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संताल परगना में कोई आदिवासी नेता सीएम के योग्य नहीं था क्या : लोबिन हेम्ब्रम

 
  • बाहरी नेता जेएमएम में सर्वेसर्वा बने हुए हैं
  • बिहार के लोग यहां बन रहे मंत्री
Godda : दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संथाल परगना कार्यक्षेत्र रहा है. संताल परगना से ही उनकी पहचान बनी है और संथाल क्षेत्र से ही वह चुन कर एमपी-एमएलए बने हैं. शिबू सोरेन हो या उनके पुत्र निवर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, संताल परगना के आदिवासी भाई-बहनों ने ही इस सोरेन परिवार को आगे बढ़ाया है, लेकिन जब भी कुछ देने की बात आती है तो यह सोरेन परिवार संथाल परगना की उपेक्षा कर देता है. संताल परगना में सीएम बनने की योग्यता रखने वाला कोई आदिवासी नेता नहीं था क्या जो कोल्हान क्षेत्र से लाकर थोप दिया गया. उक्त बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के बोरिया विधायक लोबिन हेम्ब्रम शुक्रवार को अपने विधानसभा क्षेत्र में मीडिया से बात करते हुए कही. उन्होंने कहा कि मैंने कई बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर कहा था कि इन बाहरी लोगों के चक्कर में नहीं फंसो, मगर उल्टे हम ही को कहते हैं आप उल्टा पुल्टा बयान देकर सरकार की छवि खराब करते हैं. सीएम साहब जेल चले गए, इसका हमें दुख है. अगर मेरी बात को समय रहते मान लेते तो आज यह दिन देखना नहीं पड़ता. बिहार से आकर मिथिलेश ठाकुर यहां मंत्री बन गया और झारखंडी लोग बाहर ही रह गए. उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम इन बाहरी लोगों से मुक्ति दिलानी होगी, तभी हमारे अलग राज्य का सपना साकार होगा, तभी हम आदिवासी गरीब की भलाई कर पाएंगे. आईएएस अधिकारियों ने जमीन घोटाला करके सीएनटी और एसपीटी कानून का मखौल उड़ा दिया. आईएएस अधिकारियों ने इस राज्य को अपने जेब की संस्था बना लिया है. इसी का नतीजा है कि आज झारखंड पूरी तरह से बर्बाद हो रहा है. सरकार को वोट देने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जब वोटिंग का समय आएगा, तब देखा जाएगा. इसे भी पढ़ें : हेमंत">https://lagatar.in/hemant-sorens-tenure-was-excellent-champai-soren/">हेमंत

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