- ऑडिट के दौरान नहीं मिला कैश बुक, बडे पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका.
- 11 AC की खरीद उस भवन के लिए की गई, जो पहले से सेंट्रलाईज्ड एसी बिल्डिंग है.
Jharkhand Education News: नीलांबर-पीतांबर (NPU) विश्वविद्यालय पलामू के कुलपति दिनेश सिंह ने विश्वविद्यालय में AC पहुंचने से पहले ही Install करवा दिया. राज्यपाल के आदेश के आलोक में विश्वविद्यालय के स्पेशल ऑडिट के दौरान इस कारनामे की जानकारी मिली. ऑडिट टीम ने विश्वविद्यालय में कैश बुक नहीं होने की वजह से बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जतायी है.

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह. (फाइल फोटो)
ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय द्वारा AC खरीद प्रक्रिया पर आपत्ति की गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने 11 AC उस बिल्डिंग के लिए खरीदी जो पहले से ही Centralised AC हैं. यह खरीद GEM पोर्टल से की गयी. लेकिन Comparative Chart में क्रय समिति या किसी और हस्ताक्षर ही नहीं था. फाइल में W-Way Bill भी नहीं मिला. AC खरीद पर पैसा खर्च करने के मुद्दे पर वित्त समिति की सहमति कब ली गयी थी. इससे संबंधित कोई जानकारी ऑडिट टीम को फाइल में नहीं मिली.
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AC खरीद से जुड़े बिल सहित अन्य दस्तावेज की जांच में यह पाया गया कि विश्वविद्यालय ने इसके लिए रांची के गणपति इंटरप्राइजेज को कुल 9.27 लाख रुपये का भुगतान किया है. इसमें से 8.73 लाख रुपये AC की कीमत के रूप में भुगतान किया गया है. बाकी 54 हजार रुपये का भुगतान AC Install करने के लिए किया गया है.
गणपति इंटरप्राइजेज के बिल की जांच में 4 जुलाई 2026 को AC की आपूर्ती को पूरा करने का उल्लेख था. लेकिन विश्वविद्यालय में AC प्राप्त होने की तिथि 8 जुलाई 2026 दर्ज पायी गयी.
AC आपूर्ति और उसे Install करने से जुड़े दस्तावेज की जांच में सबसे अनोखा मामला पकड़ा में आया. विश्वविद्यालय में AC 8 जुलाई 2026 को मिला था. लेकिन उसे 22 जून 2026 को Install दिखाया गया था. यानी AC पहुंचने से पहले ही उसे Install कर दिया गया. यह पूरी तरह अव्यवहारिक और असंभव है. AC की खरीद तो उस बिल्डिंग के लिए की गयी थी जो पहले से ही Centralised AC था. जो 11 एसी खरीदा गयी, उसमें से 10 कुलपति के बंगले में और एक कुलपति के कांफ्रेंस रूम में लगा दिया गया.
Centralised AC बिल्डिंग के लिए AC खरीदने पर की गयी आपत्ति का जवाब देते हुए विश्वविद्यालय की ओर से यह कहा गया कि झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम द्वारा बनाये गये भवन में कई कारणों से AC चालू नहीं किया गया है. साथ ही उसके वायरिंग AC का लोड लेने के लायक नहीं है.
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में कैश बुक नहीं है. ऑडिट शुरू होने के बाद कैश बुक लिखने का काम शुरू किया गया. इसके Opening Balance और Closing Balance पर किसी का हस्ताक्षर ही नहीं है. नियमानुसार सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों में कैश बुक रखने की बाध्यता है. इसी में हर तरह के लेन-देन का पूरा लिखा जाता है. कैश बुक का नहीं होना या अधूरा होना झारखंड ट्रेजरी कोड मे निहित प्रावधानों का उल्लंघन है. कैश बुक नहीं होने से वित्तीय अनियमितता और गबन की आशंका बनी रहती है.
