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मुस्लिम मसलों का हल नहीं कर पायी यूपीए सरकार, नये विकल्प की होगी तलाश : एस अली

 
Ranchi :  झारखंड के ज्वलंत सवालों को लेकर ``आमया`` संगठन की बैठक मौलाना आज़ाद कांफ्रेंस हॉल सोमवार को हुई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष एस अली ने कहा कि महागठबंधन सरकार अपने किए वादों को पूरा करने में विफल रही है. जानकार लोगों से राय लिए बिना नियोजन नीति और स्थानीय नीति बनाया गया. एक को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया तो दूसरे को राज्यपाल ने सुधार के लिए वापस कर दिया. सरकार को नियोजन नीति और स्थानीय नीति पर अविलंब अध्यादेश लानी चाहिए ताकि रोजगार के लिए सड़कों पर उतरे युवाओं को अपने राज्य में नौकरी मिल सकें. जेपीएससी सहित सभी न्युक्ति में 10 वर्ष उम्र सीमा में छूट, सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली 2022 में नियमवली 2012 के अनुसार करने पर निर्णय लेना चाहिए. इसे भी पढ़ें:जहाज">https://lagatar.in/ship-firing-case-accused-on-remand-of-sahibganj-police-ed-registers-ecir/">जहाज

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मॉब लिंचिंग पर नहीं बना कानून- एस अली

एस अली ने कहा कि कहा कि वोट बैंक के रूप में प्रचालित झारखंड के मुसलमानों को संवैधानिक अधिकार के तहत प्राप्त बोर्ड निगम आयोग कमिटी का गठ़न 3 वर्ष बाद भी नही हुए. विभिन्न प्रकार के हुए घटनाओं में भेदभाव कियें गयें पीड़ित परिवार न्याय के लिए ठोकरें खा रहे है. मॉब लींचिग पर अबतक कानून नहीं बना. दो वर्षों से मदरसा आलिम फाजिल की परीक्षा नही हुई. उर्दू शिक्षकों की बहाली व उर्दू भाषा से जुड़े मांग को दरकिनार कर दिया गया. गलत तरीके से 544 उर्दू स्कूलों को समान्य विधालय बनाकर शुक्रवार की छुट्टी समाप्त कर दी गई. भैंस काड़ा पशुओं के स्लाटर पर रोक लगी है जबकि अन्य प्रदेशों में खुलेआम इनकी मांस बिकती है. महागठबंधन सरकार को विभिन्न स्तर इन मामलों को अवगत कराया गया लेकिन एक भी मामलें हल नही हुई. बैठक में उपस्थित संगठन के पदाधिकारियों ने कहा सरकार के गलत निर्णय और उपेक्षा को समाज के प्रबुद्ध लोगों को बताया जाएगा. साथ ही तीसरे राजनीतिक विकल्प की तलाश की जाएगी. इसके लिए प्रखंड स्तर पर बैठक करने का निर्णय लिया गया. बैठक में मुख्य रूप से इस्मे आज़म, मो फुरकान, इमरान अंसारी, जियाउद्दीन अंसारी, औरंगजेब आलम, नौशाद आलम, एकराम हुसैन, अफताब आलम, अब्दुल गफ्फार, हारीश आलम, अकरम अंसारी, जावेद अख्तर, इमरान आलम, तौसीफ़ आलम, मोकरम हुसैन शामिल थे. इसे भी पढ़ें:1932">https://lagatar.in/reaction-of-jagarnath-mahto-babulal-marandi-saryu-rai-and-vinod-singh-on-return-of-1932-khatian-bill/">1932

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