- रातभर दहशत में रहे ग्रामीण
- वन विभाग पर सूचना देने के बावजूद मौके पर नहीं पहुंचने का आरोप
Amit Kumar
W.Singhbhum : नोवामुंडी प्रखंड के बड़ाजामदा थाना क्षेत्र स्थित टंकुरा बस्ती में बुधवार रात करीब 20 हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया. हाथियों के गांव में प्रवेश करते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई. वहीं इसके अगले दिन गुरुवार की सुबह जंगल से सटे खेत में एक हाथी का शव मिला. हाथी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका फिलहाल पता नहीं चल सका है.
20 हाथियों के झुंड को भगाने के लिए रातभर जगे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, 3 नवंबर की शाम करीब 20 हाथियों का झुंड गांव में घुस आया था. हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश करते देख ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी. ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची. ग्रामीणों ने खुद ही हाथियों को गांव से बाहर खदेड़ने की कोशिश की.
ग्रामीण पूरी रात ग्रामीण मशाल और अन्य पारंपरिक तरीकों से हाथियों के झुंड को गांव और घरों से दूर भगाने में जुटे रहे. हाथियों की लगातार आवाजाही और संभावित नुकसान की आशंका के कारण ग्रामीण पूरी रात दहशत में रहे. लोगों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सताती रही.
इसे भी पढ़ें
सुबह खेत में मिला हाथी का शव
वहीं गुरुवार की सुबह बुरमा टोली के समीप जंगल से सटे एक खेत में हाथी का शव पड़ा मिला. इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. हाथी की मौत को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं. हालांकि मौत का वास्तविक कारण और समय स्पष्ट नहीं है. पोस्टमार्टम और वन विभाग की जांच के बाद ही इसकी वास्तविक वजह सामने आ सकेगी.
हाथियों की आवाजाही से ग्रामीण परेशान
बता दें कि बड़ाजामदा और आसपास के गांवों में पिछले कई महीनों से हाथियों के झुंड की आवाजाही लगातार बनी हुई है. हाथी कभी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो कभी मुख्य सड़कों पर पहुंच जाते हैं. इससे ग्रामीणों के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है.
ग्रामीणों ने वन विभाग से मृत हाथी की मौत की निष्पक्ष जांच कराने और हाथियों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने की मांग की है. साथ ही, हाथियों के गांव में प्रवेश की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

