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DGP ऑफिस ने वांटेड राजेश राम को क्यों नहीं पकड़ा?रंजीत ओड़िशा के कारोबारी का नंबर क्यों मांग रहा था?

रामगढ़ पुलिस का वांटेड (अब जमानत पर) राजेश राम डीजीपी के कार्यालय में लगातार आता-जाता था. लगातार मीडिया को उसने जो लीगल नोटिस भेजा है, उसमें उसने इसका उल्लेख किया है. कहा है कि उसके खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों के सिलसिले में वह डीजीपी के कार्यालय में जाता था. पर, वहां वह किससे मिलता था? डीजीपी से? किसी एडीजी या किसी अन्य आईपीएस से? या डीजीपी कार्यालय में पदस्थापित इंस्पेक्टर गणेश सिंह और सिपाही रंजीत राणा से? मिलने के लिए क्या वह विजिटिंग रजिस्टर पर अपना नाम-पता दर्ज करता था?
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