Ranchi : इधर पिछले हफ्तेभर से झारखंड के आसमान में बादल मंडरा रहे हैं. पर खुलकर बरस नहीं रहे हैं. यही वजह है कि पिछले करीब एक माह से राज्य में पानी की समस्या बनी हुई है. गांव ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. पेयजल की बात की जाए तो ग्रामीण इलाकों में हालात बहुत ही खराब हैं. ज्यादातर जलस्रोत सूख गए हैं. चापाकल और कुएं तो पहले ही जवाब दे चुके हैं. स्थिति यह है कि कई इलाकों में ग्रामीण नाले, चुओं और झरने का पानी पीने को मजबूर हैं. वे कहते हैं कि अगर बारिश नहीं हुई तो आनेवाले कुछ दिनों में स्थिति और बिगड़ जाएगी. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं दिन भर पानी के जुगाड़ में रहतीं है. इसके लिए उन्हें दूर दूर भटकना पड़ रहा है. शहरों में सरकारी टैंकर जलापूर्ति में लगे हैं, पर आबादी के लिहाज से टैंकर कम पड़ रहे हैं. शुभम संदेश की टीम ने राज्य में जल संकट को लेकर जानकारी हासिल की है. पेश है रिपोर्ट.
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alt="नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार" width="1024" height="801" /> नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार[/caption]
पाकुड़ : सूख चुके हैं ज्यादातर जलस्रोत, झरने का पानी छानकर पीने को विवश हैं ग्रामीण
पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत पिपरा के ग्रामीण जल संकट से जुझ रहे हैं. इस समय वे झरने का पानी छानकर पीने को विवश हैं.गांव में दो टोले हैं. जिसकी पूरी आबादी करीब 300 लोगों की है. यह अनुसूचित जनजाति बहुल गांव है. गांव में सिर्फ एक चापाकल है. दो वर्ष पूर्व दोनों टोले में झरना कूप का निर्माण किया गया था. भीषण गर्मी में यह भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. [caption id="attachment_630403" align="alignnone" width="1024"]alt="नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार" width="1024" height="801" /> नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार[/caption]
गांव में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लोग, परेशानी और बढ़ेगी : सोम मुर्मू
पिपरा गांव निवासी सोम मुर्मू का कहना है कि भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. झरना कुआं भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. अभी इसी कूप से थोड़ा बहुत पानी मिल जाता है, जिससे घरेलू कामकाज होता है. इसे सूखने के बाद परेशानी और ज्यादा बढ़ेगी.पानी की किल्लत, झरने से पानी लाना पड़ता है, बारिश का कर रहे हैं इंतजार: नाचन मुर्मू
पिपरा गांव निवासी नाचन मुर्मू ने बताया कि गांव में पानी की किल्लत है. पीने के लिए झरने से पानी लाना पड़ता है. घर के लोग उस पानी को कपड़े से छानकर पीते हैं. इधर गर्मी बढ़ रही है. अगर कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो स्थिति और बुरी हो जाएगी.सूख गए हैं सभी जलस्रोत, गर्मी में पानी के लिए मचा है हाहाकार : तालामय मुर्मू
पिपरा गांव के ही तालामय मुर्मू नामक महिला ने बताया कि हम लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. भीषण गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचा है. आसपास के सभी जलस्रोतों के सूख जाने से स्थिति काफी विकट होती जा रही है. यही स्थिति रही तो आनेवाले दिनों में समस्या और बढ़ जाएगी.सभी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं,ताकि सूखे कुएं में पानी आ जाए और सब को पानी की कमी से निजात मिल सके.पानी के लिए एकमात्र सहारा झरना कुआं है वह भी सूखने की कगार पर है : वकील मड़ैया
