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नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार

Ranchi : इधर पिछले हफ्तेभर से झारखंड के आसमान में बादल मंडरा रहे हैं. पर खुलकर बरस नहीं रहे हैं. यही वजह है कि पिछले करीब एक माह से राज्य में पानी की समस्या बनी हुई है. गांव ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. पेयजल की बात की जाए तो ग्रामीण इलाकों में हालात बहुत ही खराब हैं. ज्यादातर जलस्रोत सूख गए हैं. चापाकल और कुएं तो पहले ही जवाब दे चुके हैं. स्थिति यह है कि कई इलाकों में ग्रामीण नाले, चुओं और झरने का पानी पीने को मजबूर हैं. वे कहते हैं कि अगर बारिश नहीं हुई तो आनेवाले कुछ दिनों में स्थिति और बिगड़ जाएगी. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं दिन भर पानी के जुगाड़ में रहतीं है. इसके लिए उन्हें दूर दूर भटकना पड़ रहा है. शहरों में सरकारी टैंकर जलापूर्ति में लगे हैं, पर आबादी के लिहाज से टैंकर कम पड़ रहे हैं. शुभम संदेश की टीम ने राज्य में जल संकट को लेकर जानकारी हासिल की है. पेश है रिपोर्ट.

पाकुड़ : सूख चुके हैं ज्यादातर जलस्रोत, झरने का पानी छानकर पीने को विवश हैं ग्रामीण

पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत पिपरा के ग्रामीण जल संकट से जुझ रहे हैं. इस समय वे झरने का पानी छानकर पीने को विवश हैं.गांव में दो टोले हैं. जिसकी पूरी आबादी करीब 300 लोगों की है. यह अनुसूचित जनजाति बहुल गांव है. गांव में सिर्फ एक चापाकल है. दो वर्ष पूर्व दोनों टोले में झरना कूप का निर्माण किया गया था. भीषण गर्मी में यह भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. [caption id="attachment_630403" align="alignnone" width="1024"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/8-5-1024x801.jpg"

alt="नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार" width="1024" height="801" /> नदी, तालाब और कुओं में पानी का इंतजार[/caption]

गांव में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लोग, परेशानी और बढ़ेगी : सोम मुर्मू

पिपरा गांव निवासी सोम मुर्मू का कहना है कि भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. झरना कुआं भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. अभी इसी कूप से थोड़ा बहुत पानी मिल जाता है, जिससे घरेलू कामकाज होता है. इसे सूखने के बाद परेशानी और ज्यादा बढ़ेगी.

पानी की किल्लत, झरने से पानी लाना पड़ता है, बारिश का कर रहे हैं इंतजार: नाचन मुर्मू

पिपरा गांव निवासी नाचन मुर्मू ने बताया कि गांव में पानी की किल्लत है. पीने के लिए झरने से पानी लाना पड़ता है. घर के लोग उस पानी को कपड़े से छानकर पीते हैं. इधर गर्मी बढ़ रही है. अगर कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो स्थिति और बुरी हो जाएगी.

सूख गए हैं सभी जलस्रोत, गर्मी में पानी के लिए मचा है हाहाकार : तालामय मुर्मू

पिपरा गांव के ही तालामय मुर्मू नामक महिला ने बताया कि हम लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. भीषण गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचा है. आसपास के सभी जलस्रोतों के सूख जाने से स्थिति काफी विकट होती जा रही है. यही स्थिति रही तो आनेवाले दिनों में समस्या और बढ़ जाएगी.सभी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं,ताकि सूखे कुएं में पानी आ जाए और सब को पानी की कमी से निजात मिल सके.

पानी के लिए एकमात्र सहारा झरना कुआं है वह भी सूखने की कगार पर है : वकील मड़ैया

पिपरा गांव निवासी वकील मड़ैया का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पानी का एकमात्र सहारा झरना कुआं है. यह भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है. हमलोग रात भर जगकर इस कुएं में पानी जमा होने का इंतजार करते हैं. उसके बाद उसे बाल्टी में घर लाकर छानकर पीते हैं. यहां गर्मी में हर साल पानी की समस्या खड़ी हो जाती है. इसका निराकरण शीघ्र होना चाहिए.

