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जलस्तर घटा, सूखने लगे तालाब

  • सूरत-ए हाल : नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर में  48 तालाब, गायब हो गये 14 तालाब 
  • बाउंड्री की वजह से बारिश का बहता पानी नहीं पहुंच पाता तालाबों में
  • तालाबों के वाटर रिचार्ज की व्यवस्था नहीं, बारिश के भरोसे हैं तालाब
Tarun Kumar Choubey  Ranchi :  ठंड के जाते और बसंत के आगमन होने के साथ ही शहर के कुछ तालाबों का जलस्तर घट गया है. इनमें से कुछ तो सूखने भी लगे हैं. शहर के छह तालाबों का जलस्तर फरवरी में काफी कम हो गया है. अन्य तालाबों का जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है. ऐसी ही स्थिति रही तो मार्च आते-आते कई तालाब सूख जायेंगे. शहर में बेतरतीब हो रही बोरिंग व गाद नहीं निकाले जाने के कारण तालाब या तो सूखते जा रहे हैं या उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ सालों में झारखंड का औसत तापमान बढ़ा चुका है. रही सही कसर कम बारिश पूरी कर देता है. कुछ दशक पहले तक रांची को झीलों-तालाबों का शहर कहा जाता था. लेकिन अब पूरे शहर में गिने-चुने तालाब ही बचे हैं. जो तालाब बचे हैं, उनमें से कुछ का सौंदर्यीकरण किया जा चुका है, जबकि कुछ अस्तित्व संकट के दौर से गुजर रहे हैं. वैसे भी नगर निगम की रिकॉर्ड से 14 तालाब गायब हो चुके हैं.

तालाब का जलस्तर तेजी से हो रहा कम

शहर के चुटिया स्थित खिजुरिया तालाब, गाड़ीखाना का पाहन टोली तालाब, हरमू का चाला नगर तालाब और हेहल तालाब की हालत खराब है. इन तालाबों का जलस्तर फरवरी के आखिरी सप्ताह में ही कम हो गया है. यों कहा जाये कि ये तालाब धीरे-धीरे सूख रहे हैं. संभव है कि मार्च में ये तालाब पूरी तरह से सूख जायें. ये तो बेमौसम बारिश का असर है कि तालाब अब तक सूखे नहीं हैं. बारिश ने तालाबों की लाज रख ली है. तालाबों के आसपास घास और लंबी-लंबी झाड़ियां उग आयी है. कोकर के तिरिल और भाभानगर तालाब, बरियातू यूनिवर्सिटी कॉलोनी का तालाब, कडरू स्थित हज हाउस के पीछे का तालाब समेत लगभग आठ तालाब सूखने के कगार पर पहुंच चुके हैं.

करोड़ खर्च करने पर भी हालत नहीं सुधरी

शहर के तालाबों को संवारने के नाम पर हर साल सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है. कुछ प्रमुख तालाबों को छोड़ दिया जाये तो अन्य सभी तालाबों की हालत खास्ता है. शहर के तालाबों को बचाने और वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए कई बार तालाबों का गहरीकरण किया गया है, लेकिन गर्मी में तालाब सूख ही जाते हैं. गर्मी शुरू होते ही शहर के कई तालाबों का जलस्तर कम हो गया है, कई अस्तित्व खोने की कगार पर हैं. तालाबों का जलस्तर कम होने और सूखने के कारण शहर का ग्राउंड वाटर लेवल भी नीचे चला गया है.

भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने में तालाबों की अहम भूमिका

विशेषज्ञ बताते हैं कि भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने में तालाबों की अहम भूमिका रहती है. सरकारी रिकार्ड के अनुसार, रांची में 48 तालाब हैं, लेकिन तालाब और पोखर के आस-पास के इलाकों में भी अंडरग्राउंड वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है. नगर विकास विभाग तालाबों के सौंदर्यीकरण पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ती जा रही है. तालाबों के वाटर रिचार्ज के लिए ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है. शहर के तालाब-जलाशय बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं.

70 के दशक में शहर में थे 150 से ज्यादा तालाब

रांची नगर निगम के अनुसार, 1970 तक शहर में 150 से अधिक तालाब थे. लेकिन जैसे-जैसे शहर का विस्तार होता गया, तालाबों की संख्या घटती गयी. शहर के कई तालाबों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया. कुछ तालाबों को भू-माफियायों ने बेच डाला और वहां बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गयीं. नगर निगम के आंकड़े पर यकीन करें तो फिलहाल निगम क्षेत्र में 48 छोटे-बड़े तालाब हैं. इनमें से मात्र 10 तालाबों की बंदोबस्ती ही निगम द्वारा की जाती है.

तालाबों की घेराबंदी से बारिश का पानी स्टोर होता ही नहीं

निगम ने कुछ सार्वजनिक तालाबों के चारों ओर चहारदीवारी और प्लेटफार्म का निर्माण सांसद और विधायक कोष से कराया है, लेकिन चहारदीवारी के कारण तालाबों में बारिश का पानी ढंग से नहीं पहुंच पाता है. बरसात के दिनों में सड़कों का पानी तालाब में स्टोर होता था, लेकिन बाउंड्री हो जाने के बाद पानी बेकार बह जाता है. वहीं कई तालाबों में चहारदीवारी की बजाय जमीन से ऊंचा कंक्रीट का प्लेटफार्म बना दिया गया है, जिससे बरसात का पानी तालाब तक पहुंच ही नहीं पा रहा है.

निगम के रिकॉर्ड से गायब हुए ये तालाब

निगम के अधिकारियों की मानें तो उसके रिकॉर्ड से शहर के कई तालाब गायब हो गये हैं. इनमें चुटिया तालाब, देवी मंडप तालाब, एदलहातू तालाब, हेसल बस्ती तालाब, वसुंधरा तालाब, गोसाईं तालाब, तिरिल तालाब, भाभानगर तालाब, यूनिवर्सिटी कॉलोनी तालाब, हज हाउस के पीछे का तालाब, पुंदाग बस्ती तालाब, एलआईजी तालाब और नायक टोली तालाब शामिल हैं. [wpse_comments_template]

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