पिपरा गांव निवासी वकील मड़ैया का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पानी का एकमात्र सहारा झरना कुआं है. यह भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. हमलोग रात भर जगकर इस कुएं में पानी जमा होने का इंतजार करते हैं. उसके बाद उसे बाल्टी में घर लाकर छानकर पीते हैं. यहां गर्मी में हर साल पानी की समस्या खड़ी हो जाती है. इसका निराकरण शीघ्र होना चाहिए.काम चल रहा है, जल्द गांव में जल संकट दूर किया जाएगा : राहुल कुमार
ग्रामीणों ने जल संकट दूर करने के लिए जिला प्रशासन से डीप बोरिंग कराने की मांग कई बार चुके है, लेकिन मांग अभी तक नहीं पूरी नहीं की गई. इस संबंध में पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार ने बताया कि बहुत जल्द पिपरा गांव में जल संकट दूर किया जाएगा. काम तेजी से चल रहा है. कई फेज का काम पूरा हो चुका है.गिरिडीह : योजना प्यास नहीं बुझा पा रही
जिले के सरिया प्रखंड के नावाडीह पंचायत में नल जल योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है. इस योजना के तहत चार जल मीनार का निर्माण किया गया था. इसके निर्माण से लोगों की जल संकट दूर होने की उम्मीदें बढ़ी थी, लेकिन उम्मीदों पर पानी फिर गया. ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक और विभागीय लापरवाही से यह संकट उत्पन्न हुई है.
पंचायत क्षेत्र में जल संकट पहले की तरह बनी हुई है, पहल की जरूरत : बसंती देवी
पंचायत क्षेत्र में पेयजल समस्या को लेकर पंसस बसंती देवी ने बताया कि सरकार की नल योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा सकी. लोगों को उम्मीद थी कि इस योजना से पानी की किल्लत दूर होगी, लेकिन वैसा नहीं हो पा रहा है. इस पंचायत में जल संकट की स्थिति पूर्ववत है.हमेशा ठगे जाते हैं, इस बार भी नल-जल योजना में लोग ठगे गए : आनन्द शर्मा
ग्रामीण आनन्द शर्मा ने बताया कि आम लोग हमेशा ठगे जाते हैं. पहले जल मीनार के नाम पर ठगा गया और अब नल जल योजना के नाम पर लोग ठगे गए. इसके लिए संबंधित विभाग जिम्मेवार हैं. वैसे पानी की किल्लत के लिए सरकारी स्तर पर पहल करने की जरुरत है.अधिकारियों के सारे वादे भी झूठ साबित हो रहे, शीघ्र पहल की जरूरत: पोखनी
स्थानीय निवासी मसोमात पोखनी ने बताया कि दो-तीन बार बड़े अधिकारी आकर स्थिति को देख चुके हैं. लोगों को भरोसा दिया कि चिंता मत कीजिए सबको पानी मिलेगा. अधिकारियों के वादे भी झूठ साबित हो रहे हैं. लोग सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं. यहां गर्मी में पानी की किल्लत हर साल शुरू हो जाती है. इसका स्थायी समाधन जरुरी है. इस दिशा में जल्द पहल करने की जरुरत है.पंचायत क्षेत्र में ज्यादातर चापाकल खराब पड़े हैं, कुएं भी सूख गए हैं : संजीत साव
स्थानीय जनप्रतिनिधि संजीत साव का कहना है कि नावाडीह पंचायत में 150 परिवार से अधिक परिवार निवास करते हैं. पानी की सभी को जरूरत है. पंचायत क्षेत्र के ज्यादातर चापाकल खराब पड़ा है. कभी कभार कुछ घंटे चलने के बाद ही पानी देना बंद कर देता है. भीषण गर्मी में कुआं भी सूख चुका है. नल योजना भी नाकाम साबित हो रही है.सभी घरों में पानी का कनेक्शन दिया जाना है, जल्द का शुरू होगा काम : लालू
