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विश्व आदिवासी दिवस से परहेज, जनजातीय गौरव दिवस से प्रेम! आदिवासी अस्मिता पर BJP-RSS का दोहरा चेहरा

भाजपा हर साल 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाती है। आदिवासी समाज के सम्मान, संस्कृति और पहचान की बात करती है। लेकिन सवाल यह है कि 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा और आरएसएस की सक्रियता नजर क्यों नहीं आती? विश्व आदिवासी दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के निर्णय के बाद 1995 में हुई थी। पूरी दुनिया का आदिवासी समुदाय इस दिन अपनी पहचान, संस्कृति, अधिकार और अस्तित्व का उत्सव मनाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा-आरएसएस 15 नवंबर को लेकर मुखर और 9 अगस्त को लेकर मौन क्यों है? क्या इसके पीछे आदिवासी पहचान और सरना-सनातन की विचारधारा को लेकर कोई राजनीतिक रणनीति है?
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