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26 करोड़ की जलापूर्ति योजना लटकाई

 पेयजल विभाग से डिबार शिल्पी कंस्ट्रक्शन कंपनी अब ब्लैकलिस्टेड होगी Amit Singh Ranchi : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने शिल्पी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने की तैयारी शुरू कर दी है. कंपनी पर निर्धारित समय के अंदर जलापूर्ति योजना का काम पूरा नहीं करने का आरोप है. 2016 में कंपनी को रांची के टाटीसिलवे पंचायत में 26 करोड़ की जलापूर्ति योजना का काम स्वीकृत हुआ था. शिल्पी कंस्ट्रक्शन को इस योजना का काम 2019 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पश्चिम प्रमंडल के तहत मिला था. योजना का काम ढाई साल में पूरा करना था. मगर कंपनी ने अबतक योजना का काम पूरा नहीं किया है. विभाग की तरफ से कंपनी पर काम जल्द पूरा करने का दबाव बनाया गया, तो कंपनी ने नियम विरुद्ध एडवांस राशि मांगी. इसके बाद विभाग ने कंपनी को ब्लैकलिस्तैटेंड करने की तैयारी शुरू कर दी है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथलेश ठाकुर ने कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने पर सहमित जता दी है.

मंत्री की स्वीकृति मिलते ही कंपनी को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू हुई

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री की सहमति मिलने के बाद मुख्यालय स्तर पर कंपनी को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. वहीं दूसरी तरफ शिल्पी कंस्ट्रक्शन कंपनी को काली सूची में डाले जाने से बचाने के लिए पेयजल विभाग के आला इंजीनियर लगे हुए हैं. कंपनी को टाटीसिलवे पंचायत के तहत टाटी पश्चिम, टाटी पूर्वी, महिलौंग सहित 11 कॉलोनी के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था. मगर कंपनी की लापरवाही की वजह से चार साल गुजर जाने के बाद भी लोगों को करोड़ों की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

कंपनी ने काम अधूरा छोड़ा, नहीं शुरू हो सकी जलापूर्ति

शिल्पी कंस्ट्रक्शन ने अनोखा काम किया है. टाटीसिलवे जलापूर्ति योजना के तहत स्वर्णरेखा नदी में शंप बनाने, दो ओवर हेड वाटर टैंक बनाने, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने सहित जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन भी बिछानी थी. लेकिन कंपनी ने आधा अधूरा काम किया. नदी में शंप बना कर, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछा तो दी, लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से ओवरहेड वाटर टैंक तक पाइप नहीं बिछायी, जिस वजह से शंप, ट्रीटमेंट प्लांट ओर ओवर हेड टैंक बनने के बाद भी जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी.

विभाग कंपनी को पहले ही कर चुका है डिबार

पेयजल विभाग शिल्पी कंस्ट्रक्शन को पहले ही डिबार कर चुका है. कंपनी को बगोदर प्रखंड में बगोदरडीह ग्रामीण जलापूर्ति योजना का काम मिला था. योजना को 2017 में स्वीकृति मिली थी. इस योजना के तहत दो जलमीनार का निर्माण किया जाना था. जोन-1 के जलमीनार के स्थल को लेकर विवाद होने के कारण नए स्थल का चयन कर जलमीनार का निर्माण कराया गया. पाइपलाइन की टेस्टिंग का काम पूरा हुआ. मगर योजना का शतप्रतिशत काम कंपनी ने नहीं किया. पेयजल विभाग ने कंपनी को योजना का कार्य समय से पूर्ण नहीं करने के कारण विभागीय निविदाओं में भाग लेने से वंचित करते हुए एक वर्ष तक के लिए निलंबित (डिबार) कर दिया. इसकी जानकारी पेयजल विभाग में 22 मार्च 2022 को विधानसभा में दी थी. इसे भी पढ़ें पद">https://lagatar.in/cip-director-dr-basudev-das-removed-from-post/">पद

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