इन क्षेत्रों में पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां निवास करती हैं
2024 के शुरुआती महीने में हुए एशियन वॉटरबर्ड सेंसस में ये पाया गया कि ज़िले के कुछ खास क्षेत्रों में प्रवासी तथा दुर्लभ पक्षियों का बसेरा है. इनमें उदयपुर बर्ड सेंचुरी ( सरैयामन पक्षी विहार), गंडक का फ्लड प्लेन क्षेत्र, बगहा-2 प्रखंड का दारूवाबरी क्षेत्र तथा मझौलिया प्रखंड का लाल सरैया क्षेत्र शामिल है. वैसे तो इन क्षेत्रों में पक्षियों की क़रीब 250 से अधिक प्रजातियां निवास करती हैं, लेकिन जहां तक साइबेरियन सहित अन्य प्रवासी पक्षियों की है, तो ज़िले में इनकी क़रीब 45 प्रजातियां दर्ज की गई हैं. जानकार बताते हैं कि अक्टूबर में इन प्रवासी पक्षियों का यहां आना शुरू हो जाता है, जो नवंबर के अंतिम सप्ताह तक चलता है. इसके बाद यह पक्षी फरवरी तक यहां रहते हैं.साइबेरिया की तुलना में भारत एक गर्म प्रदेश है
प्रवास पर आने वाले ज्यादातर पक्षी अपने जोड़े के साथ यहां आते हैं. शीतकाल में यहां अपने वंश की वृद्धि कर, मार्च में अपने परिवार के साथ पुनः वापस लौट जाते हैं. यहां इन परिंदों का मुख्य आहार नदी की मछलियां, जलीय जीव एवं आसपास के खेतों में लगे अनाज होते हैं. साइबेरिया में पड़ने वाली भीषण ठंड की वजह से वहां इन परिंदों के सामने भोजन का संकट उत्पन्न हो जाता है. ऐसे में इन पक्षियों का रुख गर्म प्रदेशों की ओर होता है. चुंकि साइबेरिया की तुलना में भारत एक गर्म प्रदेश है, इसलिए इन पक्षियों का रुख भारत की तरफ ही होता है. इस वजह से इन दिनों यह इलाका पक्षियों की वजह से मनोरम हो गया है. इसे भी पढ़ें - तेजस्वी">https://lagatar.in/sambhal-incident-is-sad-and-against-the-basic-spirit-of-the-constitution-tejashwi/">तेजस्वीने योगी पर साधा निशाना, किसी प्रदेश का सीएम जब विध्वंसकारी नारे लगाये तो समझों वह… [wpse_comments_template]
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