मड़ुआ, ज्वार व गुंदली की खेती सदियों से रही है प्रचलित
कुलपति ने कहा कि यूएनओ ने वर्ष 2023 को इंटरनेशनल मिल्लेट्स वर्ष घोषित किया है. मिल्लेट्स फसलें सदियों से भारत की पहचान रही है. झारखंड प्रदेश में भी सदियों से मिल्लेट्स फसलों में मडुआ, ज्वार एवं गुंदली की खेती सदियों से प्रचलित रही है. परंपरागत खेती और कम लाभ की वजह से प्रदेश में मिल्लेट्स फसलों का आच्छादन काफी घट गया है. जबकि मोटे अनाज यानी मिल्लेट्स को अब अमीरों का भोजन कहा जाने लगा है. वैश्विक स्तर पर इसकी मांग और कीमत काफी ज्यादा है. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य के जलवायु के उपयुक्त मिल्लेट्स फसलों में रागी (मडुआ) की चार एवं गुंदली की एक किस्म विकसित की है. राज्य में मिल्लेट्स फसलों के आच्छादन को बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं. जिसे विश्वविद्यालय अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र एवं क्षेत्रीय अनुसंधान के वैज्ञानिकों द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर बढ़ावा देने की जरूरत है.मिल्लेट्स फसलों पर जागरूकता अभियान
कुलपति ने प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक मिल्लेट्स फसलों पर जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण के साथ गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन चलाने की बात कही. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा की सोच पर आधारित समाज के गरीब एवं आदिवासी समुदायों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकी का लाभ पहुंचे. कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षा के अवसरों के बारे में सुदूर गांवों तक जानकारी मिले, ताकि राज्य के गरीब, कमजोर एवं आदिवासी समुदाय के युवक-युवतियों को उच्च तकनीकी शिक्षा सुगम हो. इसे भी पढ़ें – 23.87">https://lagatar.in/mp-mla-laid-the-foundation-stone-of-the-road-to-be-built-at-a-cost-of-23-87-crores-said-complete-the-quality-work/">23.87करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क का सांसद-विधायक ने किया शिलान्यास, कहा- गुणवत्ता पूर्ण करें काम [wpse_comments_template]

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