- सीएम की पहल राजनीतिक दलों का साथ
- राजनीतिक दलों ने सीएम हेमंत सोरेन की पहल की सराहना की
Ranchi : सरना धर्म कोड लागू कराने का सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह क्या किया, झारखंड में राजनीति गरमा गयी है. सभी पार्टियां चाहती हैं कि आदिवासी समाज के लिए धर्म कोड लागू किया जाए, ताकि इसके माध्यम से आदिवासियों को अलग पहचान मिल सके. आदिवासियों की इस मांग पर राजनीतिक दलों के नेता एकजुट हैं और वे अलग-अलग तर्कों से समझा रहे हैं कि अलग धर्म कोड क्यों जरूरी है. उनका कहना है कि धर्म कोड लागू नहीं होने से आदिवासी समाज विलुप्ति के कगार पर जा सकता है. इसलिए सरना धर्म कोड लागू करने की दिशा में शीघ्र पहल होनी चाहिए. कांग्रेस, झामुमो, राजद के नेताओं ने सरना कोड को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से किए गए आग्रह की सरहना की है और इसे आदिवासी समाज के हित में बताते हुए शीघ्र लागू करने की वकालत की है. शुभम संदेश टीम से इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के राज्य भर के नताओं से बातचीत कर उनकी राय जानी है. पेश है रिपोर्ट...
हजारीबाग : आदिवासियों ने बताया क्यों जरूरी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड को केंद्र से मंजूरी दिलाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि सरना धर्म कोड लागू नहीं हुआ, तो आदिवासियों का वजूद नहीं बचेगा. हजारीबाग में आदिवासी समाज ने इसका स्वागत किया है. वहीं भाजपा ने हेमंत सोरेन पर आदिवासियों के नाम पर राजनीति रोटी सेंकने का आरोप लगाया है.
तभी बचेगा आदिवासी समुदाय : महेंद्र बेक
आदिवासी सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष महेंद्र बेक कहते हैं कि सरना धर्म कोड लागू होने से ही आदिवासी समुदाय बचेगा. यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से उठाया गया अत्यंत ही सराहनीय कदम है. उन्होंने राष्ट्रपति से मांग कर आदिवासी हितों की रक्षा के लिए बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री की यह पहल स्वागतयोग्य है. इसके लिए सरना समिति उन्हें साधुवाद देती है.
दिखावा तो नहीं कर रहे हेमंत : रोशनी तिर्की
भाजपा नेत्री सह हजारीबाग नगर निगम की निवर्तमान मेयर रोशनी तिर्की ने कहा कि हेमंत सोरेन आदिवासियों के रहनुमा बनने का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं. मोदी सरकार सबके साथ है और सबका विकास करना चाहती है. इसलिए वह आरंभ से ही सरना धर्म कोड लागू करने के पक्ष में काम रहे हैं. हेमंत आदिवासियों के नाम पर राजनीति रोटी सेंकना बंद करें.
सुरक्षा हर हाल में मिले: डॉ. मारग्रेट
विनोबाभावे विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र विभाग की पूर्व एचओडी डॉ. मारग्रेट लकड़ा कहती हैं कि सिर्फ धरना कोड क्यों, संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासियों को हर तरह से सुरक्षित करने की जरूरत है. सीएम हेमंत सोरेन की मांग जायज है. लेकिन आदिवासी हितों से संबंधित सभी मुद्दों की बाबत मांग करने की जरूरत है ताकि आदिवासी पूरी तरह सुरक्षित रह सकें.
हेमंत सोरेन की मांग जायज : अर्चना हेम्ब्रोम
सरना धर्म कोड पर चौपारण स्थित चोरदाहा पंचायत की मुखिया अर्चना हेंब्रम का कहना है आदिवासी समाज के हित के लिए यह कोड जल्द लागू करना चाहिए. कोड नहीं लागू होने से आदिवासी समाज दूसरे धर्म को अपना रहे हैं. इससे आदिवासी समाज विलुप्ति के कगार पर है. इस दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी पहचान मिल सके.
