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वायनाड भूस्खलन : लापता लोगों की तलाश पांचवें दिन भी जारी, बचाव अभियान में जुटे 1,300 बचावकर्मी

  • वायनाड में बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी
  • मलबे में लोगों की तलाश में जुटे 1,300 से अधिक बचावकर्मी
 Wayanad : केरल के वायनाड में 30 जुलाई को आये भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इस घटना में अब तक 210 लोगों ने जान गंवायी है. वहीं 273 लोग घायल हुए हैं. वहीं अब भी करीब 300 लोगों के लापता होने की आशंका है. राहत बचाव टीम पाचवें दिन शनिवार को भी लापता लोगों की तलाश में जुटी है. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए 1,300 से अधिक बचावकर्मियों, भारी मशीनों और अत्याधुनिक उपकरणों को क्षेत्र में तैनात किया गया है.  तलाश एवं बचाव अभियान के संचालन में विशेषज्ञता रखने वाली निजी कंपनियां और स्वयंसेवक भी सेना, पुलिस और आपातकालीन एजेंसियों के नेतृत्व वाले अभियान में हिस्सा ले रहे हैं. मलबे में लोगों की तलाश के लिए हाइटेक डिवाइसेज और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है. वहीं क्षेत्र में बड़ी संख्या में चिकित्सक और एंबुलेंस तैनात की गयी है.

भारी बारिश के कारण आया था भूस्खलन 

बता दें कि वायनाड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ था. इसकी वजह से मुंडक्कई, चूरलमाला सहित विभिन्न पहाड़ी इलाकों में स्थित घरों में बड़ी संख्या में पत्थर और पेड़ गिरे थे. भूस्खलन होने के कारण कई लोग मलबे में दब गये थे. राहत-बचाव टीम ने कुछ लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया. वहीं कुछ की मलबे में दबने से मौत हो गयी. जबकि अभी भी कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. आवासीय क्षेत्रों में पत्थर और पेड़ गिरने ते कारण मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने में मुश्किल हो रही है.

जिला प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में किया विभाजित 

जिला प्रशासन ने इससे पहले शुक्रवार को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में विभाजित किया था. जीपीएस की मदद से उन संभावित जगहों का मानचित्रण किया था, जहां बचाव कार्य की जरुरत है. हवाई मार्ग से तस्वीरें ली थीं और सेल फोन का लोकेशन डेटा एकत्र किया था. वहीं सेना का बनाया 190 फुट लंबा बेली पुल गुरुवार को वायनाड जिला प्रशासन को सौंपा गया था. बेली पुल की मदद से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भारी मशीनें और एंबुलेंस भेजा गया. वायनाड, मलप्पुरम और कोझिकोड जिलों से होकर बहने वाली चालियार नदी के 40 किलोमीटर के इलाके में भी बचाव अभियान जारी है. इस नदी और उसके किनारों से सौ से अधिक शव और शरीर के अंग बरामद किये गये हैं. [wpse_comments_template]

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