इस संबंध में पूछे जाने पर पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता लालू महतो ने बताया कि नल जल योजना के तहत सभी घरों में पानी का कनेक्शन दिया जाना है. तकनीकी कारणों से यह कार्य अधूरा है. दूसरे चरण का कार्य बहुत जल्द शुरू किया जाएगा. बहुत जल्द सभी घरों को कनेक्शन दिया जाएगा.भीषण गर्मी में पानी के लिए तरस रहे डुमरा के ग्रामीण
बाघमारा प्रखंड कार्यालय से महज एक किलोमीटर दूर डुमरा ग्राम पंचायत में पानी की समस्या गंभीर है. भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. डुमरा में जमीन के नीचे पानी का लेयर काफी नीचे चला गया है, जिससे लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता है. यहां एक सोलर टंकी लगाई गई है, लेकिन टंकी का आबादी के लिहाज से काफी कम है. कहा जा रहा है कि कुछ दिनों में समस्या और बढ़ सकती है.डीप बोरिंग फेल,जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं : रोहित
डुमरा निवासी रोहित कुमार ने बताया कि क्षेत्र में पानी की समस्या हार साल गर्मियों में बढ़ जाती है. लेकिन जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं. वर्षों पहले डुमरा जमुआटांड़ में की गई डीप बोरिंग भी फेल हो गई है. गांव में इक्का-दुक्का चापानल हैं जिससे लोग किसी तरह काम चला रहे हैं.एकमात्र चापाकल पर हर रोज लगती है लाइन : प्रेम कुमार
स्थानीय निवासी प्रेम कुमार ने बताया कि डुमरा में हर साल लागों को गर्मी में पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है. इसके बावजूद समस्या का निदान आज तक नहीं हो पाया. डुमरा माथाबांध रोड किनारे स्थित एकमात्र चापानल पर पानी के लिए लोगों की लाइन लगती है. इंतजार के बाद एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता है.सुबह से पानी के जुगाड़ में लग जाती हैं महिलाएं : राजेंद्र विश्वकर्मा
डुमरा लोहार टोला के राजेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि मोहल्ले के सभी चापाकल फेल हो गए हैं. घरों की महिलाओं को सुबह से ही पानी के जुगाड़ में लग जाना पड़ता है. वहीं, पुरुष मेन रोड स्थित चापाकल से साइकिल पर गैलन में पानी लेकर ढोना पड़ रहा है. वहां भी घंटों लाइन लगानी पड़ती है.समस्या गंभीर,रोज साइकिल से पानी ढोना पड़ रहा : सुबोध कुमार
संपूर्ण जन जागृति ऑर्गेनाइजेशन, डुमरा के अध्यक्ष सुबोध कुमार ने बताया कि डुमरा में पानी की समस्या काफी गंभीर है. भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे चला गया है. इसलिए किल्लत झेलनी पड़ रही है. जरूरी काम छोड़कर रोज हरिना या जमुआटांड़ से साइकिल पर डिब्बा-गैलन में पानी ढोकर लाना पड़ रहा है.सूख गए कुएं, चापानल-तालाब बना सहारा : गाजू सोरेन
बागबेड़ा हरहरगुट्टू बड़ा तालाब के समीप रहने वाले गाजू सोरेन ने बताया कि उनके मुहल्ले में पेयजल की काफी किल्लत हैं. क्षेत्र के कुंए तथा चापानल सूख गए हैं. स्थानीय लोगों के लिए राजा तालाब (बड़ा तालाब) ही एक मात्र सहारा है. तालाब के पानी से बर्तन एवं कपड़ा धोने का काम होता है.खरीदकर पानी पीने को विवश हैं क्षेत्र के लोग : अमित सिंह
हरहरगुट्टू के रहने वाले अमित सिंह ने बताया कि उनके मुहल्ले में पानी की काफी किल्लत है. जिसके कारण परिवार के हर सदस्य पानी की व्यवस्था में जुटे रहते हैं. पेयजल संकट का पानी विक्रेता जमकर फायदा उठा रहे हैं. मजबूरी में लोग खरीदकर पानी पीने को विवश हैं.
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