काम चल रहा है, जल्द गांव में जल संकट दूर किया जाएगा : राहुल कुमार

ग्रामीणों ने जल संकट दूर करने के लिए जिला प्रशासन से डीप बोरिंग कराने की मांग कई बार चुके है, लेकिन मांग अभी तक नहीं पूरी नहीं की गई. इस संबंध में पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार ने बताया कि बहुत जल्द पिपरा गांव में जल संकट दूर किया जाएगा. काम तेजी से चल रहा है. कई फेज का काम पूरा हो चुका है.

गिरिडीह : योजना प्यास नहीं बुझा पा रही

जिले के सरिया प्रखंड के नावाडीह पंचायत में नल जल योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है. इस योजना के तहत चार जल मीनार का निर्माण किया गया था. इसके निर्माण से लोगों की जल संकट दूर होने की उम्मीदें बढ़ी थी, लेकिन उम्मीदों पर पानी फिर गया. ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक और विभागीय लापरवाही से यह संकट उत्पन्न हुई है.

पंचायत क्षेत्र में जल संकट पहले की तरह बनी हुई है, पहल की जरूरत : बसंती देवी

पंचायत क्षेत्र में पेयजल समस्या को लेकर पंसस बसंती देवी ने बताया कि सरकार की नल योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा सकी. लोगों को उम्मीद थी कि इस योजना से पानी की किल्लत दूर होगी, लेकिन वैसा नहीं हो पा रहा है. इस पंचायत में जल संकट की स्थिति पूर्ववत है.

हमेशा ठगे जाते हैं, इस बार भी नल-जल योजना में लोग ठगे गए : आनन्द शर्मा

ग्रामीण आनन्द शर्मा ने बताया कि आम लोग हमेशा ठगे जाते हैं. पहले जल मीनार के नाम पर ठगा गया और अब नल जल योजना के नाम पर लोग ठगे गए. इसके लिए संबंधित विभाग जिम्मेवार हैं. वैसे पानी की किल्लत के लिए सरकारी स्तर पर पहल करने की जरुरत है.

अधिकारियों के सारे वादे भी झूठ साबित हो रहे, शीघ्र पहल की जरूरत: पोखनी

स्थानीय निवासी मसोमात पोखनी ने बताया कि दो-तीन बार बड़े अधिकारी आकर स्थिति को देख चुके हैं. लोगों को भरोसा दिया कि चिंता मत कीजिए सबको पानी मिलेगा. अधिकारियों के वादे भी झूठ साबित हो रहे हैं. लोग सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं. यहां गर्मी में पानी की किल्लत हर साल शुरू हो जाती है. इसका स्थायी समाधन जरुरी है. इस दिशा में जल्द पहल करने की जरुरत है.

पंचायत क्षेत्र में ज्यादातर चापाकल खराब पड़े हैं, कुएं भी सूख गए हैं : संजीत साव

स्थानीय जनप्रतिनिधि संजीत साव का कहना है कि नावाडीह पंचायत में 150 परिवार से अधिक परिवार निवास करते हैं. पानी की सभी को जरूरत है. पंचायत क्षेत्र के ज्यादातर चापाकल खराब पड़ा है. कभी कभार कुछ घंटे चलने के बाद ही पानी देना बंद कर देता है. भीषण गर्मी में कुआं भी सूख चुका है. नल योजना भी नाकाम साबित हो रही है.

सभी घरों में पानी का कनेक्शन दिया जाना है, जल्द का शुरू होगा काम : लालू

इस संबंध में पूछे जाने पर पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता लालू महतो ने बताया कि नल जल योजना के तहत सभी घरों में पानी का कनेक्शन दिया जाना है. तकनीकी कारणों से यह कार्य अधूरा है. दूसरे चरण का कार्य बहुत जल्द शुरू किया जाएगा. बहुत जल्द सभी घरों को कनेक्शन दिया जाएगा.

