लातेहार :
प्यासे ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रही बानपुर में खड़ी दोनों सोलर जलमीनार
alt="" width="640" height="427" /> नगर पंचायत क्षेत्र के बानुपर इलाके के खरवार टोला में कुल दो सोलर आधारित जलमीनार लगाई गई थी. लेकिन आज के समय में दोनों जलमीनार हाथी के दांत साबित हो रही हैं. दोनों जलमीनारों में बोरिंग से पानी नहीं चढ़ता है. इस कारण आज यह शो पीस बन कर रह गया है. खरवार टोला में लगभग एक सौ घर हैं और इसकी आबादी करीब पांच सौ लोगों की है. आज इन लोगों की प्यास टोला में लगे एक मात्र चापाकल से बुझ रही है. लेकिन पड़ रही प्रचंड गरमी और बारिश नहीं होने के कारण जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इस कारण कई बार हैंडल करने के बाद पानी आ रहा है. चापाकल में पानी भर रही रिंकी कुमारी और अंजलि कुमारी ने बताया कि पानी बहुत नीचे चला गया है. इस कारण शुरू में कई बार हैंडल करना पड़ता है, उसके बाद पानी निकलता है. लेकिन एक-दो बाल्टी पानी देने के बाद फिर से जल स्तर नीचे चला जाता है, इसके बाद कुछ देर ठहर कर पानी निकलता है.
2018-19 में तैयार की गई थी जलमीनार
alt="" width="1200" height="800" /> बानपुर के खरवार टोला में साल 2018-19 में दोनों जलमीनार लगाई गई थी. बताया जाता है कि पुराने चापाकल में ही सोलर जलमीनार को अधिष्ठापित कर देने के कारण आज दोनों जलमीनार में पानी नहीं चढ़ रहा है. जिला अनाबद्ध योजना से उक्त दोनों सोलर जलमीनार को अधिष्ठापित की गई थी.. गांव की पूनम कुमारी ने उसके घर के पीछे का जलमीनार खराब है, इस कारण उसे दूसरे टोले में जा कर पानी लाना पड़ता है.
अब तक नहीं पहुंचा है पाइप लाइन
बानपुर का खरवार इलाका नगर पंचायत क्षेत्र में आता है. नगर पंचायत में 32 करोड़ रूपये खर्च कर शहरी जलापूर्ति योजना का क्रियान्नवयन किया गया है. इसके तहत शहर के सभी 15 वार्डों में पाइप लाइन बिछाई गई है और शहर कें तीन जलमीनार बनाई गई हैं, लेकिन आज तक बानपुर के खरवार इलाके मे शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है, इस कारण आज भी लोग एक मात्र चापाकल के भरोसे हैं.समस्या दूर करने के लिए सीएमडी को सौंपा ज्ञापन
alt="" width="508" height="354" /> शांति श्याम फाउंडेशन के अध्यक्ष बेरमो निवासी प्रकाश कुमार सिंह ने 24 अप्रैल को रांची में सेंट्रल कोल्फील्डस लिमिटेड (सीसीएल) के सीएमडी पीएम प्रसाद से मुलाक़ात कर ढोरी, बीएडके और कथारा क्षेत्र के आवासीय कॉलोनी समेत आसपास के इलाके में पानी की समस्या दूर करने के लिए ज्ञापन सौंपा. उन्होंने सीएमडी से कहा कि भीषण गर्मी पड़ने के कारण बेरमो के कोयलांचल इलाके में पानी की किल्लत शुरू है. लोग पानी के लिए परेशान हैं. मजबूरी में लोग गंदा पानी पीने को विवश हैं. गंदा पानी पीने से बीमारी होने की आशंका है. उनकी बातों को सुनकर सीएमडी ने जल संकट दूर करने का आश्वासन दिया. मैथन : तीन सौ मीटर की दूरी पर है वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, फिर भी मचा है हाहाकार
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कुएं में 25 टैंकर पानी डलवा चुके हैं : नवलकिशोर
नवलकिशोर प्रसाद सिंह कहते हैं कि फरवरी से लेकर आज तक अपने कुंए में 25 टैंकर पानी डलवा चुके हैं. अभी मई, जून का महीना बाकी है. सब काम छोड़कर पानी की व्यवस्था में लगा रहना पड़ता है.alt="" width="150" height="150" />