आदिवासी हित में पहल : रुचि कुजूर
झामुमो नेत्री सह झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रूचि कुजूर ने कहा कि आदिवासी हित में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहल की है. अगर सरना धर्म कोड लागू होगा, तभी आदिवासियों का वजूद संरक्षित होगा. इसके लिए सभी आदिवासियों को सामूहिक रूप से सीएम के साथ आवाज मुखर करने की जरूरत है.
लागू होना चाहिए धर्म कोड : चंद्रनाथ
झारखंड आंदोलनकारी चंद्रनाथ भाई पटेल कहते हैं कि आदवासियों के लिए सरना धर्म कोड लागू होना चाहिए. वह झारखंड बनने से पहले इसके पक्षधर रहे हैं. इससे आदिवासियों की अपनी एक अलग पहचान होगी. साथ ही उनके हितों की रक्षा भी होगी. इस कोड के लागू होने से समुदाय पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट भी दूर होगा.
सीएम ने अच्छी पहल की है : आनंद सोरेन
झामुमो नेता आनंद सोरेन ने कहा कि आदिवासी सरना कोड के बारे में सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति से मांग कर अच्छी पहल की. यह उनकी ओर से आदिवासियों के हितों में उठाया गया सराहनीय कदम है. इससे आदिवासियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा दूर होगा और उनकी अपनी एक अलग पहचान होगी.
आदिवासी हित में ही उठाया कदम : मनोज
संथाल आदिवासी स्टूडेंट्स यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज टुडू ने कहा कि राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड लागू करने की मांग कर सीएम हेमंत सोरेन ने आदिवासी हित में बड़ा कदम उठाया है. अब राष्ट्रपति को भी इसे मानना चाहिए. वह भी आदिवासियों की सुरक्षा की पक्षधर रही हैं. झारखंड में आदिवासियों का हाल उन्होंने करीब से देखा है.
यह तअस्मिता का सवाल : शांतनु मिश्रा
राजीव गांधी पंचायती राज्य झारखंड प्रदेश के उपाध्यक्ष शांतनु मिश्रा कहते है कि मुख्यमंत्री द्वारा उठाया गया यह कदम सारहनीय है जिस प्रकार सभी धर्मो का अपना बोर्ड है उसी प्रकार यदि आदिवासियों के लिए सरना कोड लागू होगा तो इसमे हर्ज क्या है . इतने लंबे समय से आदिवासी अपने अधिकारों से वंचित है जब सरना कोड लागू हो जाएगा तो आदिवासियों को उनका हक और अधिकार मिलने लगेगा . यह मांग आदिवासियों की अस्मिता का सवाल है.
सभी को अधिकार मिले : सतीश मोहन
भाजपा के भुरकुंडा मंडल अध्यक्ष सतीश मोहन मिश्रा ने कहा की सरना कोड लागू होने से कोई परहेज नहीं लेकिन झारखण्ड में रह रहे सभी वर्ग और सभी लोगों को सम्मान के साथ रहने का अधिकर है और सभी झारखंडियों को एक सम्मानअधिकार मिलना चहिए . भारतीय जनता पार्टी जात की नहीं जमात की बात करती है. सबका साथ सबका विकास ही भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य है.
हक के लिए सरना कोड जरूरी : विनोद
झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला सचिव विनोद कुमार महतो कहते हैं कि आदिवासियों के हक अधिकार के लिए सरना कोड लागू होना बहुत ही जरूरी है सरना कोड लागू होने के बाद आदिवासियों को उनका सही हक और अधिकार मिलने लगेगा. देखा जाता है कि कई गुणा भाग कर आदिवासियों की जमीन हड़प ली जाती है. सरना कोड लागू होने से ऐसा नहीं होगा. इसलिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा राष्ट्रपति महोदया से सरना कोड लागू करने के लिए कहना बिल्कुल सही है.
सरना कोड लागू होना चाहिए : हरेश
आजसू नगर परिषद कार्यकारी अध्यक्ष हरेश राय कहते हैं कि आजसू पार्टी हमेशा आदिवासियों के हित और अधिकार की लड़ाई लड़ती आई है और आगे भी लड़ती रहेगी. सरना कोड को लागू करने के लिए आजसू पार्टी कई बार आवाज उठा चुकी है और आदिवासियों के हित के लिए सरना कोड लागू होना भी चाहिए . राष्ट्रपति महोदया से सरना कोड को केंद्र से मंजूरी दिलाने का आग्रह करना और यह कहना कि सरना कोड लागू नहीं होने से आदिवासियों का वजूद नहीं बचेगा कहीं न कहीं या राजनीतिक स्टैंड है.