भीषण गर्मी में पानी के लिए तरस रहे डुमरा के ग्रामीण

बाघमारा प्रखंड कार्यालय से महज एक किलोमीटर दूर डुमरा ग्राम पंचायत में पानी की समस्या गंभीर है. भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. डुमरा में जमीन के नीचे पानी का लेयर काफी नीचे चला गया है, जिससे लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता है. यहां एक सोलर टंकी लगाई गई है, लेकिन टंकी का आबादी के लिहाज से काफी कम है. कहा जा रहा है कि कुछ दिनों में समस्या और बढ़ सकती है.

डीप बोरिंग फेल,जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं : रोहित

डुमरा निवासी रोहित कुमार ने बताया कि क्षेत्र में पानी की समस्या हार साल गर्मियों में बढ़ जाती है. लेकिन जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं. वर्षों पहले डुमरा जमुआटांड़ में की गई डीप बोरिंग भी फेल हो गई है. गांव में इक्का-दुक्का चापानल हैं जिससे लोग किसी तरह काम चला रहे हैं.

एकमात्र चापाकल पर हर रोज लगती है लाइन : प्रेम कुमार

स्थानीय निवासी प्रेम कुमार ने बताया कि डुमरा में हर साल लागों को गर्मी में पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है. इसके बावजूद समस्या का निदान आज तक नहीं हो पाया. डुमरा माथाबांध रोड किनारे स्थित एकमात्र चापानल पर पानी के लिए लोगों की लाइन लगती है. इंतजार के बाद एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता है.

सुबह से पानी के जुगाड़ में लग जाती हैं महिलाएं : राजेंद्र विश्वकर्मा

डुमरा लोहार टोला के राजेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि मोहल्ले के सभी चापाकल फेल हो गए हैं. घरों की महिलाओं को सुबह से ही पानी के जुगाड़ में लग जाना पड़ता है. वहीं, पुरुष मेन रोड स्थित चापाकल से साइकिल पर गैलन में पानी लेकर ढोना पड़ रहा है. वहां भी घंटों लाइन लगानी पड़ती है.

समस्या गंभीर,रोज साइकिल से पानी ढोना पड़ रहा : सुबोध कुमार

संपूर्ण जन जागृति ऑर्गेनाइजेशन, डुमरा के अध्यक्ष सुबोध कुमार ने बताया कि डुमरा में पानी की समस्या काफी गंभीर है. भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे चला गया है. इसलिए किल्लत झेलनी पड़ रही है. जरूरी काम छोड़कर रोज हरिना या जमुआटांड़ से साइकिल पर डिब्बा-गैलन में पानी ढोकर लाना पड़ रहा है.

सूख गए कुएं, चापानल-तालाब बना सहारा : गाजू सोरेन

बागबेड़ा हरहरगुट्टू बड़ा तालाब के समीप रहने वाले गाजू सोरेन ने बताया कि उनके मुहल्ले में पेयजल की काफी किल्लत हैं. क्षेत्र के कुंए तथा चापानल सूख गए हैं. स्थानीय लोगों के लिए राजा तालाब (बड़ा तालाब) ही एक मात्र सहारा है. तालाब के पानी से बर्तन एवं कपड़ा धोने का काम होता है.

खरीदकर पानी पीने को विवश हैं क्षेत्र के लोग : अमित सिंह

हरहरगुट्टू के रहने वाले अमित सिंह ने बताया कि उनके मुहल्ले में पानी की काफी किल्लत है. जिसके कारण परिवार के हर सदस्य पानी की व्यवस्था में जुटे रहते हैं. पेयजल संकट का पानी विक्रेता जमकर फायदा उठा रहे हैं. मजबूरी में लोग खरीदकर पानी पीने को विवश हैं.

