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सड़क से सदन तक संघर्ष करनेवाले नेता हैं विनोद सिंह, भाजपा में ऐसे बढ़ा अन्नपूर्णा का कद

Praveen Kumar  Ranchi : बगोदर विधायक विनोद कुमार सिंह बगोदर विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व करने के बाद इस बार लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाने जा रहे हैं. भाकपा माले के विनोद कुमार सिंह इंडिया गठबंधन के कोडरमा लोस के उम्मीदवार हैं. विनोद सिंह की सिर्फ गिरिडीह और कोडरमा ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड भर में एक अलग पहचान है. इनके पिता महेंद्र सिंह भी बगोदर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके थे. 2005 के विधानसभा चुनाव के पहले जब उनकी हत्या कर दी गयी, तब विनोद सिंह उस समय पहली बार भाकपा माले के टिकट से चुनाव लड़े और विजयी हुए. इसके बाद 2009 में दूसरी बार और फिर 2019 में तीसरी बार चुनाव जीते. विनोद सिंह की प्राथमिक शिक्षा अपने गांव खंभरा में हुई. धनबाद के चिरकुंडा से उन्होंने हाई स्कूल पास किया. इंटरमीडिएट पटना से व बीए, एमए की पढ़ाई बीएचयू से की. स्कूल के समय से ही विनोद से राजनीति से जुड़े रहे. छात्र रहते हुए विनोद सिंह ने झारखंड आंदोलन में भाग लिया. पुलिस की लाठियां खायीं और पुलिस हिरासत में भी रहे. विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान विनोद सिंह छात्र राजनीति व सांस्कृतिक आंदोलनों में काफी सक्रिय थे. झारखंड में विनोद सिंह की पहचान जनता के सवालों पर मुखर होकर सड़क से सदन तक बेबाक संघर्ष करनेवाले नेता की रही है.

बाबूलाल को हराने के बाद भाजपा में बढ़ा अन्नपूर्णा देवी का कद

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी लगातार दूसरी बार भाजपा की टिकट पर कोडरमा से चुनाव लड़ रही हैं. बिहार के पूर्व मंत्री रमेश यादव की मौत के बाद उनकी पत्नी अन्नपूर्णा देवी ने 1998 में राजनीति में एंट्री ली. उस समय कोडरमा में हुए उपचुनाव में जीत कर वह पहली बार राजद की विधायक बनीं. संयुक्त बिहार में खान मंत्री बनाई गयी. 2000, 2005 और 2009 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने पर उनका कद और बढ़ गया. उस समय उनकी गिनती राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के करीबियों में होती थी. 2013 में वह हेमंत सोरेन सरकार में जल संसाधन मंत्री बनाई गयीं. पर एक साल बाद 2014 का विधानसभा चुनाव हार गयीं. इसके बावजूद लालू प्रसाद ने उन्हें झारखंड प्रदेश राजद का अध्यक्ष बना दिया. मार्च 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अचानक उन्होंने राजद से नाता तोड़ा और भाजपा में शामिल हो गयीं. 2019 में कोडरमा से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ी और बाबूलाल मरांडी जैसे दिग्गज नेता को हरा दिया. इनाम के रूप में अन्नपूर्णा देवी को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया. हरियाणा के सह प्रभारी का भी जिम्मा मिला. 2019 का चुनाव जीतने के दो साल बाद जुलाई 2021 में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ. उस समय भाजपा और जदयू के बीच आपसी खींचतान चल रही थी. अन्नपूर्णा देवी को इसका फायदा मिला और यादव कोटे से वो पहली बार केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री बनायी गयीं.

सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आये कालीचरण सिंह

भारतीय जनता पार्टी ने कालीचरण सिंह को चतरा लोकसभा से उम्मीदवार बनाया है. कालीचरण सिंह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के काफी करीबी माने जाते हैं. सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आये कालीचरण पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक भाजपा के निवर्तमान सांसद के खिलाफ चलाये गये कैंपेन में अप्रत्यक्ष रूप से इनका समर्थन था. स्थानीय को टिकट मिले, यह मांग चतरा संसदीय क्षेत्र में उठने के कारण सुनील सिंह का टिकट काटकर कालीचरण सिंह को भाजपा ने टिकट दिया है. कालीचरण सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.

राज्य सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर रह चुके हैं केएन त्रिपाठी

राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश करने वाले झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी राजनीति में आने से पहले एयरफोर्स में थे. उन्होंने सेना की नौकरी छोड़कर साल 2005 में कांग्रेस की टिकट पर पहली बार झारखंड के डाल्टनगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उस दौरान उन्हें इंदर सिंह नामधारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. साल 2009 में डाल्टेनगंज सीट से ही दुबारा कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताते हुए अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा और इस बार कृष्णानंद त्रिपाठी के सिर जीत का ताज सजा. विधायक बनने के बाद उन्हें राज्य सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री बनने का मौका भी मिला.

हजारीबाग लोकसभा सीट : दल बदलने में माहिर रहे हैं पटेल

2019 के विधानसभा चुनाव से पहले 23 अक्टूबर को झामुमो छोड़कर जेपी पटेल ने भाजपा का दामन थाम लिया था. भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने जीत भी हासिल की थी. बाद में जब कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष की तलाश शुरू की थी, तो उस दौरान जेपी पटेल का नाम सुर्खियों में आया था. लेकिन बात नहीं बनने पर यह जिम्मेदारी अमर बाउरी को दे दी गयी, जबकि जेपी पटेल को भाजपा ने सचेतक बना दिया . 2019 के चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने के समय जेपी पटेल ने कहा था कि झामुमो अब परिवार वाली पार्टी बन गयी है. उन्होंने यह भी कहा था कि हेमंत सोरेन पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देते हैं. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विधायक जय प्रकाश भाई पटेल बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गये. पटेल स्व. टेक लाल महतो के पुत्र हैं. उन्होंने 20 मार्च 2024 को भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गये.

मनीष जायसवाल ने झारखंड विकास मोर्चा से शुरू किया राजनीतिक सफर

मनीष जायसवाल ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत वर्ष 2008 में नगर परिषद चुनाव से की. उन्होंने पहली बार हजारीबाग नगर परिषद से उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ा और विजयी रहे. इसी बीच झाविमो की ओर से हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के मांडू विधानसभा के उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमायी, जिसमें वे पराजित हुए. 27 नवंबर 2013 को अपने हजारों समर्थकों के साथ भाजपा जिला कार्यालय अटल भवन सभागार में झाविमो के केंद्रीय सदस्य सह सदर विधानसभा प्रभारी के पद से इस्तीफा देते हुए भाजपा का दामन थाम लिया. वर्ष 2014 में हजारीबाग सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और पहली बार विधायक चुने गये. इसके बाद 2019 के चुनाव में फिर विधायक बने. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें हजारीबाग लोकसभा सीट के लिए टिकट दिया है. इसे भी पढ़ें : इरफान">https://lagatar.in/irfan-told-hemant-that-he-is-ram-kalpana-is-the-incarnation-of-maa-durga-babulal-said-this-in-retaliation/">इरफान

ने हेमंत को बताया राम, कल्पना को मां दुर्गा का अवतार, बाबूलाल ने पलटवार में कह दी ये बात…
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