सांसद, विधायक सभी ने दिया आश्वासन: विजय
विजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि सांसद, विधायक, पूर्व विधायक सहित अन्य नेताओं ने हम लोगों को केवल आश्वासन दिया कि पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा.गर्मी आते ही खड़ी हो जाती है समस्या : मुन्ना
मुन्ना सिंह ने कहा कि गर्मी आते ही पानी की विकराल समस्या खड़ी हो जाती है. गांव में केवल कुंआ ही पानी का स्रोत है, जो गर्मी में सूख जाता है. आखिर यह कब तक चलेगा. सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था होनी ही चाहिए.alt="" width="150" height="150" />
सुबह होते ही सताने लगती है चिंता : योगेन्द्र
योगेन्द्र राय ने बताया कि सुबह होते ही पानी की चिंता सताने लगती है. पानी सभी के लिए जरूरी है, लेकिन यहां नेताओं को जनता की समस्या से कोई लेना देना नहीं है. जब तक यहां पाइपलाइन बिछाकर पेयजलापूर्ति नहीं की जाएगी.साहिबगंज : घोर जल संकट, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण
अब भी समस्या दूर नहीं हुई : मासीन पहाड़िन
कोड़ेपाड़ा गांव की मासीन पहाड़िन ने बताया कि विगत चुनाव के वक्त विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने पेयजल संकट दूर का आश्वासन ग्रामीणों को दिया था. चुनाव होने के बाद आश्वासन पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया गया.पता नहीं कब समस्या दूर होगी : धर्मा पहाड़िया
सिमरिया गांव के निवासी धर्मा पहाड़िया ने बताया कि पानी की समस्या से हमलोग जूझ रहे हैं. आजादी के 75 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं है. पता नहीं कब पानी की समस्या दूर होगी.दो किलोमीटर से पानी लाकर पीते हैं : सुनीता
कोड़ेपाड़ा गांव की सुनीता पहाड़िन ने बताया कि गांव की आबादी करीब 300 की है. गांव में एक भी चापाकाल नहीं है. ग्रामीण दो किलोमीटर दूर जाकर कुंआ या झरना से गंदा पानी लाकर पीते हैं.कई महीनों से चापानल खराब है : पाकू मुर्मू
बोरियो प्रखंड के बड़ारकसो गांव निवासी पाकू मुर्मू का कहना है कि भीषण गर्मी में पानी की किल्लत है. चिलचिलाती धूप में एक किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. गांव में चापाकल कई महीनों से खराब पड़ा है.जमशेदपुर
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पंचायत प्रतिनिधियों ने मुंह मोड़ा : मंजू नामता
जमशेदपुर के हरहरगुट्टू की रहने वाली मंजू नामता ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी की काफी दिक्कत हो गई है. दूसरे मोहल्ले से पीने का पानी लाना पड़ रहा है. मोहल्ले में मात्र एक तालाब है, जिस पर लोग निर्भर हैं. तालाब के किनारे के चापाकल भी सूख गए हैं. सरकारी खर्च पर कई जगहों पर मोटर एवं सोलर चालित पानी टंकी लगाई गई है, लेकिन राजा तालाब के समीप की टंकी को छोड़कर सभी खराब हैं.alt="" width="150" height="150" />
घंटों इंतजार के बाद मिलता है पानी : बसंती
जमशेदपुर के उत्तरी घाघीडीह पंचायत की रहने वाली बसंती देवी ने बताया कि हरहरगुटू देवता भवन में एक कुआं है. उसका इस्तेमाल लोग अपनी जरूरतों के हिसाब से करते थे, लेकिन गर्मी की वजह से उक्त कुआं सूख गया है. इसके कारण घाघीडीह जेल के समीप स्थित जलमीनार से पानी लाना पड़ता है. वह जलमीनार 24 घंटे चालू रहता है.alt="" width="150" height="150" />