कचरा से खराब हो रहा तालाब का पानी : बबलू कुमार

हरहरगुट्टू राजा तालाब के समीप रहने वाले बबलू कुमार ने बताया कि क्षेत्र में पानी की काफी समस्या है. चापानल सूख गए हैं. . क्षेत्र का एक मात्र राजा तालाब लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है. लेकिन तालाब के इर्द-गिर्द बसे लोग तालाब में कचरा फेंकते हैं, जिससे पानी खराब हो रहा है

ग्रामीण खरकई नदी के पानी से चला रहे काम: सुंदरा भूमिज

बागबेड़ा के रानीडीह निवासी सुंदरा भूमिज ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही क्षेत्र में जल संकट शुरू हो जाता है. इसके लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. पानी का लेयर काफी नीचे चले जाने के कारण सार्वजनिक चापानल से पानी नहीं निकल रहा है. ग्रामीण क्षेत्र के लोग खरकई नदी पर निर्भर हैं.

नदी का पानी सूखने से बढ़ जाती है परेशानी: सुमित्रा हेंब्रम

चंडीपोस गांव निवासी महिला सुमित्रा हेंब्रम ने कहा कि गांव के बीच से नदी बहती है, गांव के अधिकतर ग्रामीण इसी नदी के पानी पर निर्भर रहते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में नदी का पानी सूख जाता है. जिससे लोगों को पानी के लिए परेशानी हो जाती है. गांव में खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत जल्द से जल्द की जानी चाहिए.

जलमीनार खराब,पंचायत प्रतिनिधि नहीं दे रहे हैं ध्यान : पांडू अंगरिया

चंडीपोस गांव निवासी पांडू अंगरिया ने कहा कि गांव में पानी की काफी समस्या है, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा. गांव में लगा सोलर जलमीनार पिछले तीन महीने से खराब पड़ी है. लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के कारण ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है.

डुमरिया : खराब पड़ी है जलमीनार झरने का पानी पी रहे हैं ग्रामीण

डुमरिया के ग्राम भीतरआमदा टोला रालीझारना सबर बस्ती में पीएचडी की ओर से निर्मित जल मीनार कई दिनों से खराब पड़ी है. यहां के करीब 15 सबर जनजाति परिवार बाध्य होकर झरने का पानी पी रहे हैं. आक्रोशित ग्रामीणों ने शनिवार को खराब जल मीनार के पास बर्तन लेकर प्रदर्शन किया. इसके बावजूद पानी की व्यवस्था के लिए कोई पहल नहीं की गई है.

जल मीनार की मरम्मत की जाएगी : सुरेंद्रनाथ हेंब्रम

पेयजल संकट की सूचना मीमो सबर ने मुखिया सुरेंद्रनाथ हेंब्रम को दी. मुखिया ने शनिवार की सुबह सबर बस्ती पहुंच कर आदिम जनजाति की समस्याओं को सुना और ग्रामीण को बताया कि पीएचडी विभाग के जेई से बात कर बहुत जल्द जलमीनार की मरम्मत भी कराई जाएगी. ताकि गर्मी में ग्रामीणों को पानी मिल सके. ग्रामीण भीमो सबर, गुरुबारी सबर, कुंदी सबर, फुलसरी सबर, जगनी सबर, सोमवारी सबर, दुली सबर, शानितोरा सबर, भोटलो सबर ने बताया कि सोलर जलमीनार खराब होने से भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है.

लातेहार : रहते हैं नगर पंचायत क्षेत्र में, पीते हैं चुआंड़ी का पानी

यह विडंबना है कि नगर पंचायत क्षेत्र में रहने के बावजूद डुरूआ के चांदनी चौक निवासियों की प्यास चुआंड़ी के पानी से बुझ रही है. नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर पांच के डुरूआ ग्राम के चांदनी चौक की महिलायें इस भीषण गर्मी में पधया नदी जाती हैं और यहां चुआड़ी खोद कर पानी निकालाती हैं. फिर जब पानी साफ होता है तो उसे ले कर घर जाती हैं.

