पर उतरे नाराज बीएड छात्र, जाम से कराहा धनबाद
जरूरतमंदों की सेवा परिवार से सीखी- वीणा सिंह
वहीं वीणा सिंह अपने बारे में बताते हुए कहती है कि होश संभालते ही मैंने अपनी मम्मी और दादा जी को गरीब और जरूरतमंद तबके के लोगों की सहायता करते देखा. मसलन मेरी मम्मी टीचर थी, गरीब बच्चों को अपने वेतन से किताब, कॉपी, स्कूल बैग खरीद कर देती थी. मुफ्त का ट्यूशन भी देती थी. कभी हम रिक्शा से जाते तो रिक्शा वाले को भाड़ा बढ़ाकर देती. पूछने पर बोलती कितना पसीना बहाना पड़ता है इन्हें. यही संस्कार मेरे अंदर रच बस गया. भीख मांगने वाले को भरपेट खाना खिला देती, पापा के कपड़े भी बिना पूछे दे देती. भले ही बाद ने थोड़ा डांट सुनना पड़ता. शादी के बाद भी मेरा ये सिलसिला जारी रहा. करोना काल में अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी बिरहोर बस्ती के लोगों को दवाईयां ब्रेड बिस्कुट जो बन पड़ता पहुंचाती रही.alt="" width="600" height="400" />
कोरोना काल में जरूरतमंदों की सेवा की- वीणा सिंह
वीणा सिंह ने कहा कि करोना का संक्रमण हो जायेगा यह जानते हुए भी मैंने उसकी परवाह नहीं की. मुझे ये लगता था कि उनको मेरी अभी जरूरत है. मम्मी कहती थी कि एक हाथ से करो तो दूसरे हाथ को पता नहीं चले. घर में काम करने वाली मेड को जितना भी बन पड़ा चाहे बेटी की शादी हो या पति का श्राद्धकर्म अपने औकात से बढ़कर सहायता करती हूं. बच्चों का जन्मदिन मैने कभी घर में केक काटकर लोगों को बुलाकर नही मनाया. स्टेशन के पास बहुत से भीख मांगने वाले और शारीरिक रूप से लाचार लोगों को अपने हाथ से गरम खाना परोस कर बच्चों से परोसवाया और उनकी आंखों में जो दुआ संतुष्टि नजर आई वो अलौकिक और अद्भुत थी. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-20-years-sentence-to-the-accused-of-raping-a-minor-read-other-court-news-together/">धनबाद: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सजा समेत कोर्ट की अन्य खबरें पढ़ें एक साथ

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