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उषा मार्टिन माइनिंग घोटाला : तत्कालीन खनन निदेशक इंद्रदेव पासवान ने CBI कोर्ट में किया सरेंडर

 
Ranchi :  रांची सीबीआई की विशेष कोर्ट में तत्कालीन खनन निदेशक इंद्रदेव पासवान ने सरेंडर कर दिया. जिसके बाद अदालत ने उन्हें सशर्त बेल दे दी. कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार के दो निजी मुचलके और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत की सुविधा प्रदान की है. उनपर वर्ष 2005 में उषा मार्टिन को माइंस आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप है. उनकी ओर से अधिवक्ता विद्युत चौरसिया ने बहस की.

उषा मार्टिन को आवंटित खदान में कथित रूप से हुआ भ्रष्टाचार

दरअसल उषा मार्टिन कंपनी को 2005 में पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाटकुरी में एक लौह अयस्क खदान आवंटित की गयी थी. इसमें कथित रूप से भ्रष्टाचार हुआ था. आईएएस अरुण कुमार सिंह उस वक्त खनन विभाग के सचिव थे और इंद्रदेव पासवान खनन निदेशक थे. सीबीआई की दिल्ली इकाई ने कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत में 220/2016 में एक प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में उषा मार्टिन के प्रमोटरों और खनन विभाग के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था. प्राथमिकी में कहा गया था कि खदान के आवंटन के लिए केंद्र सरकार को जो शिफारिश भेजी गयी थी, उसमें राज्य सरकार की तरफ से अधिकारियों ने कथित रूप से उषा मार्टिन के पक्ष में पक्षपात किया था. कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया था कि वह हाट गम्हरिया में स्थित अपने इस्पात संयंत्र में लौह अयस्क का उपयोग करेगी. कंपनी ने राज्य सरकार को एक अंडरटैकिंग भी दिया था. सीबीआई ने आरोप लगाया कि कंपनी बाद में यह कहते हुए इस बात से मुकर गयी कि कैबिनेट नोट में इसका कोई विशेष जिक्र नहीं था.
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