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आखिर क्या इशारा कर रहे हैं मंत्री राधाकृष्ण किशोर!

पार्टी के खिलाफ बागी तेवर. सुरक्षा लौटाना. फिर सरकारी गाड़ी घर पर छोड़ कर निजी वाहन से मंत्रालय जाना. यह सब करके वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर क्या इशारा कर रहे हैं! वह सरकार और पार्टी को अपने इशारे पर चलाना चाहते हैं या सरकार व पार्टी से अलग रास्ते पर चल कर खुद को सबसे जुदा साबित करना चाह रहे हैं.
 

Ranchi: पार्टी के खिलाफ बागी तेवर. सुरक्षा लौटाना. फिर सरकारी गाड़ी घर पर छोड़ कर निजी वाहन से मंत्रालय जाना. यह सब करके वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर क्या इशारा कर रहे हैं! वह सरकार और पार्टी को अपने इशारे पर चलाना चाहते हैं या सरकार व पार्टी से अलग रास्ते पर चल कर खुद को सबसे जुदा साबित करना चाह रहे हैं. 


उनका कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलना और दो दिन बाद वित्त मंत्री के इस्तीफे की चर्चा का धुआं उठना. यह सब सोची समझी रणनीति है या एक बार जब अलग रास्ते चल निकले तो वापसी मुश्किल होने की कशमकश. वह ना तो सरकार को गुड बाय बोल रहे हैं, ना पार्टी को अलविदा. लेकिन तेवर बता रहा है कि या तो उनसे लेकर बाहर किया जायेगा या वो देकर बाहर हो जाएंगे. बात चाहे जो भी हो, मामला ऊपर से जितना दिखाया, बताया जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा है. 


पिछले हफ्ते उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को वापस कर सनसनी फैला दी थी. बाद में एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने डीजीपी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. आज (10 जुलाई को) सुबह सोशल मीडिया व खबरिया न्यूज पोर्टल्स पर खबर चली कि उन्होंने सरकारी गाड़ी वापस कर दी है. हालांकि उनके सूत्रों ने बाद में क्लियर किया कि ऐसा नहीं है. सरकारी गाड़ी घर पर है, वह तो बस अपने निजी वाहन से मंत्रालय गए थे.


उल्लेखनीय है कि पिछले करीब डेढ़ माह से राधा कृष्ण किशोर सुर्खियों में हैं. कभी संगठन के खिलाफ बागी तेवर को लेकर तो कभी अपने विभाग व पुलिस विभाग से नाराजगी को लेकर. वह लगातार बागी तेवर अपनाये हुए हैं. पहले संगठन के खिलाफ खुलकर बोल रहे थे और बाद में सरकार व सिस्टम के खिलाफ भी.

बहरहाल मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद ही 9 जुलाई को उनका एक बयान भी आया, तो 10 जुलाई को अखबारों में पढ़ने को मिला. जिसमें उन्होंने कहा है कि वह सूरज के ऊपर घर बनाकर छाया की उम्मीद करने वालों में से नहीं हैं. इस बयान के भी अलग मायने निकाले जा रहे हैं.

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