था. उन्होंने 80.5% नंबर हासिल कर विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया.
विमल मिश्रा ने 1991-93 में दिल्ली विश्वविद्यालय से M.Sc (O.R) की परीक्षा पास की. उन्हें 2000 में 1045 नंबर मिले थे. इस तरह विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान पाने वाले को दिल्ली विश्वविद्यालय में सिर्फ 52.25% नंबर मिले. नियमानुसार एक समय में कोई व्यक्ति दो-दो विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ सकता है, वह भी उन परिस्थितियों जब उसका क्लास में मौजूद रहना जरूरी हो. विमल मिश्र ने एक ही साथ दोनों विश्वविद्यालय में पढ़ाई कैसे की. इस सवाल के जवाब में उनके पिता का विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष होना बताया जाता है.
विनोबा भावे में Ph.D के लिए विमल मिश्रा का रजिस्ट्रेशन 30 मई 1994 को हुआ था. उस वक्त तक विनोबा भावे विश्वविद्यालय के 1991-92 की परीक्षा नहीं हुई थी. विनोबा भावे में 1991-92 की परीक्षा सितंबर 1994 में हुई थी. विमल ने अपना रजिस्ट्रेशन अपने दिल्ली के मार्कशीट के आधार पर करवाया था. लेकिन अब तक माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा नहीं किया है. विमल मिश्रा के पिता डॉक्टर बीएन मिश्रा विनोबा भावे में गणित के विभागाध्यक्ष थे. 16 जुलाई 1996 को आयोजित Pre-submission / Pre-registration seminar की अध्यक्षता विमल के पिता ने की. लेकिन उन्होंने नहीं बताया कि उनका बेटा इसमें शामिल है. नियमानुसार उन्हें अपने बेटे के परीक्षा में शामिल होने की सूचना देते हुए इससे अलग हो जाना चाहिए था.
