अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 से अधिक बार कहा कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध को खत्म कराया. व्यापार रोकने की धमकी देकर. प्रधानमंत्री मोदी ने कोई जवाब नहीं दिया और विदेश मंत्रालय चुप रहा. अब डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले कहा है- मोदी मुझे (ट्रंप) खुश करना चाहते हैं. मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें (पीएम मोदी) को पता था कि मैं (ट्रंप) खुश नहीं था और मुझे (ट्रंप) खुश करना जरुरी था.
डोनाल्ड ट्रंप के साथ खड़े यूएस सिनेटर लिंडसे ग्राहम का दावा सामने आया है. जिसमें उन्होंने कहा है- मैं एक महीने पहले इंडियन अंबेसेडर के घर पर था और वह ही बात करना चाहते थे कि इंडिया रुस से कम तेल कैसे खरीद रहा है. और उन्होंने प्रेसिडेंट से 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने के लिए कहने को कहा है.
सवाल यह उठ रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय चुप क्यों है? अमेरिका को जवाब देने से कौन रोक रहा है. यह तब हो रहा है, जब मोदी और सत्तासीन भाजपा यह दावा कर रही है कि देश सबसे मजबूत स्थिति में हैं. हम चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. दबदबा कायम है. यह नया भारत है.
देश के अधिकांश लोग उनकी बात को सच मानते हैं. उन्हें वोट देती है. तभी केंद्र में मोदी सत्ता में हैं और अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकार है. डबल इंजन, ट्रिपल इंजन जैसी मजबूत सरकारें. इन सबके बाद भी देश को बार-बार शर्मसार होना पड़ रहा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति या अमेरिकी सरकार के अफसर क्या कहते हैं, इससे देश को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. वह अपनी सुविधानुसार तथ्यों को रखकर बात कर रहे हैं. लेकिन जब आप यह कहते हैं कि दुनिया में डंका बज रहा है, तो यह सवाल तो उठेगा ही कि यह कैसा डंका बज रहा है, जिसमें एक देश हमें रोज बेईज्जत कर रहा है. और हम जवाब तक नहीं देते हैं.
यह सवाल तो उठेगा ही कि ऐसी कौन सी मजबूरी है, जो हमारे रहनुमा चुप हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर प्रतिक्रिया न देने की वजह से ही पिछले हफ्ते चीन ने भी भारत-पाक युद्ध को रोकने में खुद की भूमिका की बात कह कर सनसनी फैला दी. क्या हम ऐसे ही चुप रहेंगे और शर्मसार होते रहेंगे?
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