Ranchi: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग) ने रजिस्ट्रार के पद पर झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा भेजी गयी अनुशंसा ठुका दी है. JPSC ने डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की थी. विश्वविद्यालय ने जांच के दौरान डॉक्टर मिश्र के सर्टिफिकेट में मिली गड़बड़ी को इनकार करने का आधार बनाया है. सर्टिफिकेट में मिली गड़बड़ी के आलोक में अब उनके प्रिंसिपल की नौकरी भी खतरे में बतायी जाती है. विश्वविद्यालय ने उन्हें रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त नहीं करने से संबंधित फैसले की जानकारी राज्यपाल सचिवालय को भेज दिया है.
JPSC ने डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा को विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग) में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की थी. आयोग की अनुशंसा के आलोक में विश्वविद्यालय ने नियुक्ति से पहले उनके सर्टिफिकेट की जांच की. जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनायी गयी थी. इस समिति ने जांच के दौरान डॉक्टर मिश्रा द्वारा एक ही समय में दो-दो विश्वविद्यालय में पढ़ने का मामला पकड़ा.
डॉक्टर मिश्र के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में मिली गड़बड़ी के मामले में समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद विश्वविद्यालय ने समिति की रिपोर्ट को सिंडिकेट की बैठक में पेश किया. बैठक में डॉक्टर मिश्रा को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त नहीं करने का फैसला किया गया.
सर्टिफिकेट की जांच के दौरान पाया गया कि डॉक्टर मिश्रा ने B.Sc(H), M.Sc(OR,BLT) और Ph.D की डिग्रियां विनोबा भावे विश्वविद्यालय से हासिल की हैं. उनके पास दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया M.Sc(OR) का शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी है. जांच में पाया गया कि डॉक्टर मिश्र विनोबा भावे विश्वविद्यालय में M.Sc(OR,BLT) के शैक्षणिक सत्र 1991-92 के छात्र थे. इस सत्र की परीक्षा सितंबर 1994 में हुई थी.
परीक्षा में उन्हें 800 में से 644 अंक मिले थे. यानी उन्हें 80.50% अंक मिले था. उन्होंने विनोबा भावे विश्वविदायलय से M.Sc. (OR,BLT) की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की थी.
जांच में पाया गया कि डॉक्टर मिश्रा ने M.Sc(OR) की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय में भी की थी. दिल्ली विश्वविद्यालय में उनका शैक्षणिक सत्र 1991-93 था. उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित M.Sc(OR) की परीक्षा में 2000 में से 1045 अंक मिले थे. यानी दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने 52.25% के साथ M.Sc(OR) की परीक्षा पास की थी. जांच समिति ने इस विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए बने नियमों के खिलाफ पाया.
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार M.Sc की परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्र का नियमित रूप से क्लास में उपस्थित होना जरूरी है. ऐसे में डॉक्टर विमल मिश्रा एक ही समय में दोनों विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित क्लास में कैसे उपस्थित रहे. जांच समिति ने एक ही समय में दिल्ली विश्वविद्यालय और विनोबा भावे विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित क्लास में उपस्थित रहने को असंभव और संदेहास्पद माना.
डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा फिलहाल रामगढ़ कॉलेज में प्रिंसिपल की पद पर कार्यारत हैं. पिछले ही दिनों उनका तबादला राजधनवार कॉलेज से रामगढ़ कॉलेज में हुआ है. प्रिंसिपल के पद पर उनकी नियुक्ति भी झारखंड लोक सेवा के माध्यम से ही हुई थी.
लेकिन उस वक्त सर्टिफिकेट जांच के दौरान डॉक्टर विमल मिश्रा द्वारा एक ही समय में दो-दो विश्वविद्यालय में पढ़ने का मामला पकड़ में नहीं आया था. इससे JPSC द्वारा की गयी अनुशंसा के आलोक में 2017-18 में उनकी नियुक्ति प्रिंसिपल के पद हो गयी थी. रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति की जांच के दौरान पकड़ में आये मामले के बाद प्रिंसिपल के पद पर उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठाया जा रहा है.
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