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जान बचाने वाली एम्बुलेंस अब खुद वेंटिलेटर पर— झारखंड की 108 सेवा की हकीकत

झारखंड की 108 एम्बुलेंस सेवा, जिसे कभी आपातकालीन जीवनरक्षक के रूप में जाना जाता था, अब खुद ही लोगों की जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। राज्य भर में अनगिनत 108 एम्बुलेंस जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं; कुछ धुआँ उगल रही हैं, कुछ को धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है, और कुछ के पहिए टूटे हुए हैं। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचाने के लिए बनी ये गाड़ियाँ अब सड़क पर दम तोड़ती दिख रही हैं। ड्राइवरों का कहना है, "हमें जान बचाने के लिए भेजा जाता है, लेकिन अक्सर एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है।" सरकार ने 108 सेवा में सुधार का दावा किया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बार-बार चेतावनी दी है कि इस जर्जर व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है, वरना हर देरी किसी न किसी की जान ले लेगी। अब इन एम्बुलेंसों पर ध्यान देने का समय आ गया है, क्योंकि ये जीवनरक्षक गाड़ियाँ अब खुद वेंटिलेटर पर हैं।
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