सरना धर्म कोड लागू होना जरूरी : संजय
झारखंड मुक्ति मोर्चा के चक्रधरपुर प्रखंड अध्यक्ष संजय हांसदा कहते हैं कि सरना धर्म कोड अवश्य लागू होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड लागू करने के लिए आदिवासी समाज के लोग काफी दिनों से संघर्षरत हैं.
हक व अधिकार से होना पड़ रहा वंचित : विजय
कांग्रेस के चक्रधरपुर प्रखंड अध्यक्ष विजय सिंह सामड कहते हैं कि सरना धर्म कोड लागू नहीं रहने के कारण हमें हक व अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है. यह मांग काफी पुरानी है. आदिवासी मूलवासी होने के बावजूद सरना धर्म कोड लागू नहीं होना चिंतनीय है.
सरना धर्म कोड की मांग जायज है : सुबोध
भारतीय जनतंत्र मोर्चा के जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव का कहना है कि आदिवासियों की सरना धर्म कोड की मांग जायज है. क्योकिं इससे उनकी पहचान जुड़ी हुई है.पर इसकी आड़ में ईसाई धर्म को अपनाने वाले आदिवासियों को सरना धर्म कोड का लाभ नहीं मिले.
आदिवासियों को हक मिलना चाहिए : शशि
वामपंथी नेता शशि कुमार का कहना है कि देश के 20 करोड़ आदिवासियों को उनकी पहचान मिलनी ही चाहिए. भारत विविधताओं का देश है. ऐसे में वर्षों से देश में रहने वाले आदिवासियों को सरना धर्म कोड के माध्यम से उनकी पहचान को सुरक्षित रखने की जरुरत है.
आग्रह राजनीतिक स्टंट मात्र है : रंजीत मरांडी
भाजपा एसटी मोर्चा के जिलाध्यक्ष रंजीत मरांडी ने कहा कि सरना धर्म कोड को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी मिले, यह आदिवासियों की पुरानी मांग है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी दिलाने का सीएम हेमंत सोरेन का आग्रह किया जाना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है.
कोड को मंजूरी मिलनी चाहिए : नुनूराम किस्कू
बेंगाबाद के जेएमएम प्रखंड अध्यक्ष नुनुराम किस्कू ने कहा कि सरना धर्म कोड को मंजूरी दिलाना आदिवासी समाज की पुरानी मांग है. सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड को केंद्र सरकार से मंजूरी दिलाने का आग्रह कर आदिवासी समाज के हित की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है.
आदिवासियों की सबसे पुरानी मांग है : सिकंदर
पीरटांड के पूर्व प्रमुख सह आदिवासी नेता सिकंदर हेम्ब्रम ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सरना धर्म कोड को केंद्र सरकार से मंजूरी दिलाने का आग्रह किया है. यह आदिवासी समाज की पुरानी मांग है.
आदिवासी अपनी पहचान चाहते हैं : संजीव महतो
आजसू के केंद्रीय सदस्य संजीव महतो सरना धर्म कोड के खिलाफ नहीं है. इनका मानना है कि अगर अन्य धर्मो की तरह आदिवासी भी अपनी अलग पहचान चाहतें हैं तो इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए. लेकिन यह राजनीतिक हथकंडा नहीं बनना चाहिए.
सरना धर्म कोड की मांग पुरानी है : कुंदन
कांग्रेस के महासचिव कुंदन ठाकुर कहतें हैं कि आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड की मांग बहुत पुरानी है. जब राज्य सरकार ने इसे विधानसभा से पास कर भेज दिया है तो केंद्र सरकार को भी अपनी ओर से आपत्ति नहीं करनी चाहिए.
केंद्र को मुहर लगानी चाहिए : प्रेमनंदन मंडल
झामुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल ने कहा कि प्रदेश की हेमंत सरकार ने अच्छी पहल की है. विधानसभा से पास कर इसे भेजा गया है. इसपर केंद्र सरकार को अपनी मुहर लगानी चाहिए.
