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बंजर भूमि विकास बोर्ड 48 दिन रहा ठप, अब अशोक कुमार को मिली प्रधान मुख्य वन संरक्षक की जिम्मेवारी

झारखंड में बंजर भूमि विकास बोर्ड का काम लगभग 48 दिनों तक ठप रहा, क्योंकि बोर्ड में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई थी. इस कारण चार दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं फॉरेस्ट क्लियरेंस के अभाव में अधर में लटकी रहीं. हालांकि, सरकार ने 15 सितंबर की रात अधिसूचना जारी कर अशोक कुमार को इस पद की जिम्मेवारी सौंप दी है. अब उम्मीद की जा रही है कि रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी.
 
  • चार दर्जन से अधिक विकास परियोजनाएं फॉरेस्ट क्लियरेंस के इंतजार में

Ranchi :  झारखंड में बंजर भूमि विकास बोर्ड का काम लगभग 48 दिनों तक ठप रहा, क्योंकि बोर्ड में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई थी. इस कारण चार दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं फॉरेस्ट क्लियरेंस के अभाव में अधर में लटकी रहीं. हालांकि, सरकार ने 15 सितंबर की रात अधिसूचना जारी कर अशोक कुमार को इस पद की जिम्मेवारी सौंप दी है. अब उम्मीद की जा रही है कि रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी. 

 

1 अगस्त से रिक्त था पद

बोर्ड के तत्कालीन पदाधिकारी शशि सम्मता 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए थे. उनके रिटायरमेंट के बाद से 15 सितंबर तक कोई भी अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त नहीं किया गया. 

 

कई विकास परियोजनाएं अटकीं

डेढ महीने तक पद रिक्त होने से चार दर्जन से अधिक विकास परियोजनाओं की फॉरेस्ट क्लियरेंस अटकी हुई है. इनमें टाटा स्टील नौमुंडी, वाराणसी–कोलकाता नेशनल हाईवे (हजारीबाग व रामगढ़ हिस्से), गोड्डा कॉलेज, सीसीएल, कई फोर लेन लड़क, एनटीपीसी कहलगांव, गिरिडीह रिंग रोड, लातेहार परियोजनाएं और गिरिडीह टाउन बाईपास जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं. इनमें से कई योजनाएं उद्योग, परिवहन और शिक्षा से जुड़ी हैं, जिनके रुकने से राज्य के विकास और निवेश माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ा है. 

 

बोर्ड की अहम भूमिका

बंजर भूमि विकास बोर्ड का कार्य वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत इस तरह योजनाएं संचालित करना होता है कि वन पारिस्थितिकी तंत्र पर उसका न्यूनतम प्रभाव पड़े. लेकिन डेढ़ माह तक पद खाली रहने से न सिर्फ राज्य की विकास परियोजनाएं प्रभावित हुई, बल्कि उद्योग और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अनिश्चितता भी बढ़ी.

बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारियां

  • - फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्रस्तावों का शीघ्र और सावधानीपूर्वक निपटारा. 
  • - गैर-वनीय कार्यों के लिए वन भूमि उपयोग को न्यूनतम करना. 
  • - सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों के आलोक में वन उपयोग से जुड़े प्रावधानों का अनुपालन करना.
  • - उपयोगकर्ता एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत फॉरेस्ट क्लियरेंस प्रस्तावों का सावधानीपूर्वक और शीघ्र निपटान करना. 

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