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पश्चिम बंगालः MP-MLA गदगद, ममता व भाजपा नेताओं का डब्बा गोल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार, भाजपा की जीत, टीएमसी में टूट. यही तीन खबरें सुर्खियों में हैं. लेकिन थोड़ा भीतर देखें, तो पता चलता है कि टीएमसी के सांसद-विधायक तो गदगद हो रहे. नुकसान हुआ तो सिर्फ ममता बनर्जी और भाजपा के नेताओं का.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार, भाजपा की जीत, टीएमसी में टूट. यही तीन खबरें सुर्खियों में हैं. लेकिन थोड़ा भीतर देखें, तो पता चलता है कि टीएमसी के सांसद-विधायक तो गदगद हो रहे. नुकसान हुआ तो सिर्फ ममता बनर्जी और भाजपा के नेताओं का.


तथ्यों पर गौर करें. टीएमसी टूटने से पहले के बागी गुट की बैठक भाजपा नेताओं के घर पर हुआ. वीडियो जारी हुआ. अखबारों में फोटो छपे. बयान आये. फिर पार्टी टूट गई. पार्टी के 28 में से 20 सांसद टूट गए. 80 विधायकों में से 58 ने दूसरी पार्टी की सदस्यता ले ली. 


यह जो दूसरी पार्टी है, उसका नाम है नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI). दो साल पहले बनी इस पार्टी में 58 विधायक शामिल हो गये. यह पार्टी भाजपा को समर्थन दे रही है. राज्य में विधानसभा में और केंद्र में लोकसभा में. टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए. इसके विधायक अब राज्य में भाजपा के साथ मिल कर टीएमसी से लड़ेगी. और इसके सांसद केंद्र में भाजपा को एजेंडे को सपोर्ट करेंगे.


अब इसे समझिये. जो नेता विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तक ये 20 सांसद, 58 विधायक और तीन राज्यसभा सदस्य किनके साथ थे? टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ. अब किनके साथ हैं? भाजपा के सहयोगी दल के रुप में. यानी टीएमसी के साथ रहे पश्चिम बंगाल के 81 नेता ने खुद को सुरक्षित कर लिया है. उन्हें अब न तो जांच एजेंसियों का डर है ना अंडों की. 


इन 81 नेताओं की हर गतिविधि पहले की तरह चल रहा है और चलता रहेगा. इसके साथ ही उनके विधानसभा और संसदीय क्षेत्र में उनके कार्यकर्ताओं की ही चलेगी. ऐसे में नुकसान किसका होगा? संबंधित क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं का. 


तो फिर नुकसान किसका हुआ? टीएमसी लगभग खत्म हो गई. ममता बनर्जी का राजनीतिक अंत हो गया. इसके साथ ही उन भाजपा नेताओं का भी डब्बा गोल हो गया, जो इन 81 नेताओं के खिलाफ अपने-अपने इलाके में लड़ रहे थे. संभव है, आगे चल कर इन 81 नेताओं में से कुछ को राज्य और केंद्र में मंत्री पद भी मिले. यह नुकसान किसका होगा? जवाब है भाजपा के सांसद-विधायक का. यह सच में अभूतपूर्व है.

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