आदिवासियों को आरक्षण का मिल सकेगा पूरा लाभ : वीरू हांसदा
भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष वीरू हांसदा ने कहा कि आदिवासी कहीं भी खतरे में नहीं है. सरना धर्म कोड लागू होने पर आदिवासियों को आरक्षण का पूरा लाभ मिल सकेगा. इससे अन्य जाति व समुदाय के द्वारा की जा रही आदिवासियों की हकमारी बंद होगी. इस मुद्दे का ज्यादा बड़ा राजनीतिक असर नहीं पड़ेगा. सरना धर्म कोड लागू होने पर आने वाले चुनाव में भाजपा को लाभ भी मिलेगा. क्योंकि पढ़ी-लिखी जनता को बरगलाने और दिग्भ्रमित करने का हेमंत सरकार का प्रयास सफल नहीं होगा.
सरना धर्म कोड लागू नहीं हुआ तो संथाली समाज होगा विलुप्त हो जाएगा: अनिल टुड्डू
सोनेत संथाल समाज के सेक्रेटरी अनिल टूडू का कहना है कि झारखंड में सरना धर्म कोड का लागू होना अति आवश्यक है. धर्म कोड अगर लागू नहीं होता है तो आने वाले 25 से 30 वर्षों के बाद संथाली समाज भी बिरहोर जाति की तरह विलुप्ति के कगार पर आ जाएगा. उनका कहना है कि आज भी जनगणना में हमारी जाति के आगे हिंदू लिखा जाता है, जबकि हम सरना धर्म के मानने वाले हैं. सरना धर्म हमारी पहचान है, जो धीरे धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रहा है.
मुख्यमंत्री ने आदिवासियों के हित में उठाया साहसिक कदम: ईश्वर मरांडी
झामुमो की जिला समिति के सदस्य ईश्वर मरांडी का कहना है कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक हैं. हमलोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते हैं. इसलिए अलग सरना कोड लागू होना ही चाहिए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासियों के हित में साहसिक कदम उठाया है. राष्ट्रपति को बिना देर किए इसे लागू करना चाहिए. इस पर सवाल वैसे लोग खड़ा कर रहे हैं, जिन्हें आदिवासियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है.
कोड लागू हो, राजनीति नहीं हो : अरुण सहाय
कम्युनिस्ट पार्टी के वरीय नेता कामरेड अरुण सहाय का कहना है कि सरना धर्म कोड निश्चित तौर पर लागू किया जाना चाहिए. लेकिन जिस प्रकार हेमंत सोरेन की सरकार इसका राजनीतिक लाभ लेना चाह रही है वैसा नहीं हो. इसे बुद्धिजीवियों की राय लेकर बनाई जानी चाहिए.
कोड की मांग सिर्फ राजनीतिक है : राजीव
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव मेहता ने कहा कि आदिवासी हिंदू समाज का ही अंग है. परंपरा रीति-रिवाज पूजा पद्धति सब हिन्दू धर्म से ही मेल खाते हैं. ऐसे में सरना धर्म कोड की मांग सिर्फ राजनीतिक है. इस पर सभी बुद्धिजीवियों से राय लेकर पुनर्विचार कर ही लागू किया जाना चाहिए.
भाजपा ही आदिवासियों की हितैषी है: पंकज सिंह
भाजपा महामंत्री पंकज सिंह ने कहा कि भाजपा आदिवासियों की हितैषी है. केंद्र में भाजपा की सरकार के कार्यकाल में ही अलग झारखंड राज्य की स्थापना हुई थी. 15 नवंबर को नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है. भाजपा ने आदिवासी और जनजातीय समुदाय के हितों को सबसे ऊपर रखा है.आज देश के कई महत्वपूर्ण पदों पर जनजातीय समुदाय के लोग हैं. सरना धर्मकोड झारखंड सरकार का मामला है. लेकिन हर मौके पर इसे मुद्दा बनाना ठीक नहीं है. भाजपा इस पर गंभीरता से विचार कर रही है.