घर का काम छोड़ लाते हैं पानी

चांदनी चौक की हसीना बीबी, रजिया खातून और हलीमा खातून ने बताया कि सबेरे घर में कई दूसरे काम होते हैं, लेकिन वे उन्हें छोड़ कर एक किलोमीट दूर नदी में आती हैं और चुंआड़ी का पानी ले कर घर का खाना बनाती एवं अन्य दूसरे काम करती है. जमीला खातून व सैरा बानो ने बताया कि पानी लाने के चक्कर में अक्सर बच्चों की स्कूल एवं घर के काम में देरी हो जाती है. चांदनी चौक के ही आजाद खान, इमामन अंसारी और कमरूद्दीन अंसारी ने बताया कि टोला में जितने भी चापाकल हैं वे सभी खराब हैं.

पांकी : पानी की समस्या, ग्रामीण पांकी बाजार से पानी ढोने को विवश

सरकार की जल नल योजना पांकी मुख्यालय में विफल साबित हो रही है. सप्ताहिक हाट बाजार में आये लोगों को भी पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है. पांकी कर्पूरी चौक के आसपास के दुकानदारों को भी इस वर्ष गर्मी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अहले सुबह से ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है. पांकी बाजार स्थित चापाकल से महिलाएं पानी सिर पर ढोने के लिए विवश होती है.

पेयजल की समस्या से परेशान रहते हैं लोग : सुमन

पांकी पश्चिमी के पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी सुमन पासवान ने कहा कि पहाड़ी मुहल्ला में पेयजल की समस्या केवल गर्मी में ही नहीं रहती है, इस समस्या से यहां के स्थानीय लोग पूरे साल जूझते हैं. परंतु आज इस ज्वलंत मुद्दे पर किसी जनप्रतिनिधि ने पूरी सक्रियता के साथ समस्या का समाधान नहीं किया. उन्होंने पलामू डीसी से पेयजल आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है.

घाटशिला : सोलर जलमीनार महीनों से खराब, जल-नल योजना बंद

घाटशिला के हेंदलजुडी पंचायत स्थित राजाबासा गांव में पिछले कई माह से सोलर जलमीनार सहित जल नल योजना बंद पड़ी हुई है. ग्रामीणों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए न तो पंचायत प्रतिनिधि का ध्यान है और न ही पेयजल विभाग ही इसे लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है. गांव के लोग पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. गांव से दूर विद्यालय से लोग पानी लाकर काम चला रहे हैं.

दूर से महिलाओं को लाना पड़ता है पानी

राजाबासा गांव की जनसंख्या काफी अधिक है और गांव बड़ा होने के कारण यहां पांच हजार लीटर क्षमता वाले पांच सोलर जलमीनार लगाई गई है. इसके साथ जल नल योजना के तहत घर घर नल लगाया गया है. पिछले छह माह से तीन सोलर जलमीनार खराब पड़ी हैं. इसके कारण गांव की महिलाओं को दूरदराज से पानी लाना पड़ता है. पानी के लिए सभी सुबह 4 बजे से लाइन में लगी रहती है. तब जाकर उन्हें पानी मिल पाता है.

बहरागोड़ा : मानुषमुड़िया में दो साल से बंद पड़ी है जलापूर्ति योजना

पूर्वी सिंहभूम जिला के बहरागोड़ा प्रखंड के मानुषमुड़िया गांव में जल एवं स्वच्छता विभाग के तहत स्थापित 1.50 लाख लीटर पानी की क्षमता वाली टंकी से जलापूर्ति योजना बीते दो साल से बंद है. जलमीनार का मोटर पंप खराब होने से पेयजल आपूर्ति ठप है. मोटर निकालने के दौरान मोटर बोरिंग में ही गिर गया है, इसके बाद से इसे ठीक करने के लिए कोई पहल नहीं हुई.

