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कल पश्चिम बंगाल में वोट डाले जायेंगे. आज सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC ED मामले में ममता बनर्जी को फटकारा, लोकतंत्र के लिए खतरा बताया

  • सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद तल्ख टिप्पणी की
  • जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है
  • हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता.

 NewDelhi : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर पहले चरण में कल 23 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे.  इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज I-PAC मामले में सुनवाई के क्रम में  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फटकार लगा दी.

 

खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए ED जांच के बीच में हस्तक्षेप को गंभीर मामला करार दिया.

 

दरअसल यह विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED )की सर्च कार्रवाई से संबंधित है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री जांच की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता.

 

जानकारों का कहना है कि  सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां ममता सरकार के लिए  मुश्किल का सबब बन सकती है.सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में कभी ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देने पहुंच जायेगा.

 

 कोर्ट के अनुसार यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद कतई नहीं है. यहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री के पद पर है, जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की कार्र्वाई को सीधे  लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया  

 

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है. हालांकि सुनवाई के दौरान टीएमसी द्वारा दलील दी गयी कि यह मामला संघीय विवाद से जुड़ा है.

 

लेकिन कोर्ट इस तर्क से  सहमत नजर था कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री जांच के बीच नहीं जा सकता. आप(ममता) केंद्र-राज्य का विवाद बताकर अपना बचाव नहीं कर सकते.

 

टीएमसी की वकील मेनका गुरुस्वामी ने ED की याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए पूछा कि आखिर इसमें ऐसा कौन सा बड़ा संवैधानिक सवाल है जिसे बड़ी बेंच को भेजा जाये? कहा कि हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता.

 

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