सरना धर्मकोड हमारा अधिकार है: विनोद उरांव
जिला परिषद, लातेहार के सदस्य विनोद उरांव ने कहा कि बगैर आदिवासियों के झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती है. सरना धर्मकोड आदिवासियों का अधिकार है. केंद्र सरकार को इस मांग को पूरा करना चाहिए. इसे लटका कर रखने से आदिवासियों का अहित हो रहा है. आदिवासी आज अपनी अस्मिता बचाये रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं. जबकि झारखंड की जल जंगल एवं भूमि पर आदिवासियों का हक है. हमारे पूर्वजों ने इसे खून दे कर सींचा है. इसलिए हमें हमारा हक तो मिलना ही चाहिए. इसका सभी को समर्थन करना चाहिए.
आजसू पार्टी भी चाहती है सरना धर्म कोड लागू हो : अमित पांडेय
आजसू जिला अध्यक्ष अमित कुमार पांडेय ने कहा कि सरना धर्मकोड को विधानसभा से पारित करा कर केद्र सरकार के पास भेजा गया है. गेंद अब केंद्र सरकार के पाले मे है. आजसू चाहती है कि जितनी जल्दी हो झारखंड में सरना धर्मकोड लागू हो. यह आदिवासियों के हित में है. लेकिन झारखंड सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है. झारखंड की वर्तमान सरकार आदिवासियों की हितैषी बनने का नाटक करती है. अभी तक झारखंड के लिए स्पष्ट नियोजन नीति तक यह सरकार नहीं ला पायी है, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा.इसलिए इस दिशा में सरकार को कदम बढाना ही चाहिे.
कोड लागू करना भाजपा की जिम्मेदारी : कांग्रेस अध्यक्ष
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमारी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जो वादा किया था. वह हमारी सरकार ने कर दिया. चूंकि राज्य सरकार को सरना धर्म कोड नहीं देना है, अगर यह संभव होता तो यह भी हमारी सरकार कर देती. इसलिए आदिवासी विकास की बातें करने वाली भाजपा और उसकी केंद्र सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि वह अपना काम करे. केंद्र सरकार पर दबाव बनाए कि वह जल्द से जल्द केंद्र सरकार को कहे. अध्यक्ष ने कहा कि हमारी सरकार ने डेढ़ वर्ष पहले ही सरना धर्म कोड प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार के पास भेज दिया.
हमने अपना काम किया, अब केंद्र की है जिम्मेदारी :सुप्रियो
झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हमने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में सरना धर्म कोड देने का वादा किया था. इसके तहत ही झामुमो नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन सरकार ने इस प्रस्ताव को पास कर केंद्र के पास भेज दिया. अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास लंबित है. इसलिए अब सारा दारोमदार भाजपा पर है. यहां भाजपा के 11 और आजसू के 1 सांसद हैं. इन सांसदों की जवाबदेही बनती है कि वह केंद्र सरकार पर दबाव बनाए. हमारे मुख्यमंत्री लगातार हर मोर्चे और फोरम से इसकी मांग केंद्र सरकार से कर रहे हैं.
कोड के मुद्दे पर गंभीरता से काम हो रहा है : रामकुमार
भाजपा एसटी मोर्चा के प्रभारी रामकुमार पाहन का कहना है किमंत सोरेन जो भी बयान देते हैं वह राजनीति से प्रेरित होकर देते हैं . उन्हें न तो जनजाति समाज से मतलब है न ही झारखंड की जनता से . राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने इस तरह का बयान देकर इसी का परिचय दिया है. जहां तक केंद्र सरकार की बात है तो इस मुद्दे पर काफी गंभीरता से काम किया जा रहा है. जल्द ही परिणाम सामने आ जाएगा. इसके लिए थोड़ा इंतजार करने की जरुरत है. भाजपा आदिवासी हित में बहुत सारा काम कर रही है.
राष्ट्रपति से सीएम की मांग स्वागत योग्य : काजल डॉन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता काजल डॉन ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा सरना धर्म कोड लागू करवाएं. यह स्वागत योग्य मांग है. झारखंड के आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड लागू होना अत्यंत आवश्यक है. यह मांग आज से नहीं, वर्षों से की जा रही है. इसे लागू कराने के लिए हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी प्रयासरत हैं, जिसके कारण उन्होंने राष्ट्रपति से भी मांग की है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सरना धर्म कोड लागू करना नहीं चाहती है.