पानी के लिए छोड़नी पड़ती है ड्यूटी : अजीत
जमशेदपुर के हरहरगुटू के रहने वाले अजीत कुमार ने बताया कि वे ठेकेदारी में काम करते हैं. पानी की व्यवस्था करने के लिए कभी-कभी ड्यूटी छोड़नी पड़ती है. दो किलोमीटर दूर से गैलन में भरकर पानी लाना पड़ता है. ड्यूटी छूटने से आर्थिक नुकसान होता है. इस समय बस्ती में सभी लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. हर साल गर्मी आते ही ये समस्या खड़ी हो जाती है.alt="" width="150" height="150" />
हमें खरीदकर पीना पड़ता है पानी : दीपा देवी
जमशेदपुर के हरहरगुट्टू योगी होटल के समीप की रहने वाली दीपा देवी ने बताया कि इस वर्ष फरवरी से ही पानी की किल्लत शुरू हो गई है. इसके कारण दूसरे मोहल्ले से पानी लाकर अथवा खरीदकर घरेलू कार्य करना पड़ता है. घाघीडीह जेल चौक पर स्थित सार्वजनिक जलमीनार में काफी भीड़ रहती है. वहां घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, तब पानी मिलता है.चाकुलिया :
वार्ड 12 के वार्ड पार्षद के घर के पास पानी के लिए मचा है हाहाकार
alt="" width="1280" height="642" /> पूर्वी सिंहभूम जिला के चाकुलिया नगर पंचायत के गांव और टोले नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की लापरवाही से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. वार्ड नंबर 12 के उलडीड टोला में वार्ड पार्षद रायसेन सोरेन के घर के पास लगभग 3.50 लाख की लागत से मां रंकिनी इंटरप्राइजेज द्वारा स्थापित सोलर जलापूर्ति योजना एक साल से खराब है. टोला में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है. 20 परिवार वर्षों पूर्व निर्मित कुआं और एक चापाकल पर आश्रित हैं. पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. कुआं सूख गया है. जलापूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइन दर्शन की वस्तु बनी है. सोलर जल मीनार की मशीन को ठेकेदार द्वारा छह माह पूर्व खोल कर ले जाया गया है, परंतु आज तक दुरुस्त नहीं किया गया है. इससे ग्रामीणों में नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है. टोला के गोपीनाथ हांसदा, लुसका सोरेन, ज्योत्सना सरदार, फूलमनी हांसदा समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि जलापूर्ति योजना की मरम्मत नहीं हुई तो बाल्टी और बर्तन लेकर नगर पंचायत कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे.
गोड्डा
सुंदर नदी के सूखने से होती है पानी की किल्लत
alt="" width="600" height="416" /> भीषण गर्मी में पत्थरगामा की लाइफ लाइन कही जाने वाली सुंदर नदी सूख गई है. इसके सूखने से पेयजल की किल्लत लोग झेल रहे हैं. इस नदी के सूखने से पत्थरगामा प्रखंड मुख्यालय में राजीव गांधी ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना पर भी असर पड़ा है. भूगर्भ जल स्तर नीचे चले जाने के कारण चापाकल काम नहीं कर रहा है. बोरिंग भी काम नहीं कर रही है. पत्थरगामा पंचायत की मुखिया सोनी कुमारी का कहना है कि गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर पूर्व तैयारी की जानी चाहिए थी. सरकारी स्तर पर तैयारी नहीं किए जाने से जल संकट की समस्या उत्पन्न हुई है. विगत दिनों स्थानीय विधायक की कोशिश से चार पंप मुहैया कराए गए.
