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वीबी जी राम जी कानून रोजगार गारंटी को कमजोर कर देगाः ज्यां द्रेज

Ranchi : केंद्र सरकार द्वारा 18 दिसंबर 2025 को पारित किए गए नए कानून विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे आमतौर पर वी.बी.– जी राम जी कानून 2025 कहा जा रहा है, के खिलाफ झारखंड में विरोध तेज हो गया है. झारखंड नरेगा वॉच ने इस कानून को मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला बताते हुए केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है.

 

लोगों में भ्रम, रोजगार गारंटी को किया जा रहा कमजोर- ज्यां द्रेज

रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रख्यात अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने कहा कि नए कानून को लेकर आम लोगों में भारी भ्रम की स्थिति है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से रोजगार गारंटी की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है.

 

ज्यां द्रेज ने कहा कि इस नई स्कीम में पूरा नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथों में होगा, पुराने नोटिफिकेशन रद्द कर दिए जाएंगे और नया फ्रेमवर्क राज्यों पर थोपा जाएगा. इसके तहत राज्य सरकारों को योजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करना होगा, जो गरीब और संसाधन-विहीन राज्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

 

संघीय ढांचे पर सीधा हमला

झारखंड नरेगा वॉच ने चेतावनी दी कि राज्यों को विश्वास में लिए बिना इस तरह का कानून लागू करना देश के संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है. यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया तो झारखंड सहित देश के कई राज्यों में व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा.
बिना जनसंवाद के थोप दिया गया कानून

 

संगठन के अनुसार, देश के लगभग 26 करोड़ श्रमिकों को प्रभावित करने वाला यह कानून बिना किसी सार्वजनिक चर्चा के संसद के दोनों सदनों से जल्दबाजी में पारित किया गया. यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी करती है.

 

अधिकार आधारित व्यवस्था से बजट- आधारित मॉडल की ओर

मनरेगा अधिनियम 2005 जहां अधिकार-आधारित और मांग-आधारित कानून था. वहीं, नया ग्राम जी कानून बजट-सीमित और आपूर्ति-आधारित मॉडल पर आधारित है. अब मजदूरों को काम उनकी मांग पर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा तय बजट के अनुसार मिलेगा, जिससे जरूरत के समय रोजगार न मिलने का खतरा बढ़ेगा.

 

ग्राम सभा और पंचायतों की भूमिका होगी कमजोर

नए कानून के तहत योजनाओं का निर्धारण केंद्रीयकृत ढांचे के माध्यम से किया जाएगा. इससे ग्राम सभा और पंचायतों की निर्णयकारी भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी. स्थानीय जरूरतों के बजाय ऊपर से तय की गई योजनाएं थोपे जाने की आशंका जताई गई है.

 

झारखंड जैसे राज्यों पर बढ़ेगा भारी आर्थिक बोझ

लागत साझेदारी के नए प्रावधानों के तहत केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत खर्च वहन करेंगे. झारखंड जैसे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों पर इससे हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, जिसे वहन करना मुश्किल होगा.

 

60 दिनों का ‘वर्क लॉकआउट’ मजदूरों के लिए घातक

कानून में कृषि के चरम मौसम के दौरान 60 दिनों तक काम स्थगित रखने का प्रावधान है. इस अवधि में मजदूरों को न तो काम मिलेगा और न ही मजदूरी. इससे भूखमरी, कुपोषण और पलायन की समस्या और गंभीर होने की आशंका है, विशेषकर आदिवासी बहुल राज्यों में.

 

सोशल ऑडिट की जगह तकनीकी निगरानी

मनरेगा की पारदर्शिता की पहचान रहे सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) को कमजोर कर, नए कानून में बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-फेंसिंग और मोबाइल आधारित निगरानी पर अधिक जोर दिया गया है. इससे बुजुर्गों, महिलाओं और प्रवासी मजदूरों के काम से बाहर होने का खतरा बढ़ेगा.

 

नरेगा बचाओ जन अभियान की घोषणा

झारखंड नरेगा वॉच ने चरणबद्ध जन आंदोलन की घोषणा की है. 2 फरवरी 2026 को नरेगा दिवस पर रांची में 5000 मजदूरों की रैली. अगले 5 महीनों में 1 लाख मजदूरों को 100 दिन का रोजगार दिलाने के लिए काम मांगो अभियान. 2000 ग्राम सभाओं में वी.बी.– जी राम जी कानून के विरोध में प्रस्ताव पारित कर राज्य व केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को जेम्स हेरेंज, अफजल अनीस, बलराम और असरफी नंद प्रसाद ने भी संबोधित किया और कानून को मजदूर विरोधी बताते हुए इसका विरोध किया.

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