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विनय महतो मौत मामला : CBI की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ पिता की प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई जारी

  • सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या हत्या की साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं पाया था

Ranchi :  सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ सफायर इंटरनेशनल स्कूल के मृतक छात्र विनय कुमार महतो के पिता मनबहल महतो की ओर से SDJM की अदालत में दायर प्रोटेस्ट पिटीशन पर आज आंशिक सुनवाई हुई. मामले में आज याचिकाकर्ता की ओर से बहस हुई. इसके बाद अदालत ने मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित कर दी है.

 

बता दें कि 5 फरवरी 2016 में स्कूल परिसर में छात्र विनय महतो (13 वर्षीय) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. जिसकी जांच  जुलाई 2022 को सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने 4 वर्ष से अधिक समय तक जांच के बाद बीते दिनों अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसके खिलाफ मनबहल महतो ने प्रोटेस्ट पिटीशन दायर कर  एजेंसी के अनुसंधान पर असंतुष्टि जताई है. 

 

सीबीआई ने हादसा होने की जताई थी संभावना 

बीते दिनों सीबीआई ने बीते दिनों सीबीआई की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर मामले में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता या हत्या की साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं पाई जाने की बात कही थी. सीबीआई ने इसे 'एक्सीडेंटल डेथ' यानी हादसा होने की संभावना जताई है.

 

दरअसल , विनय महतो के पिता मनबहाल महतो ने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट  ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जुलाई 2022 को मामले को सीबीआई को सौंप दिया था. इसके बाद सीबीआई ने मामले में अनुसंधान शुरू करते हुए सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर जांच  की थी.  

 

घटनास्थल का कई बार 'रिक्रिएशन' किया और स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का भी गहन अध्ययन किया था. सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट की मानें तो 5 फरवरी 2016 की रात 1:01:14 बजे विनय महतो अपने बॉयज हॉस्टल से बाहर निकला था और महज 3 मिनट 48 सेकंड के भीतर यानी 1:05:02 बजे वह स्टाफ क्वार्टर (विंग-ए) से नीचे गिर गया.  

 

रिपोर्ट में सीबीआई ने बताया है कि हॉस्टल और प्रिंसिपल के आवास के बीच लगे कैमरों में विनय का पीछा करता हुआ कोई दूसरा व्यक्ति नजर नहीं आया. स्टाफ क्वार्टर और हॉस्टल के बीच की दूरी लगभग 480 मीटर है.

 

रिपोर्ट में कहा गया था कि इतने कम समय में किसी के द्वारा उसे ले जाना या वहां कोई संघर्ष होना साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं होता है. दूसरी ओर पुलिस ने शुरुआती जांच में स्कूल की ही एक शिक्षिका के नाबालिग बेटे को आरोपी बनाया था और इसे प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला माना था.

 

 

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