स्वच्छता विभाग नहीं कर रहा पहल

ग्रामीणों ने बताया कि उक्त योजना से दिन में दो बार जलापूर्ति होती थी. जलापूर्ति योजना बंद होने के कारण गांव के लोगों को नहाने में भी कठिनाई हो रही है. साथ ही पीने के लिए स्वच्छ पानी भी नहीं मिल रहा है. पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है. पंचायत के मुखिया राम मुर्मू ने कहा कि इस संबंध में सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक समीर कुमार महंती, उपायुक्त विजया जाधव और जल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी को सूचना दी गई है.

अधूरी पड़ी है जलापूर्ति योजना भीषण गर्मी में पेयजल की किल्लत : उमाशंकर यादव

वार्ड 24 के निवासी उमाशंकर यादव ने बताया कि भीषण गर्मी में पेयजल की किल्लत है. कहने को तो कई जलापूर्ति योजनाएं हैं, लेकिन वह योजनाएं लोगों की प्यास बुझाने में सक्षम साबित नहीं हो रही. अब सुनने में आ रहा है कि पुनासी जलाशय से पानी की सप्लाई होगी. पिछले एक दशक से अधिक समय से अजय नदी पर 24 करोड़ रुपए की लागत वाली जलापूर्ति योजना अधूरी पड़ी है.

गंगा नदी से पानी लाने की बात थी,पर योजना धरातल पर नहीं उतरी : नारायण

वार्ड 25 के निवासी नारायण महतो ने बताया कि वर्ष 2015 में बिहार के पीरपैंती से पाइपलाइन के जरिए गंगा नदी से पानी लाने की योजना बनी थी. इस पानी का भंडारन अजय बराज में किया जाता. इस योजना को सरकार ने धरातल पर नहीं उतारा.

पुनासी जलाशय परियोजना जल्द चालू किया जाना जरूरी : पुरुषोत्तम कुमार

वार्ड 25 के ही निवासी पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि पुनासी जलाशय परियोजना चालू किया जाना जरूरी है. इसके चालू होने से जल संकट समस्या का समाधान हो जाएगा. गर्मी के दिनों में अजय नदी सूख जाने से पानी की किल्लत शुरू हो जाती है.

गड्ढे से पानी से बनाना पड़ता है खाना : जयपाल पिंगुवा

स्थानीय ग्रामीण जयपाल पिंगुवा ने कहा कि गांव का सोलर जल मीनार बहुत दिनों से खराब पड़ी है. कई बार विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है. इन दिनों लोगों को पानी के लिए काफी भटकना पड़ रहा है.

गड्ढे से पानी लाकर घर का खाना बनाने को विवश, बारिश का इंतजार : राधिका पिंगुवा

स्थानीय महिला राधिका पिंगुवा ने कहा कि चिल्लाती गर्मी में पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीण मजबूरी में खेत के गड्ढे से पानी लाकर घर का खाना बनाने को विवश हैं. अगर कुछ दिन बारिश नहीं हुई तो स्थिति और विकट हो जाएगी.

पानी की कमी से ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को, सबका हाल बुरा: मंजू पिंगुवा

स्थानीय महिला मंजू पिंगुवा ने कहा कि पानी नहीं मिलने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों के लिए होती है. इस वजह से उन्हें समय पर भोजन भी नहीं दे पा रही हूं. पानी के बिना सबका बुरा हाल है.

चाईबासा शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए कनेक्शन देने का काम जोरों पर

चाईबासा शहरी जलापूर्ति योजना के तहत शहरी क्षेत्र के विभिन्न वार्ड में जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन से कनेक्शन करने का काम किया जा रहा है. शनिवार को गाड़ी खाना मोहल्ले में 110 घरों को नया पानी का कनेक्शन दिया गया. इससे पूर्व इस मोहल्ले में 100 से ऊपर पानी का कनेक्शन दिया जा चुका है. लेकिन अभी भी पानी का कनेक्शन देने का कार्य अन्य भागों में भी जोर शोर से किया जा रहा है

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