सीएम की मांग का समर्थन करते हैं : तापस चटर्जी
कांग्रेस पार्टी मनरेगा विभाग के जिला अध्यक्ष तापस चटर्जी कहते हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड लागू करने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी दिलाने का आग्रह किया है. यह शत-प्रतिशत जरूरी है कि झारखंड में सरना धर्म कोड लागू होना चाहिए. इसे सरकार जल्द लागू करे. भाजपा सरकार राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सरना धर्म कोड लागू नहीं करना चाहती है, परंतु हमारे मुख्यमंत्री ने जो मांग की है, बिल्कुल सही है. सरना धर्म कोड लागू होना चाहिए. इससे आदिवासी समाज सुरक्षित महसूस करेगा. साथ ही समाज को एक पहचान मिल जाएगी.
सरना धर्म कोड लागू होना ही चाहिए : प्रकाश जायसवाल
राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश जायसवाल कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि केंद्र से सरना धर्म कोड लागू कराएं. सरना धर्म कोड लागू होना अलग बात है. परंतु किसी भी धर्म कोड को प्रक्रिया के तहत लागू किया जाता है. सरना धर्म के तरह इस राज्य में और कई धर्म हैं. यदि सभी धर्मों का धर्म कोड लागू कर दिया जाए तो कहीं न कहीं परेशानी का सबब बन सकता है. सरकार में रहते हुए यह जरूरी नहीं कि सरकार की हर मांग का समर्थन किया जाए. वैसे सरकार को इस ओर शीघ्र कदम बढ़ाना चाहिए.
सरना धर्म कोड की मांग अनुचित : राकेश मिश्रा
भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी राकेश मिश्रा कहते हैं कि सरना और सनातन में कोई फर्क नहीं है. रामायण और महाभारत काल पूर्व से भी भारत भूमि पर हमारा सह अस्तित्व रहा है. इतिहास में इन दो सभ्यताओं के टकराव का कहीं कोई जिक्र नहीं है. जिक्र है तो मुगलों के खिलाफ, अंग्रेजों के खिलाफ, चर्च के खिलाफ, बाहरी शक्तियों के खिलाफ टकराव का. मेरे ख्याल से सरना धर्म सनातन धर्म का ही हिस्सा है, ऐसे में अलग से सरना कोड की मांग अनुचित है. वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास से खिलवाड़ कर सरना को सनातन से अलग बताने का षड्यंत्र किया है.
कोड लागू होने से ईसाई कमजोर होंगे : बाबू तांती
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता बाबू तांती कहते हैं कि ईसाई मिशनरियों का षड्यंत्र है, सरना धर्म को बढ़ावा नहीं देने में. चूंकि सरना धर्म और कोड लागू होने से ईसाई कमजोर होंगे. इससे जो ईसाई के साथ आदिवासी होने का लाभ ले रहे हैं, इसमें कमी आएगी. मेरे ख्याल से सरना कोड लागू होना चाहिए. हमारे आदिवासी भाइयों को इस कड़वी सच्चाई को समझना होगा. सरना धर्म कोड के लागू होने से आदिवासियों को उनकी पहचान मिलेगी. इस दिशा में सभी को पहल करना चाहिए.
आदिवासी समाज धर्म के प्रति आजादी चाहता है : पितोवास
झामुमो नेता पितोवास प्रधान कहते हैं कि सभी धर्म के लोगों को अपने धर्म के प्रति निष्ठावान होना चाहिए. आदिवासी समुदाय भी अपनी हक और धर्म के प्रति आजादी चाहता है. मेरी सरकार से आग्रह है कि आदिवासियों की मांग पर विचार करते हुए सरना कोड को लागू करना चाहिए. वैसे भी हिन्दू धर्म में सिख धर्म अलग है और उसकी अलग पहचान है. तो आदिवासियों को उनके धर्म की स्वतंत्रता दे देनी ही चाहिए. इससे उनकी पहचान भी बनी रहेगी.साथ ही आदिवासियों का वजूद भी सुरक्षति हो जाएगा. [wpse_comments_template]
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