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क्या है रेड कॉर्नर नोटिस, और कैसे झारखंड में वसूली नेटवर्क चलाते हैं गैंगस्टर राहुल दुबे और राहुल सिंह?

अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच से पता चलता है कि दोनों गैंगस्टर देश के बाहर रहकर स्थानीय अपराधियों को निर्देश देते हैं. उनके नेटवर्क में स्थानीय गिरोह के सदस्य, शूटर और अवैध हथियार सप्लायर शामिल हैं, जो उनकी ओर से काम करते हैं. उनके मुख्य निशाने पर व्यवसायी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियां होती हैं.
 
30 अक्टूबर को रांची में राहुल दुबे गैंग के साथ हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस अधिकारी.

Lagatar Desk: विदेश से खौफनाक गैंग चलाने वाले गैंगस्टर प्रिंस खान के बाद झारखंड के दो और कुख्यात गैंगस्टर राहुल दुबे और राहुल सिंह इन दिनों अपराध जगत में सुर्खियों में हैं. विदेश में बैठकर झारखंड में गैंग चलाने वाले गैंगस्टर राहुल दुबे और राहुल सिंह के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है.

 

झारखंड एटीएस के प्रस्ताव पर सीबीआई के माध्यम से यह कार्रवाई की गई है. दोनों गैंगस्टर कथित तौर पर मलेशिया में रहकर स्थानीय गुर्गों के जरिए कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलते हैं. राहुल सिंह कुख्यात अमन साहू के मारे जाने के बाद उसका गिरोह संभाल रहा है. वहीं राहुल दुबे का गिरोह भी कई घटनाओं में शामिल रहा है.

 

झारखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि की है. इधर दोनों गैंगस्टर के नेटवर्क को तोड़ने के लिए झारखंड में अलग- अलग जिलों की पुलिस कार्रवाई करती रही है. हाल ही में रांची पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में राहुल दुबे गैंग के एक सदस्य को गोली लगी है. पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिसमें हथियार सप्लायर जियायुल हबीब भी शामिल है.

 

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फोटो में बाएं से राहुल सिंह और राहुल दुबे 

क्या है रेड कॉर्नर नोटिस?

रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल की ओर से जारी किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय अनुरोध है, जो दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई लंबित रहने तक अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने के लिए किया जाता है. यह अनुरोध करने वाले देश के न्यायिक अधिकारियों द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट या अदालती आदेश पर आधारित होता है. सदस्य देश किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का निर्णय लेते समय अपने-अपने कानूनों का पालन करते हैं.

 

इसमें दो मुख्य प्रकार की जानकारी शामिल है: वांछित व्यक्ति की पहचान करने के लिए आवश्यक जानकारी, जैसे कि उसका नाम, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, बालों और आंखों का रंग, तस्वीरें और यदि उपलब्ध हों तो उंगलियों के निशान. दूसरा- जिस अपराध के लिए उनकी तलाश की जा रही है, उससे संबंधित जानकारी, जो आमतौर पर हत्या, बलात्कार, बाल शोषण या सशस्त्र डकैती हो सकती है. इंटरपोल द्वारा किसी सदस्य देश के अनुरोध पर रेड नोटिस प्रकाशित किए जाते हैं, और इन्हें इंटरपोल के संविधान और नियमों का पालन करना आवश्यक है. रेड नोटिस इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका उपयोग हमारे सभी सदस्य देशों की पुलिस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित भगोड़ों के बारे में एक साथ सतर्क करने के लिए किया जाता है. 


जाहिर तौर पर झारखंड के इन दोनों गैंगस्टरों के खिलाफ कथित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई को राज्य में संगठित अपराध के विरुद्ध पुलिस की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

 

कैसे काम करते हैं दोनों गैंगस्टर

अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच से पता चलता है कि दोनों गैंगस्टर देश के बाहर रहकर स्थानीय अपराधियों को निर्देश देते हैं. उनके नेटवर्क में स्थानीय गिरोह के सदस्य, शूटर और अवैध हथियार सप्लायर शामिल हैं, जो उनकी ओर से काम करते हैं. उनके मुख्य निशाने पर व्यवसायी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियां होती हैं. बताया जाता है कि ये गैंगस्टर इन लोगों से 'प्रोटेक्शन चार्ज' (जिसे 'लेवी' भी कहा जाता है) के रूप में पैसे की मांग करते हैं. जो लोग पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें धमकियां मिल सकती हैं या उनके व्यापारिक ठिकानों और निर्माण स्थलों पर हमले हो सकते हैं. ये दोनों व्यक्ति भारत की पहुंच से बाहर रहकर काम कर रहे हैं, इसलिए अब तक पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है.

 

राहुल सिंह के बारे में बताया जाता है कि यह पहले कुख्यात अपराधी अमन साहू के गिरोह से जुड़ा था. वहीं अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने उसके गिरोह की कमान संभाल ली थी. राहुल दुबे का गिरोह भी झारखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. गिरोह झारखंड के कोयला और औद्योगिक क्षेत्रों में रंगदारी वसूलने का नेटवर्क चला रहा है. यह गिरोह रांची, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग समेत कई जिलों में सक्रिय रहा है. 

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