चाईबासा
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बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं : जुनी
स्थानीय महिला जुनी बिरुवा ने कहा कि पानी नहीं रहने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी विद्यालय जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को होती है.alt="" width="150" height="150" />
किसी को हमारी चिंता नहीं : जानो हेंब्रम
महिला जानो हेंब्रम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को हमारी कोई चिंता नहीं रहती है. चुनाव के वक्त ही वे लोग चेहरा दिखाने आते हैं, लेकिन इस बार सभी को सबक सिखाएंगे.alt="" width="150" height="150" />
हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं : लक्ष्मी गोप
लक्ष्मी गोप का का कहना था कि हमारा दुर्भाग्य है कि प्रखंड मुख्यालय का सबसे करीब का गांव मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है. सरकारी अफसर भी इसकी सुध नहीं ले रहे हैं.समस्या और विकराल हो जाएगी : गोपाल
गोपाल मरांडी का कहना है कि बगतरफा गांव में एक भी चापाकल नहीं है. ग्रामीणों को खेत के गड्ढ़े से पानी लाकर पीना पड़ता है.जानकारी दी, पर अब तक पहल नहीं : बबलू
दिघारी पंचायत के मुखिया बबलू किस्कू ने बताया कि बगतरफा गांव में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए पीएचईडी विभाग को जानकारी दी गई है.पहल शुरू कर दी गई है : सुनीता मरांडी
सहरपुर पंचायत की मुखिया सुनीता मरांडी का कहना है कि संबंधित विभाग से बातचीत कर पेयजल संकट दूर किया जाएगा. जल समस्या की जानकारी है.देवघर
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जलस्तर नीचे जाने से समस्या : रामजन्म
जलस्तर नीचे जाने के कारण देवघर के कृष्णापुरी मोहल्ले में पानी की समस्या खड़ी हो गई है. अप्रैल के महीने में ऐसी स्थिति है तो मई और जून के महीने की कल्पना कर सकते हैं. एक दो कुंए हैं वह भी सूख चुके हैं. प्रशासन झूठी दिलासा के अलावा कुछ नहीं कर रहा है.alt="" width="150" height="150" />
बोरिंग भी काम नहीं कर रही : प्रवीण
मोहल्ले के स्थानीय निवासी प्रवीण कुमार दत्ता का कहना है कि पानी की समस्या हमारे घर में भी जस की तस बनी हुई है. हम भाड़े के मकान में रहते हैं . मकान में बोरिंग के माध्यम से पानी मिलता है. लेकिन जलस्तर नीचे चले जाने के कारण बोरिंग से पानी ऊपर नहीं आ रहा है.alt="" width="150" height="150" />
टैंकर से पानी दिया जाता है: शैलेंद्र
देवघर नगर निगम के नगर आयुक्त शैलेंद्र कुमार लाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिस मोहल्ले में पानी की समस्या होती है वहां पर टैंकर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैचक्रधरपुर
भीषण गर्मी में विक्रमपुर के ग्रामीण चुएं का पानी पीने को मजबूर हैं
पश्चिमी सिंहभूम जिला के सोनुवा प्रखंड का विक्रमपुर गांव प्रखंड मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लेकिन इस क्षेत्र के ग्रामीण कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं. इस भीषण गर्मी में स्थानीय लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. गांव के अधिकांश चापाकाल और सोलर जल मीनार खराब रहने के कारण ग्रामीण चुआं का पानी पीने को विवश हैं. गांव की आबादी लगभग 250 है. ग्रामीण गांव के पास से गुजरने वाले संजय नदी के किनारे चुआं बनाकर उससे पीने और खाना बनाने का पानी लेते हैं. गर्मी में यहां पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है. विक्रमपुर गांव में सोनुआ जलापूर्ति योजना के लिये जलमीनार बन रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक इस योजना से भी उनका गांव नहीं जुड़ पाएगा. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष भीषण गर्मी में पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
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alt="" width="150" height="150" />समस्या वर्षों पुरानी है : नंदिनी देवी
विक्रमपुर गांव की महिला नंदिनी देवी कहती हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों को पानी की समस्या पर ध्यान देना चाहिए. यहां की समस्या वर्षों पुरानी है. alt="" width="150" height="150" />
जलमीनार की हो मरम्मत : शांति देवी
विक्रमपुर गांव निवासी महिला शांति देवी ने कहा कि क्षेत्र में कई सोलर जलमीनार खराब पड़ी हैं. साथ ही कई स्थानों पर नए सोलर जल मीनार निर्माण कराने की आवश्यकता है.alt="" width="150" height="150" />
बीमारियों का रहता है खतरा : मंगल चरण
विक्रमपुर गांव निवासी मंगल चरण ने बताया कि चुआं का पानी पीने से बीमारियों का खतरा बना रहता है. जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को हर घर में पानी पाइप लाइन के जरिए मिलनी चाहिए.alt="" width="150" height="150" />

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