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एक पत्रकार व NDTV को झुकाने के लिए क्या-क्या नहीं किया!

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ 2016 में जारी किए गए आयकर पुनर्मूल्यांकन (reassessment) नोटिस को रद्द कर दिया है.
 

Sheetal P Singh

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ 2016 में जारी किए गए आयकर पुनर्मूल्यांकन (reassessment) नोटिस को रद्द कर दिया है. यह फैसला 19 जनवरी 2026 को आया, जिसमें कोर्ट ने आयकर विभाग पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह मामला NDTV के प्रमोटर RRPR Holding Pvt Ltd से जुड़े कुछ लेन-देन से संबंधित था.

 

प्रणय रॉय और राधिका रॉय NDTV (न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड) के संस्थापक हैं. RRPR Holding Pvt Ltd कंपनी NDTV की प्रमोटर कंपनी है, जिसमें रॉय दंपति की प्रमुख हिस्सेदारी है.

 

इस मामले की जड़ 2009-10 के मूल्यांकन वर्ष से जुड़ी है, जब आयकर विभाग ने RRPR Holding को दिए गए कुछ ब्याज-मुक्त ऋण (interest-free loans) को लेकर जांच की थी. विभाग का आरोप था कि इन लेन-देन में आय को छिपाया गया था और इससे संबंधित कर (टैक्स) चुकाया जाना चाहिए था. पहले दौर में इन लेन-देन की जांच हो चुकी थी और मूल्यांकन पूरा हो गया था.

 

 

मोदी सरकार के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद 2016 में मार्च महीने में आयकर विभाग ने पुनर्मूल्यांकन नोटिस जारी किए, जिसमें इन्हीं लेन-देन को दोबारा खोलने की कोशिश की गई. प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने इसे चुनौती देते हुए 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका मुख्य तर्क था कि यह कानून के खिलाफ है, क्योंकि एक ही तथ्य और सामग्री पर मूल्यांकन को दूसरी बार दोबारा खोलने (second reopening) की अनुमति नहीं है.

 

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस दिनेश मेहता और विनोद कुमार) ने याचिका स्वीकार कर ली.

 

कोर्ट ने जो माना है - 
 
- 2016 के नोटिस कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं थे.
 
- यह पहले पूर्ण हुए मूल्यांकन को अनुचित तरीके से दोबारा खोलने की कोशिश थी.
 
- सभी संबंधित आगे की कार्यवाही भी रद्द कर दी गई.

 

कोर्ट ने आयकर विभाग की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से एक लाख रुपये प्रणय रॉय और एक लाख रुपये राधिका रॉय को देने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि यह राशि प्रतीकात्मक (token) है, क्योंकि वास्तविक मुआवजा इससे ज्यादा हो सकता था, लेकिन विभाग की गलती के लिए यह जरूरी था.

 

 

यह फैसला NDTV के संस्थापकों के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से विभिन्न जांचों और कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे. दरअसल उन्हें ऐसी ही दूसरी ऐजेंसियों की कार्रवाई के दबाव में NDTV को अड़ानी ग्रुप के हाथ बेचना पड़ा था. विस्तृत फैसले (detailed judgment) का इंतजार है, लेकिन तत्काल प्रभाव से ये नोटिस और कार्यवाही खत्म हो गई हैं.


डिस्क्लेमर :  लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया से साभार लिया गया है.

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