पहले यहां तालाब था
आज जिस स्थान पर श्री वैष्णव दुर्गा मंदिर है, वहां एक बड़ा सा तालाब हुआ करता था. तालाब के पास आजादी के पहले से ही दुर्गा पूजा होता था. बाद में साल 1948 को तालाब के एक हिस्से को भर कर देवी मंडप का निर्माण कराया गया था. उसके बाद से लगातार देवी मंडप में माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती थी. बाद में एक सामूहिक बैठक कर यहां एक मंदिर निर्माण कराने का निर्णय लिया गया. वर्ष 1992 में यहां मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया गया. दो वर्ष बाद वर्ष 1994 में माघ मास की त्रयोदशी, शुल्क पक्ष को मंदिर में माता वैष्णव दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गयी. तब से प्रति वर्ष इस तिथि को मंदिर का तीन दिवसीय स्थापना दिवस मनाया जाता है. स्थापना दिवस कार्यक्रम में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा तक भाग ले चुके हैं. कहते हैं मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा अद्वितीय है. जो भी एक बार देखता है मंत्रमुग्ध हो जाता है.विधायक बैद्यनाथ राम ने बनवाया था विवाह मंडप
झारखंड अलग होने के बाद जब बैद्यनाथ राम विधायक बने तो उन्होंने अपने विधायक कोटे की राशि से मंदिर परिसर में एक विशाल विवाह मंडप का निर्माण कराया. बैद्यनाथ राम ने विधायकी के अपने दूसरे कार्यकाल में भी विवाह मंडप के उपर एक हॉल एवं सात कमरों का निर्माण कराया. आज मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष दर्जनों शादियां व अन्य कार्यक्रम होते हैं. इसे भी पढ़ें - सीएम">https://lagatar.in/cm-will-hand-over-appointment-letters-to-60-selected-officers-and-engineers-today/">सीएमहेमंत आज 60 चयनित अफसर और इंजीनियर को सौंपेगे नियुक्ति पत्र [wpse_comments_template]
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