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नयी शिक्षा नीति से उर्दू पूरी तरह से समाप्त जाएगी : सुभाषिणी अली

  • उर्दू को किसी धर्म या जमात से जोड़ना गलत, यह नौकरी पाने की बोली नहीं
  • उर्दू को धर्म से जोड़ कर समाप्त करने की चल रही है बड़ी साजिश
  • देश के वर्तमान हालात इमरजेंसी भी अधिक खतरनाक
  • सत्ता परिवर्तन के साथ भाषा-संस्कृति को बचाने की मुहिम चलानी होगी
Kaushal Anand Ranchi : पूर्व सांसद और सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिणी अली का कहना कि नयी शिक्षा नीति से उर्दू पूरी तरह से समाप्त जाएगी. उर्दू किसी जमात या नौकरी पाने की बोली नहीं है. यह शुद्ध रूप से भारतीय बोली है, जो यहीं जन्मा और पला-बढ़ा. राष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन में हिस्सा लेने रांची आयीं सुभाषिणी अली से शुभम संदेश के संवाददाता ने विशेष बातचीत की.

उर्दू बोली में हिंदी का पूरा समावेश

सुभाषिणी अली कहती हैं कि यह बोली भारत की भूमि पर पैदा ली. यहीं से इसका प्रचार-प्रसार दुनिया के अन्य देशों में हुआ. मगर आज इसे किसी धर्म विशेष की बोली करार देने की पुरजोर कोशिशें हो रही हैं. इतना ही इसे पूरी तरह समाप्त करने की साजिश हाे रही है. भारत के सबसे बड़े लेखक प्रेमचंद ने भी अपनी लेखनी में उर्दू का इस्तेमाल किया. भारतीय फिल्मों में डायलॉग और लेखन में इसका भरपूर इस्तेमाल हुआ. उर्दू बोली में हिंदी का पूरा समावेश है. दोनों के संगम से बोली और मीठी हो जाती है.

नयी शिक्षा नीति में उर्दू को तरजीह नहीं

सुभाषिणी अली ने कहा कि वर्तमान में जो नयी शिक्षा नीति देश में लायी गयी है, पूरी तरह से लागू हो गयी तो उर्दू समाप्त हो जाएगी. क्योंकि इसमें उर्दू को तरजीह नहीं दी गयी है. जब हम उर्दू स्कूल खोलेंगे नहीं, उसे बंद करेंगे, उर्दू शिक्षक बहाल करेंगे नहीं तो फिर आने वाली पीढ़ी उर्दू से पूरी तरह दूर हो जाएगी. मतलब साफ है कि उर्दू को समाप्त कर दो. उर्दू बोली राजनीतिक दलों की विचारधारा का गुलाम बन कर रह गयी है. इससे हमें बचना होगा. सामूहिक मुहिम चलानी होगी.

सत्ता परिवर्तन से नहीं बचेगी हमारी भाषा-संस्कृति

सुभाषिणी अली कहती हैं कि देश में वर्तमान हालात इमरजेंसी से खराब है. आज हमारी भाषा-संस्कृति खतरे में पड़ गयी है. केवल सत्ता परिवर्तन से हमारी भाषा-संस्कृति नहीं बचेगी. क्योंकि देश और राज्यों के प्रमुख दल के पास अब केवल मकसद किसी भी तरह सत्ता हासिल करने पर रह गया है. इनमें हमारे देश की भाषा-संस्कृति को लेकर कोई दृढ़ इच्छाशक्ति नजर नहीं आती है. वर्तमान शासन व्यवस्था से मुक्ति के साथ ही हमें भाषा-संस्कृति बचाने की मुहिम भी साथ चलानी होगी. तभी परिवर्तन होगा. इसे भी पढ़ें – आदिम">https://lagatar.in/government-will-spend-5-20-crores-on-the-health-of-primitive-tribal-community/">आदिम

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